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अरुणाचल प्रदेश में अवैध आप्रवासन

4 Jun 2026

संदर्भ

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 के तहत वीजा पंजीकरण नियमों को सख्त किया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में ‘इनर लाइन परमिट’ (ILP) प्रणाली को और कठोर बनाने की माँग को लेकर प्रदर्शन हुए, ताकि जनसांख्यिकीय परिवर्तन को रोका जा सके और स्वदेशी जनजातीय अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

आंदोलन संबंधी प्रमुख चिंताएँ

  • फर्जी जनजातीय प्रमाण-पत्र: बाह्य व्यक्तियों ने अवैध रूप से अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति (APST) प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सरकारी नौकरियों, शिक्षा और भूमि स्वामित्व में आरक्षण का अनुचित लाभ उठाया है।
  • विवादित ILP दिशा-निर्देश: नए नियमों के तहत सचिव (राजनीतिक) को किसी भी व्यक्ति को असीमित अवधि के लिए कार्य परमिट जारी करने की अनुमति दी गई।
  • मेगा-परियोजना में त्रुटियाँ: ₹500 करोड़ से अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं को एक साथ 200 श्रमिकों को अधिकतम दो वर्ष तक प्रायोजित करने की अनुमति है, जिससे स्थानीय जनसांख्यिकी पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
  • ट्रैकिंग की कमी: प्रवर्तन एजेंसियों के पास डिजिटल निगरानी तंत्र का अभाव है, जिससे यह सुनिश्चित नहीं हो पाता कि प्रवासी श्रमिक परमिट समाप्त होने के बाद वापस लौटते हैं या नहीं
  • सामुदायिक चिंताएँ: स्थानीय युवा समूह घरेलू प्रवासी श्रमिकों को विदेशी अवैध प्रवासियों के साथ जोड़कर देख रहे हैं, जिससे धार्मिक संरचनाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं।

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सरकारी प्रतिक्रिया एवं संस्थागत कार्रवाई

बढ़ते प्रदर्शनों और स्वदेशी समूहों की माँगों के बीच, मुख्यमंत्री ने स्थानीय संगठनों के साथ परामर्श किया। इसके बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के नेतृत्व में चार उच्च-स्तरीय समितियों का गठन किया, ताकि प्रणालीगत त्रुटियों की जाँच कर विधिक उपायों की सिफारिश की जा सके।

  • ILP ढाँचे का पुनर्गठन: एक विशेष पैनल इस वर्ष जारी विवादित दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगा, जिसमें कठोर मूल्यांकन मानदंड सुझाए जाएँगे और ‘ओवरस्टे’ करने वाले बाह्य व्यक्तियों की पहचान के लिए डिजिटल ट्रैकिंग उपकरणों की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
  • APST प्रमाण-पत्र का ऑडिट: एक समिति APST दस्तावेजों का व्यापक पुनः सत्यापन अभियान करेगी, ताकि फर्जी प्रमाण-पत्रों की पहचान कर उन्हें निरस्त किया जा सके।
  • मातृवंशीय अधिकारों का मूल्यांकन: एक पैनल APST माताओं और अन्य वर्ग के पिताओं से जन्मे बच्चों की कानूनी एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जिसमें संपत्ति और आरक्षण अधिकार शामिल हैं, का परीक्षण करेगा।
  • घुसपैठ-रोधी रणनीति: एक सीमा-केंद्रित समिति कथित अवैध घुसपैठ के दावों की जाँच करेगी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कमजोरियों का आकलन करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करेगी।

इनर लाइन परमिट’ (ILP) व्यवस्था के बारे मे

इनर लाइन परमिट’ (ILP) एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसे संबंधित राज्य सरकारें जारी करती हैं, ताकि अन्य राज्यों के भारतीय नागरिकों के प्रवेश और निवास को विनियमित किया जा सके।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: इसका उद्भव ब्रिटिश कालीन बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन अधिनियम, 1873 से हुआ, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश व्यापारिक हितों की रक्षा करना था।
  • स्वतंत्रता-उपरांत उद्देश्य: वर्तमान में यह व्यवस्था पूर्वोत्तर की जनजातियों की संस्कृति, परंपराओं और स्वदेशी पहचान को संरक्षित करने तथा उनके जनजातीय भूमि स्वामित्व और संसाधनों की सुरक्षा के लिए बनाए रखी गई है।
  • भौगोलिक विस्तार: ILP व्यवस्था वर्तमान में चार पूर्वोत्तर राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर—में लागू है।

क्षेत्र में सीमा सुरक्षा और संरक्षित क्षेत्र व्यवस्थाओं के प्रमुख प्रावधान 

  • संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP): घरेलू पर्यटकों के लिए जहाँ ILP आवश्यक होता है, वहीं अरुणाचल प्रदेश का पूर्ण राज्य विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 के तहत संरक्षित क्षेत्र व्यवस्था में आता है।
    • प्रत्येक विदेशी नागरिक को राज्य में प्रवेश के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • कड़ी सीमा पृथक्करण व्यवस्था: यद्यपि नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में वर्ष 2010 से वर्ष 2024 के मध्य संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) नियमों में अस्थायी ढील प्रदान की  गई थी, लेकिन अरुणाचल प्रदेश में म्याँमार, भूटान और तिब्बत से लगी संवेदनशील सीमाओं के कारण इन्हें सख्ती से लागू रखा गया।
  • भू-राजनीतिक कारणों से पुनः सख्ती: मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों ने हाल ही में यात्रा सुरक्षा प्रावधानों को पुनः सख्त करने की माँग की है, जिसका कारण पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता से उत्पन्न सुरक्षा चिंताएँ बताई गई हैं।

भारत की समान चुनौतियाँ एवं पूर्व में उठाए गए कदम

भारत ने ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील सामाजिक-जनसांख्यिकीय क्षेत्रों की सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण के मध्य संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक उपायों का उपयोग किया है:

  • असम और NRC: असम लंबे समय से बांग्लादेश से अवैध प्रवासन को लेकर गंभीर जनसांख्यिकीय चिंताओं का सामना करता रहा है। इससे वर्ष 1985 का असम समझौता हुआ और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का अद्यतन किया गया, ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान की जा सके।
  • छठवीं अनुसूची के संरक्षण: मेघालय, मिजोरम और असम जैसे राज्यों में स्वायत्त जिला परिषदों (ADC) को संविधान द्वारा यह शक्ति दी गई है कि वे भूमि हस्तांतरण, स्थानीय व्यापार लाइसेंसिंग और उत्तराधिकार से संबंधित कानून बनाकर गैर-जनजातीय आर्थिक प्रभुत्व को नियंत्रित कर सकें।
  • मणिपुर में ILP का विस्तार (2020): म्याँमार से संभावित अस्थिरता को लेकर व्यापक नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शनों के बाद, केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति आदेश के माध्यम से वर्ष 2020 में मणिपुर में ILP व्यवस्था लागू की, ताकि स्वदेशी जनसंख्या की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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सीमा एवं प्रवासन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ

स्थानीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चिह्नित तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए, भारत ऐसे उन्नत वैश्विक मॉडल अपना सकता है, जो स्वदेशी संरक्षण और आवश्यक विकासात्मक श्रम के बीच संतुलन स्थापित करते हैं:

  • बायोमीट्रिक प्रवेश-निकास ट्रैकिंग (EES एवं US-VISIT मॉडल): यूरोप की प्रवेश/निकास प्रणाली (EES) और अमेरिका का यूएस-विजिट (US-VISIT) मॉडल प्रवेश के समय बायोमीट्रिक डेटा (उँगुलियों के निशान और चेहरे की पहचान) दर्ज करते हैं।
  • यह प्रणाली अनुमत अवधि समाप्त होते ही ओवरस्टे करने वालों की स्वतः पहचान कर लेती है।
    • इसी प्रकार आधार से जुड़ी डिजिटल ILP प्रणाली अपनाने से अरुणाचल प्रदेश में ट्रैकिंग की कमी समाप्त की जा सकती है।
  • प्रायोजन और एस्क्रो बॉण्ड (GCC ढाँचा): खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में श्रमिक ले जाने वाली कंपनियों को वित्तीय गारंटी जमा करनी होती है।
    • अरुणाचल प्रदेश की मेगा परियोजनाओं में ठेकेदारों को कानूनी एवं वित्तीय रूप से उत्तरदायी बनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कार्य परमिट समाप्त होने पर श्रमिक राज्य छोड़ दें।
  • जनजातीय भूमि एवं अभिलेख प्रबंधन (न्यूजीलैंड मॉडल): न्यूजीलैंड की माओरी भूमि न्यायालय प्रणाली जनजातीय भूमि अभिलेखों का प्रबंधन कठोर पारंपरिक नियमों के तहत करती है, जिससे भूमि बाहरी व्यक्तियों को हस्तांतरित नहीं हो सकती।
    • इसी प्रकार APST संबंधी डाटाबेस का डिजिटलीकरण और उसे विशेष जनजातीय भूमि बोर्ड के माध्यम से संचालित करना फर्जी जनजातीय प्रमाण-पत्रों संबंधी त्रुटि को पूर्णतः समाप्त कर सकता है।

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