संदर्भ
हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की है।
संबंधित तथ्य
- मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत अन्य योजनाएँ
- मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS): घरेलू मोबाइल फोन विनिर्माण, भारतीय ब्रांडों, डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D), घरेलू मूल्य संवर्द्धन तथा निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए ₹62,500 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत की गई है।
- राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति (NIPU)-2026: 10 मिलियन टन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता वाले 8–9 नए गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों की स्थापना हेतु स्वीकृति दी गई, जिसका उद्देश्य आयात निर्भरता को कम करना तथा उर्वरक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार
- तेज बाजार वृद्धि: वर्ष 2025 में इसका मूल्य लगभग 792 अरब अमेरिकी डॉलर था तथा वर्ष 2026 तक इसके लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसका प्रमुख कारण AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5G, EVs तथा IoT का तीव्र विस्तार है।
- केंद्रित आपूर्ति शृंखला: विनिर्माण पर मुख्यतः ताइवान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान तथा चीन का प्रभुत्व है, जहाँ कुछ ही कंपनियाँ उन्नत चिप उत्पादन को नियंत्रित करती हैं।
- सामरिक महत्त्व: सेमीकंडक्टर आर्थिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता, तकनीकी नेतृत्व तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन गए हैं।
- भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण: भू-राजनीतिक तनावों के बीच देश आपूर्ति शृंखलाओं में विविधीकरण तथा कुछ सीमित विनिर्माण केंद्रों पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं।
भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार
- माँग में तीव्र वृद्धि: भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 54 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जिसका प्रमुख कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार तथा डिजिटलीकरण है।
- आयात निर्भरता: भारत वर्तमान में अपनी सेमीकंडक्टर आवश्यकताओं का 90% से अधिक आयात करता है, जिससे सामरिक संवेदनशीलताएँ उत्पन्न होती हैं।
- डिज़ाइन क्षमता: भारत सेमीकंडक्टर डिजाइन का एक वैश्विक केंद्र है, जहाँ विश्व के लगभग 20% चिप डिजाइन इंजीनियर कार्यरत हैं।
- विनिर्माण को प्रोत्साहन: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) तथा सेमीकॉन मिशन 2.0 के माध्यम से भारत का लक्ष्य डिजाइन, फैब्रिकेशन, एटीएमपी/ओसैट, पैकेजिंग तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) को समाहित करते हुए एक समग्र सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
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सेमीकॉन मिशन 2.0 के बारे में
- उद्देश्य: स्वदेशी चिप डिजाइन, विनिर्माण तथा आपूर्ति शृंखलाओं को प्रोत्साहित करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी, सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।
- निवेश लक्ष्य: योजना अवधि के दौरान लगभग ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना तथा ₹2 लाख करोड़ मूल्य के सेमीकंडक्टर उत्पादन को सुगम बनाना।
- छह-स्तंभीय रणनीति: चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, आपूर्ति शृंखला विकास, सेमीकंडक्टर सामग्री तथा पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर केंद्रित है।
- विस्तारित दायरा: चिप विनिर्माण के अतिरिक्त कच्चे माल, विशिष्ट गैसों, खनिजों, रसायनों तथा सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला के अन्य महत्त्वपूर्ण घटकों के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- सामरिक ध्यान: AI, मेमोरी चिप्स, उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों तथा सामरिक इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
- पूर्ववर्ती सफलता पर आधारित: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (वर्ष 2021) का विस्तार करता है, जिसके अंतर्गत लगभग ₹1.64 लाख करोड़ के निवेश वाली 12 परियोजनाओं को पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

अर्द्धचालक के बारे में
- अर्द्धचालक ऐसा पदार्थ होता है, जिसकी विद्युत चालकता चालक तथा कुचालक के मध्य होती है, जिससे विद्युत प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है।
- सामान्य पदार्थ: सर्वाधिक व्यापक रूप से प्रयुक्त अर्द्धचालक सिलिकॉन (Si) है, जबकि जर्मेनियम (Ge) तथा गैलियम आर्सेनाइड (GaAs) का उपयोग विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है।
- प्रमुख विशेषता: इसकी चालकता को डोपिंग (अशुद्धियाँ मिलाकर) के माध्यम से सटीक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग तथा सिग्नल प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त बनता है।
- अनुप्रयोग: सेमीकंडक्टर ICs, माइक्रोप्रोसेसरों, मेमोरी चिप्स, सेंसरों तथा पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा, AI तथा चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है।
- सामरिक महत्त्व: अर्द्धचालक को डिजिटल अर्थव्यवस्था के निर्माण खंड माना जाता है, जो AI, 5G, IoT, EVs, क्वांटम कंप्यूटिंग तथा उन्नत विनिर्माण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का आधार हैं।
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सेमीकॉन मिशन 2.0 की आवश्यकता
- आयात निर्भरता में कमी: भारत सेमीकंडक्टर के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिससे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों का जोखिम बना रहता है।
- भू-राजनीतिक जोखिमों का समाधान: वैश्विक सेमीकंडक्टर की कमी तथा भू-राजनीतिक तनावों ने सुरक्षित एवं सुदृढ़ घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
- भविष्य की माँग की पूर्ति: AI, EVs, 5G, IoT, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तथा रक्षा प्रौद्योगिकियों के तीव्र विस्तार से उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स की माँग तेजी से बढ़ रही है।
- आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना: चिप्स, कच्चे माल तथा महत्त्वपूर्ण घटकों का घरेलू विनिर्माण एक समेकित सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए आवश्यक है।
- तकनीकी संप्रभुता को सुदृढ़ करना: स्वदेशी सेमीकंडक्टर क्षमताएँ सामरिक स्वायत्तता, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
अन्य पहलों के बारे में
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) (2021): भारत में एक समग्र अर्द्धचालक एवं डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना के लिए ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत किया गया।
- इसका कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) द्वारा किया जाता है।
- डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना (2021): घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियों को चिप डिजाइन, उत्पाद विकास तथा वाणिज्यीकरण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना (2020): मोबाइल फोन तथा निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक घटकों के बड़े पैमाने पर विनिर्माण को प्रोत्साहित कर निर्यात तथा घरेलू मूल्य संवर्द्धन में वृद्धि का लक्ष्य रखती है।
- इलेक्ट्रॉनिक घटकों एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण संवर्द्धन योजना (SPECS) (2020): इलेक्ट्रॉनिक घटकों, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग, उप-संयोजनों तथा विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स के विनिर्माण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
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निष्कर्ष
सेमीकॉन मिशन 2.0 स्वदेशी डिजाइन, विनिर्माण तथा नवाचार को प्रोत्साहित करके भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगा तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता, आर्थिक सुदृढ़ता एवं वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा देगा।