संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया उत्पादन के क्षमता विस्तार एवं निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 (National Investment Policy for Urea- NIPU-2026) को मंजूरी प्रदान की है।
यूरिया हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति- 2026 के बारे में
- यह रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग द्वारा गैस-आधारित यूरिया विनिर्माण में निवेश को प्रोत्साहित करने, यूरिया के स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत उर्वरकों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
- क्षेत्र: यह नीति नई गैस-आधारित यूरिया विनिर्माण इकाइयों पर लागू होगी।
- उत्तरवर्ती नीति: NIPU-2026, नई निवेश नीति (NIP), 2012 का स्थान लेती है, जिसकी निवेश अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।
राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता |
विवरण |
| लागत संरचना |
मूल्य निर्धारण ढाँचे में स्थिर लागत एवं परिवर्ती लागत को पृथक किया गया है। |
| शेयरधारकों की पूँजी पर प्रतिफल (Return on Equity) |
12%–16% की प्रतिफल सीमा निर्धारित की गई है। |
| विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम का शमन |
चार वर्ष बाद प्रचलित विनिमय दर के आधार पर स्थिर लागत को भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाएगा। |
| अपेक्षित बचत |
राष्ट्रीय निवेश नीति 2012 की परियोजनाओं की तुलना में प्रति संयंत्र की स्थापना लागत में 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का अनुमान है। |
| कार्यान्वयन निकाय |
उर्वरक विभाग इस नीति के अंतर्गत नई गैस-आधारित यूरिया इकाइयों को शामिल करेगा। |
यूरिया के बारे में
यूरिया (NH₂CONH₂) एक नाइट्रोजनयुक्त रासायनिक उर्वरक है तथा उच्च नाइट्रोजन मात्रा के कारण भारतीय कृषि में सर्वाधिक एवं व्यापक रूप से प्रयोग किया जाने वाला उर्वरक है।
- सर्वाधिक नाइट्रोजन मात्रा: इसमें लगभग 46% नाइट्रोजन होती है, जो सभी ठोस नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों में सर्वाधिक है। इस कारण यह विशेष रूप से गेहूँ, धान, गन्ना तथा अन्य अधिक पोषक तत्त्व आवश्यकता वाली फसलों की वृद्धि एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- खाद्य सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण: यह कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसानों की आय को समर्थन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सरकार द्वारा विनियमित मूल्य निर्धारण: यूरिया को यूरिया सब्सिडी योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराया जाता है तथा इसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) भारत सरकार द्वारा वैधानिक रूप से निर्धारित की जाती है, ताकि यह किसानों के लिए किफायती बनी रहे। इसके विपरीत, गैर-यूरिया उर्वरक पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के अंतर्गत आते हैं।
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नीति की आवश्यकता
- आयात पर निर्भरता: उर्वरकों के विश्व के सबसे बड़े उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं में से एक होने के बावजूद भारत अब भी यूरिया की अत्यधिक मात्रा का आयात करता है।
- बढ़ती माँग: कृषि विस्तार तथा खाद्य सुरक्षा की आवश्यकताओं के कारण उर्वरकों की बढ़ती माँग घरेलू उत्पादन क्षमता में अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता उत्पन्न करती है।

- NIP-2012 की समाप्ति: नई निवेश नीति (NIP), 2012 की निवेश अवधि समाप्त होने के बाद सरकार को नए यूरिया संयंत्रों की स्थापना के लिए नए प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे संशोधित निवेश ढाँचे की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
- ऊर्जा दक्षता: गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों को प्रोत्साहित करना, जो नेफ्था-आधारित संयंत्रों की तुलना में अधिक ऊर्जा-दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल हैं तथा सतत् औद्योगिक विकास के अनुरूप है।
पूर्ववर्ती नई निवेश नीति (NIP), 2012:
- प्रारंभकर्ता: उर्वरक विभाग।
- उद्देश्य: निम्नलिखित में निवेश को प्रोत्साहित करना—
- ग्रीनफील्ड यूरिया परियोजनाएँ।
- ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजनाएँ।
- विद्यमान संयंत्रों का पुनरुद्धार एवं विस्तार।
- बंद पड़े यूरिया संयंत्रों का पुनरुद्धार।
- उपलब्धियाँ: NIP-2012 के अंतर्गत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं:
- चार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSEs) के संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से।
- दो निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा।
NIPU-2026 का महत्त्व
- उर्वरक सुरक्षा को सुदृढ़ करता है: घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाता है तथा वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है।
- आयात निर्भरता में कमी: आयातित यूरिया पर भारत की निर्भरता घटाकर व्यापार संतुलन में सुधार करता है।
- किसानों को समर्थन: कृषि क्षेत्र के लिए यूरिया की स्थिर एवं समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
- निवेश को प्रोत्साहन: अधिक नीतिगत निश्चितता प्रदान करता है तथा उर्वरक विनिर्माण में निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है।
- राजकोषीय दक्षता में सुधार: पारदर्शी मूल्य निर्धारण व्यवस्था तथा संशोधित लागत संरचना से यूरिया उत्पादन सहायता पर सरकारी व्यय में कमी आने की अपेक्षा है।
- आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्साहन: कृषि के इस रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण निवेश घटक में आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करता है।
निष्कर्ष
यूरिया हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 (NIPU–2026), दक्ष गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। तथापि, इसकी सफलता समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन, प्राकृतिक गैस की सुनिश्चित उपलब्धता तथा भारतीय कृषि में संतुलित एवं सतत् उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरक प्रयासों पर निर्भर करेगी।