हाल ही में साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति, निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स (Nikos Christodoulides), चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुँचे।
यात्रा की मुख्य विशेषताएँ
रणनीतिक साझेदारी: भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है।
रक्षा सहयोग: उन्होंने 5 वर्षीय रक्षा सहयोग रोडमैप (2026-2031) का अनावरण किया।
हस्ताक्षरित प्रमुख समझौते: आतंकवाद विरोधी, राजनयिक प्रशिक्षण, नवाचार, खोज एवं बचाव (SAR) सहयोग, उच्च शिक्षा और संस्कृति को कवर करने वाले छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
गतिशीलता और प्रवासी: भारत और साइप्रस में भारतीय पेशेवरों, छात्रों और श्रमिकों के आवागमन तथा कल्याण की सुविधा के लिए प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी और सामाजिक सुरक्षा समझौते में तेजी लाने पर सहमति बनी।
साइप्रस के बारे में
साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में अवस्थित एक द्वीपीय देश है, जो अपने समृद्ध इतिहास और संस्कृतियों के मिश्रण के लिए जाना जाता है।
स्थिति: तुर्किए के दक्षिण, सीरिया के पश्चिम और लेबनान व इजरायल के पास स्थित है।
राजधानी: निकोसिया (Nicosia)।
अंतरराष्ट्रीय संबद्धता: वर्ष 2004 से यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य। यह नाटो (NATO) का सदस्य नहीं है।
साइप्रस की राजनीतिक स्थिति: साइप्रस वर्ष 1974 से विभाजित है:-
दक्षिणी भाग: साइप्रस गणराज्य (Republic of Cyprus)।
उत्तरी भाग: उत्तरी साइप्रस का तुर्की गणराज्य (केवल तुर्की द्वारा मान्यता प्राप्त)।
यहाँ एक संयुक्त राष्ट्र बफर जोन (UN Buffer Zone) मौजूद है, जिसे ‘ग्रीन लाइन’ कहा जाता है।
साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (United Nations Peacekeeping Force in Cyprus- UNFICYP) यहाँ कार्य करती है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
मध्य प्रदेश के वन्यजीव अधिकारियों ने कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से जुड़ी छह बाघों की मौत के बाद, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में 100 से अधिक बाघों को कड़ी निगरानी में रखा है।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के बारे में
रोग की प्रकृति: CDV एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो कुत्तों, बाघों, शेरों, तेंदुओं और लोमड़ियों जैसे मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है।
प्रसार का माध्यम: यह सीधे संपर्क, श्वसन बूँदों (Respiratory Droplets), या दूषित भोजन और जल के माध्यम से फैलता है।
सामान्य लक्षण: लक्षणों में बुखार, कमजोरी, साँस लेने में तकलीफ, तंत्रिका संबंधी विकार और असामान्य गतिविधियाँ शामिल हैं।
उपचार और रोकथाम: इसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। टीकाकरण ही प्राथमिक निवारक उपाय है।
वैश्विक चिंता: CDV के प्रकोप ने पहले सेरेंगेटी राष्ट्रीय उद्यान जैसे क्षेत्रों में बड़ी बिल्लियों (Big Cats) को प्रभावित किया है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जो मंडला और बालाघाट जिलों में अवस्थित है, और प्रोजेक्ट टाइगर के तहत मूल नौ बाघ अभयारण्यों में से एक है।
स्थापना: वर्ष 1955 में एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित किया गया। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत वर्ष 1973 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह गोंडवाना क्षेत्र का हिस्सा है और पारंपरिक रूप से गोंड और बैगा जनजातियों द्वारा बसाया गया है।
वनस्पतियाँ: यहाँ साल के वन, बाँस के जंगल और घास के मैदानों की प्रधानता है।
प्रमुख वन्यजीव: यह बंगाल टाइगर और बारहसिंघा के सफल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। अन्य वन्यजीवों में तेंदुआ, ढोल (जंगली कुत्ता), स्लॉथ बियर और गौर शामिल हैं।
पक्षी विविधता: यहाँ पक्षियों की लगभग 300 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, इंडियन रोलर और ग्रे हॉर्नबिल शामिल हैं।
संरक्षण का महत्त्व: इसे ‘होमलैंड ऑफ हार्ड ग्राउंड बारहसिंघा’ (Homeland of Hard Ground Barasingha) के रूप में जाना जाता है।
यह आधिकारिक शुभंकर ‘भूरसिंह द बारहसिंघा’ प्रस्तुत करने वाला भारत का पहला टाइगर रिजर्व है।
सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरियाई मंत्री क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर और भारतीय सैनिकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
स्मारक के बारे में
उद्देश्य: इमझिंगाक पार्क (Imjingak Park) में 25 वर्ग मीटर का भारतीय युद्ध स्मारक, भारत के रक्षा मंत्रालय द्वारा कोरियाई युद्ध (1950-1953) में भारत की भागीदारी की 75वीं वर्षगाँठ की स्मृति में बनाया गया था।
कोरियाई युद्ध उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच लड़ा गया था, जिसके कारण विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) के साथ कोरियाई प्रायद्वीप का विभाजन हुआ।
भारतीय सेना को श्रद्धांजलि: यह युद्ध स्मारक निम्नलिखित के साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को सम्मानित करने के लिए बनाया गया था:-
भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एंबुलेंस
कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (CFI), जिसने कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौरान और बाद में सेवा की।
कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान
मानवीय चिकित्सा सहायता: हालाँकि भारत ने संघर्ष में लड़ाकू सैनिकों को तैनात नहीं किया था, लेकिन उसने 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेंस भेजी थी, जो एक 627 सदस्यीय चिकित्सा इकाई थी, जिसने युद्ध के दौरान सबसे बड़े चिकित्सा सहायता दल के रूप में कार्य किया।
मैरून एंजेल्स: इस इकाई को इसकी मानवीय सेवा के लिए कोरियाई लोगों से “मरून एंजेल्स” की उपाधि मिली।
हिंद नगर: इसे कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (CFI) द्वारा वर्ष 1954 में स्वदेश वापसी से पूर्व लगभग 22,000 युद्धबंदियों (POWs) को रखने के लिए स्थापित किया गया था।
वायु अस्त्र-1 (Vayu Astra-1)
पुणे स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी फर्म निबे लिमिटेड (Nibe Limited) ने पोखरण (राजस्थान) और जोशीमठ-मलारी (उत्तराखंड) में अपने स्वदेशी ‘वायु अस्त्र-1’ का एक परीक्षण चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
वायु अस्त्र-1 के बारे में
वायु अस्त्र-1 भारतीय सेना के लिए निबे लिमिटेड द्वारा विकसित एक स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन (loitering Munition) प्रणाली है।
लॉइटरिंग म्यूनिशन क्षमता: यह एक स्मार्ट ड्रोन के रूप में कार्य करता है, जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर मँडराने में सक्षम है और फिर सटीकता के साथ लक्ष्यों की पहचान कर उन पर हमला करता है।
संबंधित विकास: निबे लिमिटेड ने एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) में 150 किमी. और 300 किमी. की मारक क्षमता वाले स्वदेशी “सूर्यास्त्र” रॉकेटों का भी सफल परीक्षण किया।
मुख्य विशेषताएँ
लंबी दूरी की मारक क्षमता: इस प्रणाली ने 10 किलोग्राम के वॉरहेड का उपयोग करके 100 किमी. की दूरी पर मारक क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
उच्च परिशुद्धता सटीकता: इस प्रणाली ने सैन्य परीक्षणों के दौरान मानव-विरोधी हमलों में एक मीटर से कम और रात के समय बख्तरबंद-विरोधी अभियानों में लगभग दो मीटर की सटीक ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल’ (CEP) क्षमता प्रदर्शित की।
हमला रोकने और पुन: हमला करने की सुविधा (Abort and Reattack Feature): यह हथियार बीच उड़ान में भी अपने हमले को रोक सकता है और लक्ष्य पर नए सिरे से हमला कर सकता है, जिससे युद्ध के मैदान में रणनीतिक लचीलापन मिलता है।
रात्रिकालीन युद्ध क्षमता:इन्फ्रारेड कैमरा सिस्टम से संबद्ध, यह रात के समय के ऑपरेशनों के दौरान बख्तरबंद वाहनों को सटीक रूप से निशाना बना सकता है।
रिमोट ऑपरेशनल कंट्रोल: इस प्रणाली ने ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से 70 किमी. दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल सेगमेंट को परिचालन नियंत्रण के हस्तांतरण का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
Comprehensive coverage with a concise format Integration of PYQ within the booklet Designed as per recent trends of Prelims questions हिंदी में भी उपलब्ध
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