संदर्भ
हाल ही में अमेरिका और सऊदी अरब ने 30 वर्षीय शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते (Peaceful nuclear cooperation agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौते के प्रमुख अंश
- 123 समझौता: यह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1954 की धारा 123 के अंतर्गत एक समझौता है, जो अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब को नागरिक (असैन्य) परमाणु तकनीक की आपूर्ति करने की अनुमाति प्रदान करेगा।
- सुरक्षा उपाय: इसके साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा उपाय समझौता भी शामिल है, जिसे अमेरिकी प्रशासन द्वारा परमाणु सुरक्षा और वैश्विक अप्रसार मानकों (NPT) का समर्थन करने के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- रणनीतिक और आर्थिक महत्त्व: इस समझौते से अमेरिका-सऊदी रणनीतिक संबंध घनिष्ठ होंगे, अमेरिका में व्यावसायिक अवसर और रोजगार सृजन होने तथा सऊदी अरब की नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षमताओं का विस्तार होने की आशा है।
123 समझौता क्या है?
- इसका नाम अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1954 की धारा 123 के नाम पर रखा गया है।
- किसी भी अन्य देश के साथ अमेरिका के किसी भी महत्त्वपूर्ण परमाणु सहयोग के लिए यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी पूर्व शर्त है।
- अंतरराष्ट्रीय अप्रसार मानदंडों के अनुपालन की आवश्यकता के साथ-साथ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण को सुगम बनाता है।
- तकनीकी आदान-प्रदान, वैज्ञानिक अनुसंधान और सुरक्षा उपायों पर चर्चा के लिए एक ढाँचा प्रदान करता है।
- भारत का 123 समझौता: यह एक ऐतिहासिक उदाहरण है, क्योंकि भारत परमाणु अप्रसार संधि का पक्षकार न होने बाद भी परमाणु हथियार संपन्न देश है।
- अमेरिका ने भारत को परमाणु ऊर्जा अधिनियम की धारा 123(a)(2) के तहत ‘पूर्ण-क्षेत्र सुरक्षा उपायों’ (full-scope safeguards) की आवश्यकता से छूट दी थी।
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के बारे में
- परिचय: NPT एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना है।
- उत्पत्ति: यह संधि वर्ष 1968 में हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत की गई थी और 5 मार्च, 1970 को लागू हुई; वर्ष 1995 में इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था।
- मुख्य प्रावधान: परमाणु अप्रसार संधि तीन स्तंभों पर आधारित है: परमाणु अप्रसार, परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग।
- गैर-परमाणु-हथियार संपन्न राज्य, परमाणु हथियारों के विकास और अधिगृहित करने पर सहमत होते हैं, जबकि परमाणु-हथियार संपन्न राज्य परमाणु हथियारों के अहस्तांतरण का संकल्प लेते हैं और निरस्त्रीकरण का प्रयास करते हैं।
- परमाणु-हथियार संपन्न राज्य: NPT पाँच परमाणु-हथियार संपन्न राज्यों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्राँस और चीन) को मान्यता देती है, जिन्होंने 1 जनवरी, 1967 से पूर्व परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था।
- सत्यापन: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) सुरक्षा उपायों और शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों की निगरानी के माध्यम से अनुपालन का सत्यापन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- NPT के सदस्य: इस संधि के 191 सदस्य देश हैं, जिससे यह विश्व के सर्वाधिक व्यापक रूप से स्वीकृत हथियार-नियंत्रण समझौतों में से एक बन गई है। भारत, पाकिस्तान और इजरायल ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि उत्तर कोरिया वर्ष 2003 में इससे बाहर हो गया था।
- भारत का रुख: भारत NPT को भेदभावपूर्ण और असमान मानता है क्योंकि यह स्थायी रूप से देशों को परमाणु संपन्न और गैर-परमाणु-हथियार संपन्न राज्यों में विभाजित करता है।
- भारत अपने स्वतंत्र परमाणु सिद्धांत को बनाए रखते हुए सार्वभौमिक और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।