आधुनिक संघर्षों में सूचना युद्ध

25 Apr 2026

संदर्भ

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दर्शाते हैं कि डिजिटल विमर्श और सोशल मीडिया युद्ध अब जनमानस को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे भारत के संदर्भ में फेक न्यूज तथा संकटकालीन संचार में विद्यमान कमियों को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

सूचना युद्ध क्या है?

  • सूचना युद्ध से तात्पर्य सूचना, संचार साधनों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के रणनीतिक उपयोग से है, जिसका उद्देश्य धारणाओं को प्रभावित करना, तथ्यों को विकृत कर प्रस्तुत करना और राजनीतिक या सैन्य लाभ के लिए जनमत को आकार देना है।
  • इसमें प्रचार, ‘फेक न्यूज’, मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप और नियंत्रित संदेश जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनका लक्ष्य प्रत्यक्ष शारीरिक संघर्ष के बिना रणनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करना है।

सूचना युद्ध की प्रमुख विशेषताएँ

  • परंपरागत युद्ध से भिन्न: सूचना युद्ध भौतिक युद्धक्षेत्रों से भिन्न डिजिटल और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में कार्य करता है, जिसका लक्ष्य क्षेत्रीय नियंत्रण के स्थान पर लोगों के सोचने और प्रतिक्रिया करने के तरीके को प्रभावित करना होता है।
    • उदाहरण: रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, दोनों पक्षों ने सैन्य अभियानों के साथ-साथ वैश्विक जनमत को प्रभावित करने और घरेलू मनोबल बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया अभियानों का प्रयोग किया।
  • विमर्श नियंत्रण: इसका प्राथमिक उद्देश्य घटनाओं के बारे में धारणाओं और व्याख्याओं को आकार देना है, जिससे प्रायः वास्तविकता की तुलना में धारणा अधिक प्रभावशाली हो जाती है।
    • उदाहरण: पश्चिम एशियाई तनाव के दौरान विकासशील देशों के मध्य सहानुभूति प्राप्त करने के लिए ईरान ने खुद को वैश्विक चर्चा में आक्रामकता का शिकार बताया।
  • गति और प्रसार: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचना का त्वरित प्रसार होता है, जिससे आधिकारिक बयान आने से पहले ही विमर्श प्रचलित हो जाती हैं।
    • उदाहरण: इजराइल-हमास युद्ध के दौरान, वीडियो और क्लिप मिनटों में विश्व स्तर पर वायरल हो गए, जिससे सत्यापित रिपोर्ट सामने आने से पहले ही जनमत प्रभावित हो गया।
  • भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक अपील: सामग्री को भय, क्रोध या सहानुभूति जैसी तीव्र भावनाओं को उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया जाता है, जिससे यह तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की तुलना में जनमत को अधिक प्रभावी ढंग से प्रभावित करती है।
    • उदाहरण के लिए: सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान प्रसारित नागरिक हताहतों की तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय प्रतिक्रियाओं और जनभावना को अत्यधिक सीमा तक प्रभावित किया।
  • सत्य और असत्य संबंधी अस्पष्टता: सटीक जानकारी, गलत जानकारी और प्रचार संबंधी भ्रम पैदा करता है, जिससे दर्शकों के लिए प्रामाणिकता की पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है।
    • उदाहरण के लिए: रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान डीपफेक और भ्रामक वीडियो ने युद्धक्षेत्र की वास्तविक जानकारियों और हेरफेर की गई सामग्री के बीच अंतर करना कठोर बना दिया।
  • बहु-हितधारक भागीदारी: सरकार, मीडिया आउटलेट, प्रभावशाली व्यक्ति और ऑनलाइन समुदाय सहित राज्य और गैर-राज्य दोनों प्रकार के अभिकर्त्ता, जानबूझकर या अनजाने में, इन तथ्यों को प्रसारित करते हैं।
    • उदाहरण के लिए, इस्लामिक स्टेट से जुड़े संघर्षों में, दुष्प्रचार न केवल समूह द्वारा बल्कि सहानुभूति रखने वालों और विभिन्न देशों में ऑनलाइन नेटवर्क द्वारा भी प्रसारित किया गया था।

सूचना युद्ध के प्रमुख उपकरण

  • सोशल मीडिया अभियान: X, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रयोग प्रायः पारंपरिक मीडिया फिल्टर को दरकिनार करते हुए लक्षित संदेशों को तेजी से प्रसारित करने और बड़े पैमाने पर जनमत को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
    • ये अभियान पहुँच बढ़ाने के लिए वायरल होने की क्षमता, हैशटैग और प्रभावशाली व्यक्तियों पर निर्भर करते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक संचालन (साइ-ऑप्स): ये ऐसी रणनीतियाँ हैं जो प्रायः भय, भ्रम पैदा करके या किसी विशेष पक्ष के लिए समर्थन बढ़ाकर व्यक्तियों या समूहों की भावनाओं, मनोबल और व्यवहार को प्रभावित करने के लिए बनाई जाती हैं।
    • उदाहरण के लिए: हाल ही में पश्चिम एशियाई तनाव के दौरान, बेंजामिन नेतन्याहू से संबंधितफेक’ चित्रों और ईरान से जुड़े मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा फैलाई गई अफवाहों का प्रयोग भ्रम फैलाने, नेतृत्व की विश्वसनीयता को कम करने और जनता की धारणा को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने के लिए किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय  संबंधों पर प्रभाव

  • वैचारिक प्रभुत्व बनाम सैन्य शक्ति: समकालीन भू-राजनीति में, विचारधाराओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्रायः सैन्य शक्ति जितनी ही महत्त्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वैश्विक जनमत कूटनीतिक दबाव, प्रतिबंधों और वैधता को प्रभावित कर सकता है।
    • उदाहरण के लिए: रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, युद्धक्षेत्र की वास्तविकताओं के बावजूद, यूक्रेन की सशक्त डिजिटल कहानी संबंधी क्षमता और सोशल मीडिया पर वास्तविक समय में पहुँच ने पश्चिमी देशों के जनसमर्थन को अत्यधिक सीमा तक प्रभावित किया और सैन्य एवं वित्तीय सहायता में वृद्धि की।
  • कूटनीतिक छवि प्रबंधन: संघर्षों या संकटों के दौरान विश्वसनीयता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित करने के लिए देश तेजी से सक्रिय छवि निर्माण और प्रबंधन में संलग्न होते हैं।
    • उदाहरण के लिए: ईरान ने लगातार वैश्विक मीडिया प्लेटफॉर्म और कूटनीतिक संदेशों का उपयोग करते हुए स्वयं को संप्रभुता और प्रतिरोध के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान, ताकि वैश्विक दक्षिण से समर्थन प्राप्त किया जा सके।
  • सूचना कूटनीति का उदय: पारंपरिक कूटनीति अब डिजिटल जुड़ाव रणनीतियों द्वारा पूरक है, जहाँ देश पारंपरिक मध्यस्थों की परवाह न करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से वैश्विक नागरिकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: भारत सहित कई दूतावास अब वास्तविक समय आधारित बयान और संकटकालीन अपडेट जारी करने के लिए X (ट्विटर) हैंडल का उपयोग कर रहे हैं, जो प्रत्यक्ष सार्वजनिक कूटनीति की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
  • वैश्विक मीडिया में विश्वास की हानि: ‘फेक न्यूज’, दुष्प्रचार और परस्पर विरोधी कथनों के प्रसार ने मुख्यधारा के अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में जनता के विश्वास में गिरावट ला दी है, जिससे वैश्विक मामलों में सामान्य सहमति बनाना जटिल हो गया है।
    • उदाहरण के लिए: इजराइल-हमास युद्ध के दौरान, विभिन्न मीडिया आउटलेट्स से विरोधाभासी रिपोर्टों, अपुष्ट वीडियो और पक्षपातपूर्ण कवरेज ने वैश्विक दर्शकों के बीच व्यापक भ्रम और संदेह पैदा किया।

सूचना युद्ध से निपटने में भारत के सामने चुनौतियाँ

  • फेक न्यूज’ का तीव्र प्रसार: स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग के कारण ‘फेक न्यूज’, एडिटिड वीडियो और अफवाहें आधिकारिक संचार से भी तेजी से फैलती हैं, जिससे अधिकारियों के लिए वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो जाता है।
    • उदाहरण के लिए: कोविड-19 महामारी जैसे संकटों के दौरान, लॉकडाउन और स्वास्थ्य संबंधी उपायों के बारे मेंफेक न्यूज’ सरकार द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने से पहले ही व्हाट्सएप पर व्यापक रूप से फैल गईं।
  • देरी से और सतर्क आधिकारिक प्रतिक्रिया: भारत की संचार शैली प्रायः संयमित और नौकरशाही वाली होती है, जिसके कारण तेजी से बदलती डिजिटल सूचनाओं पर प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है।
    • कई अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान, औपचारिक बयान जारी होने से पहले ही सोशल मीडिया पर अनौपचारिक सूचनाओं ने जनमत को प्रभावित किया।
  • कम डिजिटल साक्षरता: जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन सामग्री की आलोचनात्मक रूप से पुष्टि करने में असमर्थ है, जिससे वे ‘फेक न्यूज’ और दुष्प्रचार के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
    • बाल अपहरण से संबंधित वायरल फर्जी संदेशों के कारण भारत के कुछ हिस्सों में भीड़ द्वारा हिंसा भड़क उठी।
  • मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र की भिन्नता: भारत के विविध भाषाई और क्षेत्रीय मीडिया परिदृश्य के कारण विभिन्न प्लेटफार्मों और दर्शकों के बीच एक सुसंगत और एकीकृत दृष्टिकोण बनाए रखना कठिन हो जाता है।
    • एक ही घटना की क्षेत्रीय मीडिया चैनलों पर अलग-अलग व्याख्या हो सकती है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
  • गैर-सरकारी तत्वों की भागीदारी: सूचना युद्ध केवल सरकारों तक सीमित नहीं है; प्रभावशाली समूह, बॉट और गोपनीय नेटवर्क भी प्रायः नियामक नियंत्रण से बचकर विचारों का प्रसार करते हैं।
    • रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, समर्थकों के वैश्विक नेटवर्क ने ऑनलाइन विचारों को बढ़ावा दिया।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विनियमन में संतुलन: भारत को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किए बिना ‘फेक न्यूज’ का मुकाबला करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
    • फर्जी खबरों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को कभी-कभी सेंसरशिप कहकर आलोचना की जाती है, जिससे नीतिगत दुविधा उत्पन्न होती है।
  • बाह्य प्रभाव: विदेशी तत्व समन्वित डिजिटल अभियानों के माध्यम से भारतीय जनमत को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे आंतरिक सूचना प्रबंधन जटिल हो जाता है।
    • कश्मीर मुद्दे से संबंधित आख्यानों को प्रायः वैश्विक मंचों पर बाह्य प्रभाव द्वारा आकार दिया जाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार ने सूचना युद्ध का मुकाबला कैसे किया?

  • समयबद्ध और सक्रिय आधिकारिक संचार: सरकार ने प्रेस ब्रीफिंग और आधिकारिक बयानों के माध्यम से यथाशीघ्र प्रामाणिक जानकारी जारी करना सुनिश्चित किया, जिससे अफवाहों के फैलने के अंतराल को कम किया जा सके।
    • उदाहरण के लिए: प्रेस सूचना ब्यूरो और रक्षा अधिकारियों ने ऑपरेशन की प्रकृति और उद्देश्यों पर शीघ्र स्पष्टीकरण जारी किए, जिससे सोशल मीडिया पर अटकलों को सीमित किया जा सके।
  • बहु-प्लेटफॉर्म आधारित सूचना का प्रसार: अधिकारियों ने व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने और सभी दर्शकों तक संदेश की एकरूपता बनाए रखने के लिए पारंपरिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के संयोजन का उपयोग किया।
    • उदाहरण के लिए: आधिकारिक अपडेट पीआईबी विज्ञप्तियों, टेलीविजन ब्रीफिंग और विदेश मंत्रालय जैसे सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से एक साथ साझा किए गए, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों नागरिकों को एक ही सत्यापित जानकारी प्राप्त हुई।
  • वास्तविक समय आधारित तथ्य-जाँच और ‘फेक न्यूज’ पर नियंत्रण: सरकार ने संस्थागत तथ्य-जाँच तंत्र के माध्यम से फर्जी खबरों का सक्रिय रूप से मुकाबला किया, जिससे तनाव और गलत व्याख्या को रोका जा सके।
    • उदाहरण के लिए: पीआईबी फैक्ट चेक ने सैनिकों की आवाजाही और हताहतों से संबंधित वायरल फर्जी वीडियो और भ्रामक दावों का खंडन किया, जो ऑनलाइन व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे थे।
  • संतुलित और विश्वसनीय रणनीतिक संदेश: भारत ने पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए सनसनीखेज बयानबाजी से बचते हुए, संयमित और तथ्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाया, जिससे विश्वसनीयता बढ़ी।
    • उदाहरण के लिए: अतिशयोक्तिपूर्ण दावों के बजाय, आधिकारिक संचार ने विशिष्ट, सत्यापन योग्य परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों दोनों के बीच विश्वास निर्माण में सहायता प्राप्त हुई।
  • वैश्विक दर्शकों को स्पष्ट राजनयिक संकेत: संचार को न केवल घरेलू उपयोग के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के उद्देश्य और संयम का संकेत देने के लिए भी तैयार किया गया था, जिससे तनाव बढ़ने या गलत व्याख्या को रोका जा सके।
    • उदाहरण के लिए: विदेश मंत्रालय के बयानों में इस बात पर जोर दिया गया कि यह अभियान लक्षित और आनुपातिक था, जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप था।
  • एकीकृत दृष्टिकोण के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय: सशस्त्र बलों, मंत्रालयों और मीडिया इकाइयों सहित कई हितधारकों ने विरोधाभासों से बचते हुए एक सुसंगत दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए घनिष्ठ समन्वय में काम किया।
    • उदाहरण के लिए: संयुक्त ब्रीफिंग और समन्वित संदेशों ने यह सुनिश्चित किया कि विभिन्न सरकारी स्रोतों से कोई विरोधाभासी जानकारी सामने न आए।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय सूचना युद्ध संबंधी रणनीति विकसित करना: भारत को सूचना युद्ध का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक और संस्थागत रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें मंत्रालयों, खुफिया एजेंसियों और सशस्त्र बलों के प्रयासों को एकीकृत किया जाए और भविष्य के डिजिटल संघर्षों के लिए तैयारी सुनिश्चित की जाए।
  • डिजिटल पहुँच और संकट संचार को मजबूत करना: विदेश मंत्रालय की डिजिटल क्षमता को बढ़ाना ताकि संकट के दौरान वास्तविक समय में, स्पष्ट और सुसंगत संचार सुनिश्चित किया जा सके, साथ ही फेक न्यूज’ पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूत संकट संचार ढाँचे विकसित किए जा सकें।
  • राजनयिकों की क्षमता निर्माण: राजनयिकों और अधिकारियों को मीडिया प्रबंधन, कथा निर्माण और सोशल मीडिया सहभागिता में प्रशिक्षित करना, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान प्रभावी संचारक और डिजिटल प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य कर सकें।
  • प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों और नागरिक समाज के साथ सहयोग: ‘फेक न्यूज’ का पता लगाने, उन्हें चिह्नित करने और उनका मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों, तथ्य-जाँच संगठनों और नागरिक समाज समूहों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना, जिससे एक समन्वित और बहु-हितधारक प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
  • AI-आधारित निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों का उपयोग: भारत को फेक न्यूज, डीपफेक और समन्वित दुष्प्रचार अभियानों का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स उपकरणों में निवेश करना चाहिए, जिससे अफवाहें फैलने से पहले ही त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सके।
    • उदाहरण: कई देश अब संघर्षों और चुनावों के दौरान ‘फेक न्यूज’ के प्रसार की निगरानी रखने के लिए AI-संचालित सोशल मीडिया निगरानी का उपयोग कर रहे हैं।
  • डिजिटल साक्षरता और जन जागरूकता को बढ़ावा देना: दीर्घकालिक समाधान यह है कि नागरिकों को ऑनलाइन जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने, फर्जी खबरों की पहचान करने और सत्यापित स्रोतों पर विश्वास करने के लिए शिक्षित किया जाए, जिससे जमीनी स्तर पर ‘फेक न्यूज’ का प्रभाव कम हो सके।
    • कोविड-19 महामारी के दौरान संचालित जन जागरूकता अभियानों ने कुछ क्षेत्रों में ‘फेक’ स्वास्थ्य उपायों और अफवाहों के प्रसार को कम करने में मदद की।

सूचना युद्ध के प्रति ईरान का दृष्टिकोण

आयाम विवरण
पारंपरिक मीडिया से परे सोशल मीडिया का उपयोग ईरान ने पारंपरिक मीडिया माध्यमों की सीमित उपलब्धता के समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग किया, जिससे डिजिटल चैनलों के माध्यम से वैश्विक दर्शकों के साथ सीधा संवाद सुनिश्चित हुआ।
विविध संचार उपकरण इसने पहुँच और सहभागिता बढ़ाने के लिए आधिकारिक बयानों के साथ-साथ मीम्स, लघु वीडियो, एआई-जनित दृश्य, अंग्रेजी भाषा के हास्य और पीड़ित नागरिकों की छवियों का सहारा लिया।
विशिष्ट वैचारिक निर्माण संदेशों को अलग-अलग श्रोताओं के लिए तैयार किया गया था: वैश्विक दक्षिण (हमले का शिकार राज्य), अरब जनता (पश्चिमी विरोधी प्रतिरोध), पश्चिमी श्रोता (अमेरिकी अतिचार और नागरिकों की पीड़ा का प्रयोग करते हुए नैतिक आलोचना)।
इंटरनेट संस्कृति और भावनात्मक संदेशों का उपयोग ईरान ने युवा ऑनलाइन दर्शकों से जुड़ने के लिए औपचारिक सैद्धांतिक संदेशों के बजाय व्यंग्य, कटाक्ष और इंटरनेट संस्कृति को अपनाया।
ऑनलाइन वैचारिक दृष्टिकोण निर्माण में निपुणता विरोधियों की सैन्य श्रेष्ठता के बावजूद, ईरान संकट के दौरान ऑनलाइन नैरेटिव को आकार देने और बनाए रखने में अत्यधिक सक्रिय रहा।

फेक न्यूज’, भ्रामक सूचना और दुष्प्रचार के बीच अंतर

पहलू फेक न्यूज’ भ्रामक सूचना दुष्प्रचार
अर्थ गलत या असत्य जानकारी जो नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य के बिना साझा की गई हो। जानबूझकर निर्मित ‘फेक न्यूज’ जिसका उद्देश्य धोखा देना हो। जानकारी (सच्ची/झूठी/पक्षपातपूर्ण) जिसका उपयोग व्यवस्थित रूप से जनमत को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
उद्देश्य कोई स्व आशय नहीं जानबूझकर धोखा देना जानबूझकर बहकाना/हस्तक्षेप करना
सत्यता संबंधी मानदंड आमतौर पर असत्य, लेकिन अनजाने में साझा किया गया झूठा और मनगढ़ंत सत्य, आंशिक सत्य या असत्य हो सकता है
स्रोत आम लोग, सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सरकारी निकाय, संगठन, समन्वित समूह सरकारें, राजनीतिक समूह, मीडिया तंत्र
उद्देश्य जानकारी देना (लेकिन गलत तरीके से) गुमराह करना, भ्रमित करना, अस्थिरता पैदा करना विचारधारा को आकार देना, विचारों को नियंत्रित करना
उदाहरण व्हाट्सएप पर बिना पुष्टि वाला संदेश फॉरवर्ड करना चुनाव के दौरान मतदाताओं को गुमराह करने के लिए प्रसारित की गई फेक न्यूज शीत युद्ध के दौरान युद्धकालीन विचारों का प्रसार
प्रभाव भ्रम, तनाव उत्पन्न होना अविश्वास, ध्रुवीकरण दीर्घकालिक जनमत निर्माण, जन प्रभाव

निष्कर्ष

भारत के समक्ष चुनौती यह है कि वह तेजी से जटिल एवं गतिशील डिजिटल सूचना परिवेश में लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए फेक न्यूज का त्वरित एवं प्रभावी प्रबंधन एवं विनियमन सुनिश्चित करे।

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.