भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता

4 Jun 2026

संदर्भ

भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) आधिकारिक रूप से 1 जून, 2026 से लागू हो गया है।

संबंधित तथ्य 

मूल रूप से दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित यह प्रमुख समझौता श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर व्यापारिक करों में कटौती करके और खाड़ी क्षेत्र तक एक अत्यंत सुरक्षित शिपिंग मार्ग प्रदान करके एक रणनीतिक आर्थिक संपर्क स्थापित करता है।

मुख्य परिणाम 

  • तत्काल शुल्क समाप्ति: ओमान ने मूल्य के आधार पर भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क को शून्य कर दिया है, जो 99.38% भारतीय वस्तुओं को कवर करता है।
    • यह सभी उत्पाद श्रेणियों के 98.08% को कवर करता है, जो पहले के 15.33% मानक की तुलना में एक बड़ा बदलाव है।
  • दवाओं के लिए फास्ट ट्रैक: वैश्विक नियामकों (जैसे USFDA या यूरोपीय EMA) द्वारा पहले से स्वीकृत चिकित्सा उपचार और टीकों को ओमान में 90 दिनों के भीतर विपणन अनुमति मिलेगी, जिससे दोबारा परीक्षण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
  • कॉरपोरेट स्थानांतरण नियमों में सुधार: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भीतर कर्मचारियों के आंतरिक स्थानांतरण की सीमा 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है।
    • कॉरपोरेट विशेषज्ञ अब 4 वर्ष तक रह सकते हैं। व्यावसायिक यात्रियों को 90 दिनों तक की अनुमति मिलेगी।

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  • पारस्परिक मानक मान्यता: ओमान भारत के निर्यात निरीक्षण परिषद (Export Inspection Council- EIC) के निरीक्षण दस्तावेजों को स्वीकार करेगा, साथ ही भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और घरेलू हलाल प्रमाण-पत्रों को भी मान्यता देगा।
    • राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP): यह भारत की आधिकारिक जैविक प्रमाणन प्रणाली है, जिसे APEDA द्वारा लागू किया जाता है और यह जैविक कृषि, प्रसंस्करण और निर्यात के मानक निर्धारित करता है।
    • घरेलू हलाल प्रमाण-पत्र: ये प्रमाण-पत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद इस्लामी आहार मानकों के अनुरूप हैं और घरेलू तथा निर्यात बाजारों के लिए मान्य हैं।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) के बारे में 

CEPA एक सर्वसमावेशी और गहन एकीकरण वाला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग को आधुनिक और सुदृढ़ बनाना है। यह केवल वस्तुओं पर शुल्क कम करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि एक साझा नियामक ढाँचा स्थापित करता है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:-

  • भौतिक वस्तुओं और सामग्री का सुगम व्यापार।
  • 127 सेवा उप-क्षेत्रों तक खुली पहुँच।
  • कुशल श्रमिकों और पेशेवरों के लिए स्पष्ट गतिशीलता नियम।
  • व्यापार नियमों और मानकीकरण पर संयुक्त सहयोग।
    • इस समझौते के साथ, भारत दुनिया का केवल दूसरा देश (संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद) बन गया है, जिसने ओमान के साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार संधि की है।

भारत–ओमान आर्थिक संबंध 

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वैश्विक शिपिंग चुनौतियों के बावजूद स्थिर और निरंतर वृद्धि दर्शा रहा है।

  • व्यापार मात्रा: कुल व्यापार वित्त वर्ष 2025–26 में बढ़कर $11.18 बिलियन हो गया, जो पिछले वर्ष के $10.61 बिलियन से अधिक है।
  • भारत का निर्यात मिश्रण ($3.64 बिलियन): इसमें मुख्य रूप से रिफाइंड ऊर्जा उत्पाद शामिल हैं, जैसे पेट्रोल ($781 मिलियन) और नैफ्था ($746 मिलियन), साथ ही लोहा, इस्पात, मशीनरी और बासमती चावल।
  • भारत का आयात मिश्रण ($7.20 बिलियन): इसमें प्रमुख रूप से कच्चा तेल ($1.6 बिलियन), तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) ($1.2 बिलियन), उर्वरक ($843 मिलियन) तथा रासायनिक फीडस्टॉक्स शामिल हैं।

भारत के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) का महत्त्व 

  • वैकल्पिक व्यापार मार्ग: सलालाह (Salalah) और दुक्म (Duqm) जैसे ओमानी बंदरगाह सीधे खुले हिंद महासागर पर अवस्थित हैं। इससे क्षेत्रीय तनाव के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण निर्भरता के बिना भारत को ऊर्जा और माल परिवहन के लिए एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग प्राप्त होता है।
  • वस्त्र एवं MSME क्षेत्र को समर्थन: ओमान ने 945 वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प उत्पादों पर लगने वाले 5% आयात शुल्क को समाप्त कर दिया है, जिससे भारतीय MSMEs, कारीगरों और लघु व्यवसायों को ओमान के 598 मिलियन डॉलर के परिधान बाजार तक बेहतर पहुँच मिलेगी।
  • संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण: घरेलू किसानों और आजीविकाओं की सुरक्षा के लिए भारत ने डेयरी, अनाज, ताजे फल, सब्जियाँ और मसाले जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है।
  • ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा: यह समझौता भौगोलिक संकेतकों को मान्यता देता है, जिससे प्रामाणिक भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक पहचान तथा बाजार मूल्य में वृद्धि होगी।

उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियाँ 

  • सीमित उपभोक्ता बाजार: ओमान की जनसंख्या अपेक्षाकृत कम (लगभग 55 लाख) है और उसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 110 अरब डॉलर है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं के लिए विकास की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं।
  • लक्जरी बाजारों में कमजोर उपस्थिति: ओमान के आभूषण क्षेत्र में भारत की पूर्व उपस्थिति बहुत कम (1.07 अरब डॉलर के बाजार में केवल 25.78 मिलियन डॉलर) थी। भारतीय कंपनियों को नए खुदरा नेटवर्क विकसित करने होंगे।
  • कठोर विदेशी प्रतिस्पर्द्धा: भारतीय इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को चीन, इटली और तुर्किए के स्थापित आपूर्तिकर्ताओं से कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ता है, जो पहले से ही ओमान की अवसंरचना परियोजनाओं में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
  • लंबित सामाजिक सुरक्षा समझौता: यद्यपि कुशल श्रमिकों के लिए वीजा सुविधाओं का विस्तार हुआ है, फिर भी सामाजिक सुरक्षा समझौता (SSA) अभी लंबित है। इसके अंतिम रूप लेने तक भारतीय कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए दोहरा वित्तीय अंशदान का बोझ उठाना पड़ सकता है।

आगे की राह 

  • ओमान में उत्पादन केंद्र विकसित करना: भारतीय व्यवसायों को अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति का विस्तार करने के लिए ओमान के सोहार (Sohar) और दुक्म (Duqm) जैसे मुक्त व्यापार क्षेत्रों में दीर्घकालिक विनिर्माण एवं उत्पादन केंद्र स्थापित करने चाहिए।
  • ओमान को क्षेत्रीय प्रवेश-द्वार के रूप में उपयोग करना: कंपनियाँ खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) क्षेत्र तथा पूर्वी अफ्रीका के बड़े बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए ओमान को एक सुरक्षित लॉन्च-पॉइंट के रूप में उपयोग कर सकती हैं।
  • सामाजिक सुरक्षा समझौते में तेजी लाना: सरकार को लंबित सामाजिक सुरक्षा समझौते पर वार्ताओं में तेजी लानी चाहिए, ताकि क्षेत्र में कर्मचारियों को भेजने वाली भारतीय कंपनियों की परिचालन लागत कम हो सके।
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