आधार वर्ष 2022–23 के साथ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई शृंखला

4 Jun 2026

संदर्भ

हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की एक नई शृंखला प्रारंभ की, जिसमें आधार वर्ष 2022–23 निर्धारित किया गया है, जो वर्ष 2011–12 को प्रतिस्थापित करती है, ताकि वर्तमान औद्योगिक वृद्धि, उभरते क्षेत्रों और बदलती उपभोक्ता माँग को बेहतर रूप से प्रतिबिंबित किया जा सके।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 2022–23 के अद्यतन के साथ यह दसवीं बार है, जब आधार वर्ष में संशोधन किया गया है, जब से यह सूचकांक अविभाजित भारत में प्रारंभ हुआ था।
  • प्रथम औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का निर्माण वर्ष 1937 के आधार पर किया गया था। यह नवीनतम परिवर्तन तकनीकी सलाहकार समिति (TAC-IIP) के मार्गदर्शन में किया गया, ताकि पुरानी एवं अप्रासंगिक वर्ष 2011–12 की प्रणाली को समाप्त किया जा सके।

मुख्य प्रदर्शन—अप्रैल, 2026 (नई शृंखला)

  • समग्र औद्योगिक वृद्धि: भारत का कारखाना उत्पादन अप्रैल 2026 में अप्रैल 2025 की तुलना में 4.9% बढ़ा (जहाँ यह 5.8% था), जो स्थिर वृद्धि दर को दर्शाता है।
  • विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती: विनिर्माण क्षेत्र, जिसका सूचकांक में 76.06% का सबसे बड़ा भारांक है, ने 6.2% की मजबूत वृद्धि दर्ज की, जिसे विद्युत मशीनरी और वाहनों ने प्रेरित किया।
  • खनन क्षेत्र में गिरावट: इसके विपरीत, खनन एवं उत्खनन क्षेत्र में गिरावट देखी गई और यह 5.1% थी, जिसका कारण ईंधन और खनिजों के उत्पादन में कमी रहा।
  • उपयोग-आधारित प्रवृत्तियाँ: कारखाना निर्माण गतिविधियों में उच्च सक्रियता देखी गई, जहाँ पूँजीगत वस्तुएँ 16.0% बढ़ीं, इसके बाद अवसंरचना/निर्माण वस्तुओं में 7.1% की वृद्धि दर्ज की गई।
    • हालाँकि, मूल उपभोक्ता वस्तुओं में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बारे में (UPSC CSE Pre 2012)

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक महत्त्वपूर्ण मासिक आर्थिक संकेतक है, जो कारखानों और उद्योगों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की मात्रा में अल्पकालिक परिवर्तनों को मापता है।

  • मूल तंत्र: इसे प्रत्येक माह की 12 तारीख को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत कार्य करता है, प्रकाशित किया जाता है। इसका आधार सूचकांक मान हमेशा 100 निर्धारित किया जाता है।
    • वर्तमान और भविष्य के उत्पादन को इसी आधार के सापेक्ष प्रतिशत के रूप में मापा जाता है।
  • आर्थिक महत्त्व: चूँकि औपचारिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आँकड़े केवल तीन माह में एक बार जारी होते हैं, इसलिए मासिक IIP अर्थव्यवस्था की स्थिति का प्रारंभिक संकेतक प्रदान करता है।
    • यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नीति-निर्माताओं को व्यावसायिक गतिविधियों की गति का आकलन, आर्थिक वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने तथा ब्याज दर नीतियों को निर्धारित करने में सहायता करता है।

आधार वर्ष बदलने की आवश्यकता

पुरानी व्यवस्था को निम्नलिखित कारणों से अद्यतन करना आवश्यक था:

  • उभरते क्षेत्रों को शामिल करना: उन तेजी से बढ़ते उद्योगों को शामिल करने के लिए, जो वर्ष 2011 में अस्तित्व में नहीं थे या बहुत छोटे स्तर पर थे।

3 4

  • उत्पादन पैटर्न में सुधार: घटते उद्योगों के कारण उत्पन्न पुराने आँकड़ों के असंतुलन को ठीक करने के लिए।
  • बदलती उपभोग प्रवृत्तियाँ: कारखाना संबंधी आँकड़ों को वर्तमान में लोगों और व्यवसायों की वास्तविक माँग के अनुरूप बनाने के लिए।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ: भारत की पद्धतियों को संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए।

4 4

वर्ष 2022–23 ढाँचे में प्रमुख परिवर्तन

नई व्यवस्था में औद्योगिक आँकड़ों के वर्गीकरण, गणना और निगरानी के तरीके में बड़े परिवर्तन किए गए हैं:

  • विस्तारित क्षेत्रीय कवरेज: सूचकांक अब केवल खनन, विनिर्माण और विद्युत जैसे पारंपरिक तीन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।
    • एक नया उपयोगिता क्षेत्र—जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन (2.02% भारांक) जोड़ा गया है।
    • साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र में अब विद्युत के साथ गैस आपूर्ति को भी शामिल किया गया है।
  • विस्तृत निगरानी
    • हरित ऊर्जा संक्रमण: विद्युत सूचकांक अब नवीकरणीय स्रोतों (जैसे- सौर, पवन, जलविद्युत) और गैर-नवीकरणीय स्रोतों (जैसे- तापीय और परमाणु) को अलग-अलग दर्शाता है, ताकि स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत के परिवर्तन की निगरानी की जा सके।
    • समावेशी खनन वर्गीकरण: खनन क्षेत्र को अब तीन भागों में विभाजित किया गया है:
      • ईंधन खनिज,
      • धात्विक खनिज (दुर्लभ मृदा तत्त्व सहित), तथा
      • अधात्विक खनिज (लघु खनिज सहित)—जिससे स्थानीय खनन गतिविधियों का पूर्ण आकलन हो सके।
  • संशोधित वस्तु सूची: उत्पाद सूची को 839 वस्तुओं से बढ़ाकर 1,042 उत्पादों तक विस्तारित किया गया है, जिन्हें 463 वस्तु समूहों (पहले 407) में रखा गया है।
    • शामिल की गई और हटाई गई वस्तुएँ भारत की बदलती औद्योगिक प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।
  • पैनल संबंधी परिवर्तन एवं नए स्रोत: जब कारखाने बंद हो जाते हैं, तब डेटा में व्यवधान न आए इसके लिए कारखाना प्रतिस्थापन संबंधी प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे बंद इकाइयों के स्थान पर कार्यरत इकाइयों को शामिल किया जा सके।
    • इसके अतिरिक्त, डेटा एकत्र करने वाली एजेंसियों की संख्या 12 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है।

5 4

6 4

क्षेत्रीय भारांकांश—आधार वर्ष 2011–12 बनाम आधार वर्ष 2022–23

प्रत्येक क्षेत्र को दिए गए भारांक को नवीनतम सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) के आँकड़ों के आधार पर अद्यतन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक खनन और विनिर्माण क्षेत्रों से कुछ भारांक हटकर अब हरित ऊर्जा और उपयोगिता क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हुआ है:

क्षेत्रीय वर्गीकरण 2011-12 भारांक (%) 2011-12 मद समूह 2022-23 भारांक (%) 2022-23 मद समूह
खनन एवं उत्खनन 14.372 1 11.053 3
विनिर्माण 77.633 405 76.062 455
विद्युत एवं गैस आपूर्ति 7.995 1 10.865 3
जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन शामिल नहीं शामिल नहीं 2.020 2
कुल सामान्य सूचकांक 100.00% 407 100.00% 463

आधार वर्ष 2022–23 के साथ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई शृंखला

Explore UPSC Foundation Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.