संदर्भ
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने तनावग्रस्त बैंक परिसंपत्तियों के प्रबंधन संबंधी मानदंडों को अद्यतन करते हुए ‘निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ’ (Specified Non-Financial Assets– SNFAs) नामक नई नियामकीय श्रेणी प्रारंभ की है।
- इन परिसंपत्तियों की बिक्री मुख्यतः सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) के सिद्धांतों के अनुरूप सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाएगी तथा इन्हें मूल उधारकर्ता अथवा उससे संबंधित पक्षकारों को पुनः नहीं बेचा जा सकेगा।
सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट (SARFAESI) अधिनियम (सरफेसी अधिनियम), 2002 के बारे में
- यह बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) की वसूली दीर्घ न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिए बिना गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) की वसूली करने में सक्षम बनाता है।
- प्रमुख प्रावधान
- सिक्योरिटी इंटरेस्ट का प्रवर्तन: सुरक्षित ऋणदाता न्यायालय के पूर्व हस्तक्षेप के बिना बकायादार की सुरक्षित परिसंपत्तियों पर अधिकार कर सिक्योरिटी इंटरेस्ट का प्रवर्तन कर सकते हैं।
- एसेट रिकंस्ट्रक्शन: यह अधिनियम एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) की स्थापना एवं विनियमन का प्रावधान करता है, ताकि वे तनावग्रस्त वित्तीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण एवं प्रबंधन कर सकें।
- सुरक्षित परिसंपत्तियों की बिक्री: अधिकृत करने के पश्चात् सुरक्षित ऋणदाता बकाया राशि की वसूली हेतु सुरक्षित परिसंपत्तियों की बिक्री कर सकते हैं।
- उधारकर्ता का अपील का अधिकार: उधारकर्ता, निर्धारित विधिक ढाँचे के अंतर्गत ऋण वसूली अधिकरण (DRT) के समक्ष ऋणदाता की कार्रवाई को चुनौती दे सकता है।
- अपवाद: सामान्यतः यह अधिनियम कृषि भूमि तथा कुछ निर्दिष्ट सिक्योरिटी इंटरेस्ट्स पर लागू नहीं होता है।
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गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के बारे में
- गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) वह ऋण अथवा अग्रिम है, जिसके मूलधन अथवा ब्याज का भुगतान 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है, जिसके परिणामस्वरूप वह परिसंपत्ति बैंक के लिए आय का स्रोत नहीं होती है।
- NPA के प्रकार
- अधोमानक परिसंपत्ति (सबस्टैंडर्ड एसेट): ऐसी परिसंपत्ति, जिसे 12 माह अथवा उससे कम अवधि के लिए NPA के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।
- संदेहास्पद परिसंपत्ति (डाउटफुल एसेट): ऐसी परिसंपत्ति, जो 12 माह तक सबस्टैंडर्ड एसेट की श्रेणी में बनी रही हो।
- हानिग्रस्त परिसंपत्ति (लॉस एसेट): ऐसी परिसंपत्ति, जिसे वसूली योग्य नहीं (Uncollectible) अथवा इतने कम मूल्य की माना जाता है कि उसका बैंक योग्य परिसंपत्ति के रूप में बने रहना उचित नहीं है, यद्यपि उससे कुछ वसूली मूल्य प्राप्त हो सकता है।
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विनिर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) क्या हैं?
- निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) से आशय उन अचल संपत्तियों से है, जिन्हें उधारकर्ताओं द्वारा ऋण का पुनर्भुगतान न करने की स्थिति में बैंक प्राप्त करते हैं। इनमें आवासीय भवन, वाणिज्यिक संपत्तियाँ, औद्योगिक भूमि अथवा बकाया ऋण के निपटान में स्वीकार की गई अन्य अचल संपत्तियाँ शामिल हैं।
- इन परिसंपत्तियों का उपयोग सामान्य बैंकिंग परिचालनों में नहीं किया जाता तथा इन्हें मुख्यतः वसूली के उद्देश्य से रखा जाता है।
- RBI के तृतीय संशोधन निदेश, 2026 में बकायादारों से प्राप्त ऐसी गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, मूल्यांकन, प्रबंधन तथा निस्तारण के लिए एक व्यापक ढाँचा स्थापित किया गया है।
नए ढाँचे के प्रमुख प्रावधान
- बैंक किसी SNFA का अधिग्रहण तभी कर सकते हैं, जब उधारकर्ता का ऋण औपचारिक रूप से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत हो जाए।
- अधिग्रहण में बैंक के बकाया जोखिम (Outstanding Exposure) का पूर्ण अथवा आंशिक निपटान शामिल होना चाहिए।
- प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को SNFA के अधिग्रहण/निस्तारण पर एक विस्तृत आंतरिक नीति बनानी होगी, जिसमें पात्रता मानदंड, अनुमोदन प्रक्रिया तथा संपत्ति के अधिग्रहण से पूर्व किए जाने वाले वसूली प्रयासों का उल्लेख होगा।
- प्रतिषेध: बैंक द्वारा पुनः अधिकार में ली गई संपत्तियों को मूल उधारकर्ता अथवा उससे संबंधित पक्षकारों को पुनः नहीं बेचा जा सकेगा, भले ही वह संपत्ति बाद में SNFA के रूप में वर्गीकृत न रहे।
- लेखांकन व्यवस्था: SNFAs को सकल एनपीए, शुद्ध एनपीए (Net NPA) अथवा तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का भाग नहीं माना जाएगा। इसके स्थान पर इन्हें बैंक की बैलेंस शीट में “दावों की संतुष्टि में अर्जित गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियाँ” के रूप में पृथक दर्शाया जाएगा।