सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश के लिए सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए

21 Apr 2026

संदर्भ

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 में फलौदी (राजस्थान) और रंगारेड्डी (तेलंगाना) में हुई दो लगातार सड़क दुर्घटनाओं के बाद राजमार्ग सुरक्षा में सुधार के लिए देशव्यापी निर्देश जारी किए, जिनमें 34 लोगों की मौत हो गई थी।

न्यायालय द्वारा मुख्य टिप्पणियाँ

  • मृत्यु दर का उच्च संकेंद्रण: राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सड़क नेटवर्क का 2% हिस्सा हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में इनका योगदान लगभग 30% है, जो व्यवस्थागत सुरक्षा विफलताओं को दर्शाता है।
  • दायित्व: सड़क सुरक्षा को अनुच्छेद-21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ से जोड़ा गया।
    • भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत निहित ‘जीवन का अधिकार’ केवल जीवन को गैर-कानूनी रूप से छीनने के विरुद्ध गारंटी नहीं है, बल्कि यह राज्य पर एक सकारात्मक अधिदेश है कि वह एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करे, जहाँ मानव जीवन संरक्षित और मूल्यवान हो।
  • व्यवस्थागत लापरवाही: अवैध पार्किंग, सड़क किनारे निर्मित ढाँचे और खराब तरीके से प्रबंधित ‘ब्लैकस्पॉट’ को दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों के रूप में पहचाना गया।
  • संवैधानिक शक्तियों का उपयोग: पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने और देशव्यापी अनुपालन लागू करने के लिए अनुच्छेद-142 के तहत निर्देश जारी किए गए।
    • अनुच्छेद-142 सर्वोच्च न्यायालय को उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” करने के लिए आवश्यक डिक्री या आदेश पारित करने की शक्ति देता है।

जारी किए गए प्रमुख निर्देश

  • राजमार्ग पार्किंग पर प्रतिबंध: भारी या व्यावसायिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिजवे (Carriageways) या शोल्डर पर, निर्धारित पार्किंग स्थल को छोड़कर, कहीं भी नहीं रुक सकते।
  • सड़क किनारे निर्मित ढाँचों को हटाना: राजमार्ग पर भीड़भाड़ रोकने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे’ (ROW) के भीतर किसी भी नए ढाबे, भोजनालय या अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की अनुमति नहीं है।
    • राइट ऑफ वे (Right of Way): यह राजमार्ग के निर्माण, संचालन और भविष्य के विस्तार के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि की कुल चौड़ाई है।
    • ROW में न केवल पक्का हिस्सा (सड़क) शामिल है, बल्कि इसमें शोल्डर, डिवाइडर (Medians), जल निकासी प्रणाली और भविष्य के विस्तार भी शामिल हैं।
  • प्रौद्योगिकी-आधारित प्रवर्तन: कैमरों, गति डिटेक्टरों, जीपीएस-आधारित साक्ष्यों और ई-चालान जनरेशन के साथ उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ATMS) का उपयोग।
  • जिला राजमार्ग सुरक्षा टास्क फोर्स: प्रत्येक जिला जहाँ से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, उसे जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)/ लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों को शामिल करते हुए एक टास्क फोर्स गठित करनी होगी।
  • ट्रक पार्किंग स्थल संबंधी सुविधाएँ: ट्रकों और लंबी दूरी के वाहनों के लिए निर्दिष्ट पार्किंग वाले क्षेत्रों का निर्माण।
  • ब्लैकस्पॉट सुधार और लाइटिंग: राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान और उनमें सुधार।
  • कठोर समन्वय: ये निर्देश राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर लागू होते हैं।

अनुपालन समयरेखा

  • जिला टास्क फोर्स: न्यायालय के आदेश के 15 दिनों के भीतर गठित की जाएगी।
  • अवैध ढाँचों को हटाना: सड़क किनारे के सभी अनधिकृत ढाँचों को 60 दिनों के भीतर हटाया जाना चाहिए।
  • न्यायालय को अनुपालन रिपोर्ट: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

निष्कर्ष

यह निर्णय भारत के सड़क सुरक्षा शासन को मजबूत करने और यात्रियों के जीवन के अधिकार की रक्षा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक पहल है।

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