संदर्भ
सेबी (SEBI) ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर खुदरा भागीदारी बढ़ाने के लिए सोशल इंपैक्ट फंड्स में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आवश्यक न्यूनतम निवेश को ₹2 लाख से घटाकर ₹1,000 कर दिया है।
सोशल स्टॉक एक्सचेंज (Social Stock Exchange- SSE) के बारे में
- सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) एक ऐसा मंच है, जो सामाजिक उद्यमों और गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) को जनता से धन जुटाने में सक्षम बनाता है।
- यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के विनियमन के तहत कार्य करता है।
- उद्देश्य
- सामाजिक क्षेत्र में फंडिंग की कमी को दूर करना।
- सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए पूँजी के पारदर्शी और कुशल संचलन को बढ़ावा देना।
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संबंधित तथ्य
- इससे SEBI के ‘पूँजी जारी करने और प्रकटीकरण आवश्यकताएँ, 2018′ (Issue of Capital and Disclosure Requirements, 2018) के तहत ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स’ में निवेश करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आवेदन आकार की शर्त, ‘सोशल इम्पैक्ट फंड’ में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आवश्यक न्यूनतम निवेश मूल्य की शर्त के अनुरूप हो जाएगी।
सोशल इंपैक्ट फंड्स (SIFs) के बारे में
- सोशल इंपैक्ट फंड्स, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा विनियमित वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) ढाँचे के तहत फंड की एक श्रेणी है।
- उद्देश्य: उचित वित्तीय रिटर्न के साथ-साथ मापने योग्य सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करना।
- AIF के तहत वर्गीकरण: इसे श्रेणी I (Category I) AIF के रूप में वर्गीकृत किया गया है:
- इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और गरीबी उन्मूलन जैसे सामाजिक रूप से वांछनीय क्षेत्रों में निवेश शामिल है।
- अपनी विकासात्मक भूमिका के कारण इसे विनियामक सहायता प्राप्त होती है।
- निवेश का केंद्र: मुख्य रूप से इनमें निवेश करते हैं:
- गैर-लाभकारी संगठन (NPOs)
- शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका सृजन जैसे क्षेत्रों में सेवारत सामाजिक उद्यम।
- शासी कानून: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा तैयार SEBI (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियम, 2012 के तहत विनियमित।
- उपयोग किए जाने वाले वित्तीय साधन (Instruments)
- जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) बॉण्ड
- गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) के लिए डिजाइन किए गए विशेष साधन।
- ये पारंपरिक वित्तीय रिटर्न नहीं देते हैं, लेकिन सामाजिक प्रभाव के लिए फंडिंग सक्षम करते हैं।
सोशल इंपैक्ट फंड्स (SIFs) की मुख्य विशेषताएँ
- दोहरा उद्देश्य: सोशल इंपैक्ट फंड्स, वित्तीय रिटर्न और सामाजिक प्रभाव के मध्य संतुलन बनाने का लक्ष्य रखते हैं। निवेशक न केवल रिटर्न कमाते हैं, बल्कि सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में भी योगदान देते हैं।
- उदाहरण के लिए: कम लागत वाले स्वास्थ्य सेवा स्टार्ट-अप में निवेश, जो लाभ कमाने के साथ-साथ ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पहुँच में सुधार करता है।
- प्रभाव का मापन: SIFs अनिवार्य प्रभाव रिपोर्टिंग के माध्यम से जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर देते हैं। वे निम्नलिखित पर नजर रखते हैं:
- सामाजिक परिणाम जैसे शिक्षा में सुधार, स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और गरीबी में कमी।
- ESG संकेतक (पर्यावरण, सामाजिक और शासन मानक)।
- लक्षित क्षेत्र: निवेश सामाजिक रूप से प्रासंगिक और विकासात्मक क्षेत्रों की ओर निर्देशित होता है, जैसे:
- स्वास्थ्य सेवा: उदाहरण के लिए, किफायती क्लीनिक, टेलीमेडिसिन सेवाएँ।
- शिक्षा: उदाहरण के लिए, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, ग्रामीण स्कूल।
- आजीविका सृजन: उदाहरण के लिए, कौशल विकास कार्यक्रम, सूक्ष्म वित्त पहल।
- पर्यावरण और स्थिरता: उदाहरण के लिए, नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाएँ।
- ये क्षेत्र समावेशी विकास और सतत् विकास जैसे व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
सोशल इंपैक्ट फंड्स की सीमाएँ
- प्रभाव मापन की जटिलता: विविध क्षेत्रों में सामाजिक परिणामों को मापना और उनका मानकीकरण करना कठिन है। सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मानकों की कमी तुलना को चुनौतीपूर्ण बनाती है। जैसे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार या दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को मापना सीधा या आसान नहीं है।
- निवेशक जागरूकता की कमी: सोशल इंपैक्ट फंड्स अभी भी एक सीमित निवेश मार्ग हैं, जिससे भागीदारी कम रहती है। खुदरा निवेशकों में अक्सर निम्नलिखित समझ की कमी होती है:
- सामाजिक वित्त (Social Finance) की अवधारणाएँ।
- ऐसे फंडों का जोखिम-रिटर्न प्रोफाइल।
- रिटर्न बनाम प्रभाव का संतुलन: वित्तीय रिटर्न को सामाजिक उद्देश्यों के साथ संतुलित करना एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। उच्च सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं में वित्तीय रिटर्न कम या विलंबित हो सकता है।
- उदाहरण के लिए: ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों में निवेश से भले ही मजबूत सामाजिक मूल्य का सृजन हो, लेकिन इससे अल्पकालिक लाभ सीमित हो सकते हैं।
वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Funds – AIFs)
- ये ‘प्राइवेटली पूल्ड इंवेस्टमेंट व्हीकल्स’ (Privately pooled investment vehicles) हैं, जो वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करते हैं, जो सावधि जमा (FD), स्टॉक आदि जैसे पारंपरिक स्रोतों से भिन्न होते हैं।
- कौन निवेश करता है: उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्ति (HNIs) और संस्थान AIFs में निवेश करते हैं, क्योंकि निवेश की राशि काफी अधिक होती है।
- विनियमन: AIFs को SEBI (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियम, 2012 के माध्यम से सेबी (SEBI) द्वारा विनियमित किया जाता है।
- इन्हें एक ट्रस्ट, कंपनी, सीमित देयता भागीदारी (LLP), या एक कॉरपोरेट निकाय के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
- प्रकार: इसे आगे 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है;
- श्रेणी I (Category I) AIF
- AIF की यह श्रेणी स्टार्ट-अप्स, शुरुआती चरण के उद्यमों, सामाजिक उद्यमों आदि में निवेश करती है।
- उदाहरण: वेंचर कैपिटल फंड (एंजेल फंड सहित), SME फंड, सोशल वेंचर फंड, इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड।
- श्रेणी II (Category II) AIF
- ये वे AIF हैं, जो श्रेणी I और III के अंतर्गत नहीं आते हैं। ये अपने दैनिक परिचालन खर्चों को कवर करने के अलावा किसी अन्य प्रभाव या ऋण का उपयोग नहीं करते हैं।
- उदाहरण: प्राइवेट इक्विटी फंड, डेट फंड, फंड ऑफ फंड्स।
- श्रेणी III (Category III) AIF
- ये AIF अपने निवेश में जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों का उपयोग करते हैं। यह सूचीबद्ध या असूचीबद्ध डेरिवेटिव में निवेश के लिए प्रभाव या ऋण का उपयोग कर सकते हैं।
- उदाहरण: सार्वजनिक इक्विटी फंड में निजी निवेश (PIPE), हेज फंड।
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