संदर्भ
भारत और इटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को “विशेष सामरिक साझेदारी” में उन्नत किया।
भारत–इटली बैठक के प्रमुख बिंदु
- विशेष सामरिक साझेदारी की घोषणा: भारत और इटली ने दीर्घकालिक सामरिक सहयोग को गहरा करने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को “विशेष सामरिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया।
- यह संबंधों में एक मौलिक उन्नयन को दर्शाता है, जिससे दोनों देश इंडो–मेडिटेरेनियन कॉरिडोर में प्रमुख भू-राजनीतिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकीय केंद्र के रूप में स्थापित होते हैं।
- साझेदारी योजना का क्रियान्वयन: भारत–इटली संयुक्त सामरिक कार्य योजना, 2025–29 की समीक्षा के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में तंत्र निर्माण पर सहमति हुई, जो विशेष सामरिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा।
- व्यापार और निवेश सहयोग को सुदृढ़ करना: दोनों देशों ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 14 अरब यूरो से बढ़ाकर 20 अरब यूरो करने का लक्ष्य निर्धारित किया।
- रक्षा औद्योगिक रोडमैप का अंतिम रूप: भारत और इटली ने एक नए रक्षा औद्योगिक रोडमैप के तहत रक्षा निर्माण में सह-विकास और सह-उत्पादन पर सहमति व्यक्त की।
- “इंडो–मेडिटेरेनियन” धुरी: दोनों पक्षों ने भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे का समर्थन किया, जिससे आपूर्ति शृंखला, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संपर्क को सुदृढ़ किया जा सके।
- समुद्री साझेदारी को सुदृढ़ करना: दोनों देशों ने समुद्री परिवहन, बंदरगाह आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स और ब्लू इकोनॉमी क्षेत्र में सहयोग पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी संबंधी समझौता ज्ञापन पर भी सहमति बनी।
- विस्तारित सहयोग के क्षेत्र: बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, उच्च शिक्षा, आयुर्वेद और जलवायु अनुसंधान में सहयोग का विस्तार किया गया।
- त्रिपक्षीय साझेदारी: दोनों देशों ने अफ्रीकी साझेदारों के साथ डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संपर्क एवं अवसंरचना तथा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में त्रिपक्षीय पहल पर मिलकर कार्य करने पर सहमति जताई, जो भारत की अफ्रीका में विकास साझेदारी तथा इटली की ‘मैट्टी योजना’ (Mattei Plan) के अनुरूप है।
- 80वीं वर्षगाँठ: भारत और इटली ने वर्ष 2027 को “भारत–इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे उनके कूटनीतिक संबंधों की 80वीं वर्षगाँठ को चिह्नित किया जाएगा।
भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC)
- IMEC एक प्रस्तावित ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी’ और अवसंरचना पहल है, जो भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप को जोड़ती है।
- उद्गम: यह पहल वर्ष 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के माध्यम से शुरू की गई।
- हस्ताक्षरकर्ता: प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्राँस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
- गलियारे की संरचना: इस परियोजना में एक पूर्वी गलियारा शामिल है, जो भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है, और एक उत्तरी गलियारा, जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ता है।

IMEC के प्रमुख उद्देश्य
- व्यापार संपर्क को सुदृढ़ करना: यह गलियारा बंदरगाहों, रेलमार्गों और नौवहन मार्गों को एकीकृत कर लॉजिस्टिक्स लागत और परिवहन समय को कम करने का प्रयास करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना: इसका उद्देश्य ऊर्जा परिवहन नेटवर्क, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा ग्रिड और हरित हाइड्रोजन पाइपलाइनें शामिल हैं, को सुगम बनाना है।
- डिजिटल संपर्क को बढ़ावा देना: यह पहल समुद्र के नीचे केबल और डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से संचार और सीमा-पार वित्तीय एकीकरण को सुदृढ़ करने का प्रस्ताव करती है।
- वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का विविधीकरण: इसका उद्देश्य पारंपरिक व्यापार अवरोध बिंदुओं पर निर्भरता को कम करना और विभिन्न क्षेत्रों में सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित करना है।
- आर्थिक एकीकरण को प्रोत्साहित करना: यह गलियारा प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को जोड़कर निवेश, विनिर्माण और रोजगार अवसरों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
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भारत–इटली संबंधों के बारे में
- भारत और इटली लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं तथा व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और बहुपक्षीय कूटनीति के क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
- उद्गम: भारत और इटली ने वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद कूटनीतिक संबंध स्थापित किए।
- आर्थिक सहयोग: इटली, यूरोप में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जिसमें विनिर्माण, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और फैशन उद्योगों में सहयोग शामिल है।

- रक्षा सहयोग: दोनों देश रक्षा प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक उत्पादन में सहयोग को बढ़ा रहे हैं।
- बहुपक्षीय सहभागिता: भारत और इटली G20, संयुक्त राष्ट्र और भारत–यूरोपीय संघ संवाद तंत्रों जैसे मंचों में सहयोग करते हैं।
- संपर्क और अवसंरचना सहयोग: इटली भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे का समर्थन करता है, जिसका उद्देश्य एकीकृत परिवहन और ऊर्जा गलियारों के माध्यम से भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप को जोड़ना है।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी: सहयोग का विस्तार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, अर्द्धचालक और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में हुआ है।
- सांस्कृतिक और ‘पीपुल-टू-पीपुल’ संबंध: सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, शैक्षणिक सहयोग और गतिशीलता समझौते दोनों देशों के बीच सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करते हैं।
- इटली में 2,00,000 से अधिक भारतीय निवास करते हैं, जो यूरोपीय संघ में सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते भारतीय समुदायों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हालिया बैठक का महत्त्व
- यूरोप के साथ भारत की सहभागिता को सुदृढ़ करता है: यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के मध्य यूरोप के साथ भारत की सामरिक पहुँच को मजबूत करती है।
- सुदृढ़ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का समर्थन: भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा और समुद्री सहयोग पारंपरिक अवरोध बिंदुओं पर निर्भरता को कम कर सकते हैं तथा व्यापार संपर्क को बेहतर बना सकते हैं।
- रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को सुदृढ़ करता है: रक्षा सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी सहयोग भारत की सामरिक स्वायत्तता और औद्योगिक आधुनिकीकरण को समर्थन प्रदान कर सकते हैं।
- ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा: महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स में सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता को बेहतर बना सकता है।
निष्कर्ष
भारत–इटली विशेष सामरिक साझेदारी दो प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच व्यापार, संपर्क, रक्षा और वैश्विक शासन में बढ़ते अभिसरण को दर्शाती है।