संदर्भ
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और दक्षिण कोरिया ने व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक भविष्योन्मुखी साझेदारी का अनावरण किया है।
संबंधित तथ्य
- उच्च स्तरीय जुड़ाव: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्योंग ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की।
- वैश्विक संदर्भ: वैश्विक तनावों के मध्य शांति, स्थिरता और हिंद-प्रशांत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस साझेदारी को एक संयुक्त प्रयास के रूप में तैयार किया गया है।

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के मुख्य परिणाम
- रणनीतिक विजन: भारत और दक्षिण कोरिया ने संबंधों को भविष्योन्मुखी साझेदारी में बदलने के लिए एक ‘संयुक्त रणनीतिक विजन’ अपनाया है।
- संस्थागत तंत्र: व्यापार, उद्योग और संसाधनों के मध्य समन्वय बढ़ाने के लिए एक ‘भारत-कोरिया औद्योगिक सहयोग समिति’ की स्थापना।
- CEPA अपग्रेड: बेहतर बाजार पहुँच और निवेश प्रवाह के लिए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (2009) को अपग्रेड करने हेतु वार्ताओं में तेजी लाने का निर्णय।
- डिजिटल सहयोग: AI, सेमीकंडक्टर और IT सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ‘भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ का शुभारंभ।
- आर्थिक सुरक्षा: आपूर्ति शृंखला और महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को मजबूत करने के लिए ‘आर्थिक सुरक्षा संवाद’ की शुरुआत।
- क्षेत्रीय समझौता ज्ञापन (MoUs): बंदरगाहों, स्टील, एमएसएमई (MSMEs), विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई और सांस्कृतिक उद्योगों में समझौतों पर हस्ताक्षर।
- वित्तीय और निवेश: वित्तीय सहयोग, डिजिटल भुगतान प्रणाली और भारत में एक कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप की योजना।
- वैश्विक जुड़ाव: दक्षिण कोरिया ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ और ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ में शामिल हुआ।
- भारत दक्षिण कोरिया के सियोल में स्थित ‘ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टिट्यूट’ में शामिल होगा।
- जन-से-जन संबंध: एक ‘विशिष्ट आगंतुक कार्यक्रम’ और ‘सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (2026–2030)’ की शुरुआत।
- सांस्कृतिक सहयोग: आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में एक ‘K-pop हब’ और ‘भारत-कोरिया मैत्री उत्सव (2028)’ की योजना।
भारत-दक्षिण कोरिया व्यापार
- व्यापार लक्ष्य: द्विपक्षीय व्यापार को 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 54 अरब डॉलर करना।
- वृद्धि की आवश्यकता: लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लगभग 18% वार्षिक विकास दर की आवश्यकता है।
- पूरक क्षमताएँ: भारत बाजार का आकार और कार्यबल प्रदान करता है, जबकि दक्षिण कोरिया प्रौद्योगिकी तथा नवाचार उपलब्ध कराता है।
- रणनीतिक दृष्टिकोण: वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के लिए सह-उत्पादन, सह-डिजाइन और सह-नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना।
- दीर्घकालिक विजन: वर्ष 2047 तक भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के अनुरूप एक लचीली आर्थिक साझेदारी बनाने के लिए संबंधों को मजबूत करना।