आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 में परिवर्तन

4 Jun 2026

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 में संशोधन अधिसूचित किए हैं, जिससे विदेशी नागरिकों के लिए वीजा पंजीकरण समय-सीमा को कठोर किया गया है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके और सीमा प्रबंधन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जा सके।

आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 में प्रमुख परिवर्तन 

  • कठोर पंजीकरण समय-सीमा: 180 दिन या उससे कम अवधि के वीजा पर रहने वाले विदेशियों को, यदि वे अपना प्रवास बढ़ाना चाहते हैं, तो अब वीजा समाप्त होने से पूर्व किसी भी समय पंजीकरण कराना होगा।
    • पहले उपलब्ध समाप्ति के पश्चात् 14 दिन की छूट अवधि को हटा दिया गया है।

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  • आपातकालीन प्रतिबंध: दीर्घकालिक वीजा के लिए जिनमें प्रति यात्रा 180 दिन की सीमा” का प्रावधान है, प्रवास विस्तार के लिए 180 दिन पूरे होने से पूर्व पंजीकरण आवश्यक होगा।
    • अब यह विस्तार केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही प्रदान किया जाएगा।
  • मिश्रित नागरिकता वाले बच्चों के लिए छूट: यदि माता-पिता में से एक भारतीय नागरिक है, और बच्चे की भारतीय नागरिकता बनाए रखना चाहता है, तो अब जन्म के 30 दिनों के भीतर सूचना देना आवश्यक नहीं होगा।
  • विदेशी नागरिकता की घोषणा: यदि भारत में जन्मा बच्चा बाद में विदेशी नागरिकता ग्रहण करता है, तो माता-पिता को 30 दिनों के भीतर पंजीकरण अधिकारी को सूचित करना होगा।
  • चिकित्सीय अनुपालन: सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स, जो विदेशी नागरिकों को आवास या चिकित्सा सुविधा प्रदान करते हैं, उनके लिए संशोधित रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ लागू की गई हैं।

आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 के बारे में

  • प्रमुख विधिक ढाँचा: आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निवास और निकास को नियंत्रित करने वाला मुख्य विधिक ढाँचा है।
  • प्रशासनिक प्राधिकरण: इन नियमों का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है और ये हाल ही में पारित आप्रवासन एवं विदेशी अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों को लागू करते हैं।
  • मुख्य उद्देश्य: इस ढाँचे का उद्देश्य पर्यटन और यात्रा की सुगमता को बनाए रखते हुए मजबूत आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • डिजिटल निगरानी एवं अनुपालन: ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से निगरानी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करके यह वीजा अनुपालन की निगरानी, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण का विनियमन तथा अवैध निवास या ‘ओवर स्टे’ को नियंत्रित करता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका: ये नियम उन व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रशासनिक शक्ति प्रदान करते हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।

आप्रवासन (Immigration) के बारे में

  • परिभाषा: आप्रवासन का अर्थ है व्यक्तियों का अपने मूल देश से किसी अन्य देश में जाना, जहाँ वे न तो मूल निवासी होते हैं और न ही नागरिक होते हैं।
    • यह स्थानांतरण स्थायी निवास, नागरिकता प्राप्ति, रोजगार या अस्थायी कार्य के लिए हो सकता है।
  • प्रवासी और प्रव्रजक: जो लोग किसी अन्य देश में जाते हैं उन्हें आप्रवासी (Immigrants) कहा जाता है, जबकि उनके मूल देश के दृष्टिकोण से उन्हें प्रव्रजक (Emigrants) या बहिर्गामी प्रवासी (Outmigrants) कहा जाता है।

आप्रवासन के कारण

  • आर्थिक कारक: लोग बेहतर रोजगार, वेतन और जीवन स्तर के लिए प्रवास करते हैं। अवसरों की कमी और गरीबी कई लोगों को विदेश में काम खोजने के लिए प्रेरित करती है।
    • उदाहरण: कई भारतीय उच्च वेतन वाली नौकरियों के लिए खाड़ी देशों में प्रवास करते हैं।
  • राजनीतिक अस्थिरता एवं संघर्ष: युद्ध, उत्पीड़न और दमनकारी शासन लोगों को पलायन के लिए मजबूर करते हैं। जातीय, धार्मिक और राजनीतिक भेदभाव भी प्रवास को बढ़ावा देता है।
    • उदाहरण: रोहिंग्या मुस्लिम उत्पीड़न से बचने के लिए म्याँमार से बांग्लादेश की और स्थानांतरित हुए।
  • पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन: प्राकृतिक आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन आजीविका को नष्ट कर देते हैं। समुद्र-स्तर में वृद्धि, सूखा और संसाधनों की कमी इन क्षेत्रों को रहने योग्य नहीं रहने देते।
    • उदाहरण: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले का सतभाया गाँव तटीय अपरदन और समुद्र-स्तर वृद्धि के कारण प्रभावित हुआ, जिससे लोगों को अपने घर और खेती का त्याग कर प्रवास करना पड़ा।
  • वैश्वीकरण एवं संपर्क: बेहतर परिवहन और संचार ने प्रवास को आसान बना दिया है। वैश्विक रोजगार बाजार के विस्तार से कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिक आकर्षित होते हैं।
    • उदाहरण: भारत के आईटी पेशेवर सिलिकॉन वैली में प्रवास करते हैं।

आप्रवासन का प्रभाव

  • आर्थिक वृद्धि: यह श्रम आपूर्ति बढ़ाता है, कौशल अंतराल को समाप्त करता है और उद्यमिता को बढ़ावा देता है।
    • उदाहरण: भारतीय आईटी पेशेवर अमेरिका के तकनीकी क्षेत्र में योगदान देते हैं।
  • बुनियादी ढाँचे पर दबाव: इससे मेजबान देश में आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ता है।
    • उदाहरण: यूरोप के शहरों में शरणार्थियों के आगमन से तेज शहरीकरण हुआ।
  • रेमिटेंस और मूल देश का विकास: प्रवासी अपने देश में धन प्रेषित करते हैं, जिससे जीवन स्तर और निवेश में सुधार होता है।
    • उदाहरण: भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता है, जहाँ खाड़ी देशों और अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रत्येक वर्ष अरबों डॉलर भेजते हैं।
  • सुरक्षा एवं सामाजिक चुनौतियाँ: इससे अपराध, समायोजन और राष्ट्रीय पहचान को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
    • उदाहरण: अमेरिका और यूरोप में सीमा सुरक्षा पर बहस।

भारत में आप्रवासन से संबंधित प्रावधान

  • नागरिकता अधिनियम, 1955: यह भारतीय नागरिकता के अर्जन, त्याग और समाप्ति को नियंत्रित करता है।
    • यह भारतीय नागरिक बनने के पाँच तरीके निर्धारित करता है: जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और क्षेत्र समावेशन।
  • विदेशी अधिनियम, 1946
    • प्रवेश, निवास और निकास पर नियंत्रण: यह भारत में विदेशियों के प्रवेश, निवास और निकास को विनियमित करता है।
    • पहचान और निष्कासन की शक्तियाँ: यह सरकार को अवैध प्रवासियों की पहचान, निरोध और निर्वासन की शक्ति प्रदान करता है।
    • अधिकरणों की स्थापना: यह अधिनियम सरकार को नागरिक न्यायालय जैसी शक्तियों वाले अधिकरण स्थापित करने की अनुमति देता है, जो विदेशी की स्थिति निर्धारित करते हैं।
    • वर्ष 2019 का संशोधन: विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जिला मजिस्ट्रेटों को अवैध विदेशियों की पहचान हेतु अधिकरण स्थापित करने की अनुमति दी गई।
  • वीजा विनियम (पासपोर्ट अधिनियम, 1920 के तहत)
    • यह वीजा श्रेणियों के माध्यम से विदेशी नागरिकों के प्रवेश की शर्तों को परिभाषित करता है।
    • यह वीजा विस्तार, प्रतिबंध और उल्लंघनों को विनियमित करता है।
  • शरणार्थी नीतियाँ
    • भारत वर्ष 1951 के शरणार्थी अभिसमय का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
    • यह मामला-दर-मामला आधार पर शरण प्रदान करता है (जैसे- तिब्बती, श्रीलंकाई तमिल, रोहिंग्या)।

आप्रवासन एवं विदेशी नियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान

  • अनिवार्य पंजीकरण (FRRO ढाँचा): विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को नोडल प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया है।
    • यह अनिवार्य करता है कि निर्धारित अवधि से अधिक ठहरने वाले विदेशी नागरिक अपनी उपस्थिति को वैध करने के लिए डिजिटल पंजीकरण करें।
  • वीजा वर्गीकरण एवं अनुपालन: यह पर्यटक, व्यापार, रोजगार, चिकित्सा और छात्र वीजा सहित विभिन्न वीजा श्रेणियों के मानदंड, कार्य-क्षेत्र और अवधि को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है तथा अनुपालन न करने पर कठोर दंड निर्धारित करता है।
  • सेवाओं का डिजिटलीकरण (M-Visa एवं पोर्टल): सभी आप्रवासन प्रक्रियाओं को एक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन में एकीकृत किया गया है, जिससे वीजा विस्तार, निकास अनुमति और पता अद्यतन के लिए पेपरलेस प्रक्रिया संभव होती है।
  • निर्वासन एवं कठोर प्रवर्तन: यह नागरिक प्राधिकरणों को उन विदेशी नागरिकों की पहचान और कड़ी कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जो वीजा अवधि से अधिक ठहरते हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रतिकूल गतिविधियों में संलग्न होते हैं।
  • संस्थागत रिपोर्टिंग तंत्र: यह होटल, मकान मालिक (Form C के माध्यम से) और चिकित्सा संस्थानों जैसे तृतीय-पक्ष हितधारकों को यह अनिवार्य करता है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर विदेशी नागरिकों के ठहराव की सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप से दें।

PWOnlyIAS विशेष

आप्रवासन में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका

  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR): यह संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी है, जो संघर्ष और उत्पीड़न के कारण विस्थापित लोगों के लिए कार्य करती है।
    • यह शरणार्थियों, आश्रय-प्रार्थियों और राज्यविहीन व्यक्तियों की सुरक्षा और सहायता करती है।
    • यह आपातकालीन सहायता, कानूनी समर्थन और पुनर्वास सहायता प्रदान करती है।
    • उदाहरण: सीरियाई शरणार्थियों के लिए तुर्की, लेबनान और जॉर्डन में राहत कार्य।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM)
    • यह प्रवासन नीतियों का प्रबंधन, सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन सुनिश्चित करता है तथा मानव तस्करी से मुकाबला करता है।
    • यह स्वैच्छिक वापसी, पुनर्वास और एकीकरण कार्यक्रमों में सहायता करता है।
      • उदाहरण: रोहिंग्या शरणार्थियों के पुनर्वास और बांग्लादेश में मानवीय सहायता।

आप्रवासन कानूनों में वैश्विक प्रथाएँ

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: आप्रवासन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम (INA) के तहत, आप्रवासी वह व्यक्ति होता है, जो कानूनी रूप से स्थायी निवासी बनने का प्रयास करता है।
    • यह निर्वासन आदेशों के न्यायिक पुनरावलोकन की अनुमति देता है।
  • यूरोपीय संघ: विदेशी नागरिकों को स्वतंत्र प्राधिकरण के समक्ष निर्वासन निर्णय के विरुद्ध अपील करने का अधिकार प्राप्त है।
    • EU ब्लू कार्ड उच्च कौशल वाले गैर-ईयू नागरिकों को सदस्य देशों में काम और निवास की अनुमति देता है।
  • ऑस्ट्रेलिया: आप्रवासन नीति में मानवीय अपवाद और विधिक प्रक्रिया की गारंटी शामिल है।
    • वर्ष 2025 के परिवर्तन आर्थिक आवश्यकताओं और प्रवासन में निष्पक्षता के मध्य संतुलन स्थापित करने का प्रयास करते हैं।

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