संदर्भ
हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की व्यापार नीति समीक्षा के दौरान कई सदस्य देशों ने WTO सुधारों के संदर्भ में भारत से बहुपक्षीय तथा सीमित समझौतों’ (प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स) के प्रति विरोधात्मक रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
- भारत ने यह बनाए रखा कि ऐसे प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स WTO की सर्वसम्मति-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को कमजोर करते हैं।

प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स क्या हैं?
- प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स ऐसे व्यापार समझौते हैं, जिन पर WTO के सभी सदस्य देशों के बजाय केवल कुछ इच्छुक सदस्य देश वार्ता करते हैं और उन्हें लागू करते हैं।
- प्रमुख समर्थक: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा चीन क्षेत्र-विशिष्ट व्यापार उदारीकरण को आगे बढ़ाने के लिए प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स के प्रमुख समर्थकों में शामिल हैं।
- सदस्यता: केवल वे देश, जो स्वेच्छा से इस समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं और उसका अनुमोदन करते हैं, इसके प्रावधानों से विधिक रूप से बाध्य होते हैं, जबकि बहुपक्षीय समझौते WTO के सभी सदस्य देशों पर लागू होते हैं।
- विधिक आधार: मराकेश समझौते के अंतर्गत प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स को एनेक्स 4 के अंतर्गत शामिल किया जाता है, जिसके लिए इन्हें WTO के विधिक ढाँचे में सम्मिलित करने हेतु सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होती है।
- उद्देश्य: इन समझौतों का उद्देश्य उभरते हुए व्यापारिक मुद्दों पर वार्ताओं को आगे बढ़ाना है, जहाँ WTO के सभी सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति प्राप्त करना कठिन होता है।

WTO के अंतर्गत प्रमुख ‘प्लुरिलैटरल इनिशिएटिव्स’
- इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD): निवेश वातावरण में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा विदेशी निवेश को सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है।
- एग्रीमेंट ऑन इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (ECA): डिजिटल व्यापार के लिए वैश्विक नियम स्थापित करने का प्रयास करता है, जिसमें सहभागी सदस्य देशों के मध्य इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क न लगाने का प्रावधान सम्मिलित है।
- फॉसिल फ्यूल सब्सिडी रिफॉर्म इनिशिएटिव: अप्रभावी फॉसिल फ्यूल सब्सिडीज के युक्तिसंगतकरण को बढ़ावा देता है।
- डायलॉग ऑन प्लास्टिक्स पॉल्यूशन एंड एनवायरनमेंटली सस्टेनेबल प्लास्टिक्स ट्रेड: प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने तथा प्लास्टिक के सतत् व्यापार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स पर भारत का दृष्टिकोण
- बहुपक्षवाद का संरक्षण: भारत का तर्क है कि विश्व व्यापार संगठन मूलतः सदस्य-प्रेरित, सर्वसम्मति-आधारित बहुपक्षीय संस्था है तथा प्लुरिलैटरल समझौतों से इस सिद्धांत का क्षरण नहीं होना चाहिए।
- सर्वसम्मति की आवश्यकता: भारत का मानना है कि सभी WTO सदस्य देशों की सर्वसम्मति के बिना प्लुरिलैटरल समझौतों को एनेक्स 4 (Annex 4) में शामिल करना मराकेश समझौते के प्रावधानों के विपरीत होगा।
- IFD का विरोध: 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14), याउंडे, कैमरून में भारत इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD) एग्रीमेंट को WTO के एनेक्स 4 (Annex 4) ढाँचे में शामिल करने का विरोध करने वाला एकमात्र देश था।
- अंतरिम व्यवस्थाओं को चुनौती: भारत ने एग्रीमेंट ऑन इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (ECA) के लिए WTO के महानिदेशक को अंतरिम व्यवस्थाओं के माध्यम से डिपॉजिटरी नामित किए जाने के विधिक आधार पर प्रश्न उठाया तथा तर्क दिया कि ऐसी व्यवस्थाएँ WTO की स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार करती हैं।
- संस्थागत चिंताएँ: भारत का मानना है कि सर्वसम्मति के बिना ‘प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स’ के माध्यम से WTO के कार्यक्षेत्र का विस्तार उसकी संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है तथा विकासशील देशों के हितों को प्रभावित कर सकता है।
प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स के पक्ष में तर्क:
- WTO सुधारों को सुगम बनाना: समर्थकों का तर्क है कि प्लुरिलैटरल एग्रीमेंट्स ऐसी परिस्थितियों में वार्ताओं को आगे बढ़ाने का व्यावहारिक माध्यम प्रदान करते हैं, जब सभी सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति प्राप्त करना कठिन हो।
- उभरते हुए मुद्दों का समाधान: ये डिजिटल ट्रेड, इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन, पर्यावरणीय सततता तथा ई-कॉमर्स जैसे नए क्षेत्रों में WTO को नियम विकसित करने में सक्षम बनाते हैं।
- लचीली भागीदारी: देश अपनी विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुसार स्वेच्छा से इसमें भाग ले सकते हैं, जबकि हस्ताक्षर न करने वाले देशों पर कोई दायित्व नहीं डाला जाता है।
- वैश्विक व्यापार को बढ़ावा: समर्थकों का मत है कि समान नियम पूर्वानुमेयता, पारदर्शिता तथा निवेशकों के विश्वास को बढ़ाते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
- व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ प्लुरिलैटरल वार्ताओं का समर्थन करती हैं, जबकि WTO के 129 सदस्य देशों ने इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD) एग्रीमेंट का समर्थन किया है।