संदर्भ
केंद्र सरकार ने प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) की अद्यतन शृंखला जारी करते हुए इसका आधार वर्ष 2011–12 से संशोधित कर वर्ष 2022–23 कर दिया है।
संबंधित तथ्य
- नई शृंखला ने पूर्ववर्ती वर्ष 2011–12 शृंखला का स्थान ले लिया है तथा प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP), थोक मूल्य सूचकांक (WPI) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे अन्य प्रमुख समष्टि आर्थिक संकेतकों के साथ संरेखित किया है, जिन सभी का सामान्य आधार वर्ष अब 2022–23 है।

प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) की अद्यतन शृंखला की प्रमुख विशेषताएँ
- संशोधित आधार वर्ष: आधार वर्ष को 2011–12 से संशोधित कर 2022–23 कर दिया गया है, जिससे यह सूचकांक वर्तमान औद्योगिक संरचना का अधिक प्रतिनिधित्व करता है तथा अन्य समष्टि आर्थिक संकेतकों के साथ संगति सुनिश्चित करता है।
- क्षेत्रीय कवरेज का विस्तार: लौह अयस्क (Iron Ore) को शामिल करके कोर उद्योगों की संख्या आठ से बढ़ाकर नौ कर दी गई है, जिससे विशेषकर इस्पात उद्योग में औद्योगिक उत्पादन के प्रमुख आगत (Input) के रूप में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को मान्यता मिली है।
- संशोधित भार संरचना: विभिन्न क्षेत्रों को दिए गए भार का पुनर्निर्धारण किया गया है, ताकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में उनकी अद्यतन हिस्सेदारी तथा अर्थव्यवस्था की बदलती औद्योगिक संरचना को परिलक्षित किया जा सके।
- कार्यप्रणाली संबंधी सुधार: इस्पात उत्पादन को अब शुद्ध उत्पादन के स्थान पर सकल उत्पादन के आधार पर मापा जाएगा, ताकि IIP के साथ कार्यप्रणालीगत संगति सुनिश्चित की जा सके।
- कोयला कवरेज का परिष्करण: संशोधित शृंखला में केवल कच्चे कोयले को रखा गया है, जबकि परिशोधित कोयला (Washed Coal) तथा कोल मिडलिंग (Coal Middling) को दोहरी गणना (Double Counting) से बचने के लिए सूचकांक को हटा दिया गया है, क्योंकि दोनों कच्चे कोयले से ही प्राप्त होते हैं।
क्षेत्रीय भारांकों में परिवर्तन:
- अधिक भार वाले क्षेत्र: विद्युत क्षेत्र के भार में सर्वाधिक वृद्धि हुई है, जो 19.85% से बढ़कर 30.932% हो गया है, जबकि उर्वरक क्षेत्र के भारांक में नाममात्र की वृद्धि हुई है।
- नव सम्मिलित लौह अयस्क क्षेत्र को 4.905% का भाग प्रदान किया गया है।
- अधिक भार बढ़ते विद्युतीकरण, विनिर्माण के विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पारितंत्र तथा बढ़ती विद्युत माँग को परिलक्षित करता है।
- कम भार वाले क्षेत्र: कोयला (10.33% से 5.596%), प्राकृतिक गैस (6.88% से 3.841%) तथा रिफाइनरी उत्पाद (28.04% से 22.572%) के भारांक को संशोधित क्षेत्रीय संरचना को परिलक्षित करने के लिए कम किया गया है।
- कोयला एवं रिफाइनरी क्षेत्र के भार में कमी निम्नलिखित को परिलक्षित करती है:
- भारत की औद्योगिक संरचना का विविधीकरण,
- विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र का बढ़ता योगदान,
- स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण, तथा
- अद्यतन औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अंतर्गत क्षेत्रीय उत्पादन हिस्सेदारी का पुनरीक्षण।
प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) के बारे में
- प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI) एक मासिक उत्पादन मात्रा सूचकांक है, जो भारत के कोर अवसंरचना उद्योगों के संयुक्त तथा व्यक्तिगत प्रदर्शन का मापन करता है।
- उद्देश्य: ICI औद्योगिक गतिविधियों का एक अग्रणी संकेतक है तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की प्रवृत्तियों का प्रारंभिक आकलन प्रदान करता है।
- कवरेज: संशोधित सूचकांक में अब नौ कोर उद्योग शामिल हैं—कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, विद्युत तथा लौह अयस्क।
- IIP में भारांक: ये नौ कोर उद्योग संयुक्त रूप से IIP का 32.88% हिस्सा रखते हैं, जबकि वर्ष 2011–12 शृंखला में यह 40.27% था, जो संशोधित औद्योगिक संरचना को परिलक्षित करता है।
- नोडल एजेंसी: इस सूचकांक का संकलन एवं मासिक प्रकाशन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) द्वारा किया जाता है।
- संबंधित सूचकांक: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का संकलन एवं प्रकाशन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किया जाता है, ताकि अर्थव्यवस्था के समग्र औद्योगिक प्रदर्शन का मापन किया जा सके।
संशोधित शृंखला का प्रभाव
- मासिक वृद्धि अनुमान: संशोधित कार्यप्रणाली के कारण मासिक वृद्धि अनुमानों में परिवर्तन आया है। उदाहरण के लिए, मई 2026 में प्रमुख उद्योगों की वृद्धि को पूर्ववर्ती शृंखला के अंतर्गत 0.5% से संशोधित शृंखला के अंतर्गत 3.2% किया गया है।
- हालिया प्रदर्शन: संशोधित शृंखला के अनुसार, जून 2026 में प्रमुख उद्योगों ने 5% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले पाँच महीनों में सर्वाधिक वृद्धि है।
- समग्र वृद्धि प्रवृत्ति: संशोधन ने दीर्घकालिक औद्योगिक वृद्धि प्रवृत्ति को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित नहीं किया है, क्योंकि वर्ष 2025–26 की एकवर्षीय वृद्धि में केवल मामूली परिवर्तन हुआ है, जो 1.1% से घटकर 1.0% हो गई है।
अद्यतन ICI का महत्त्व
- सांख्यिकीय सटीकता में सुधार: संशोधित शृंखला अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को प्रतिबिंबित करते हुए औद्योगिक गतिविधियों का अधिक सटीक एवं समकालीन मापन प्रदान करती है।
- डेटा सामंजस्य में सुधार: GDP, WPI, IIP तथा ICI में समान आधार वर्ष (2022–23) को अपनाने से भारत के प्रमुख समष्टि आर्थिक संकेतकों के मध्य संगति एवं तुलनीयता में सुधार होता है।
- बेहतर आर्थिक आकलन: अद्यतन शृंखला कोर क्षेत्र के प्रदर्शन के बेहतर मापन के माध्यम से अधिक विश्वसनीय औद्योगिक विश्लेषण, नीति निर्माण, आर्थिक पूर्वानुमान तथा निवेश योजना को सुविधाजनक बनाएगी।