संदर्भ
संयुक्त राज्य अमेरिका ने बलात् श्रम (Forced Labour) के उपयोग से निर्मित वस्तुओं को लेकर चिंता जताते हुए भारत (और 16 अन्य देशों) से आयातित वस्तुओं पर 10% टैरिफ आरोपित किया है।
- यह टैरिफ व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के अंतर्गत घोषित किए गए हैं।

पृष्ठभूमि
- ट्रंप प्रशासन के पारस्परिक टैरिफ को अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद लागू अस्थायी 10% सार्वभौमिक टैरिफ के स्थान पर यह नया उपाय लागू किया गया है।
- अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के विरुद्ध एकतरफा व्यापारिक कार्रवाई करने की अनुमति देती है, जो अनुचित, अव्यावहारिक या भेदभावपूर्ण व्यापारिक प्रथाओं में संलग्न होते हैं।
टैरिफ संरचना
| टैरिफ दर |
देश |
आधार |
| 10% |
भारत, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, बांग्लादेश, पाकिस्तान तथा 12 अन्य देश (कुल 17) |
इन देशों में बलात् श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून तो हैं, किंतु उनका प्रवर्तन अपर्याप्त माना गया है (या उन्होंने प्रवर्तन में सुधार का आश्वासन दिया है)। |
| 12.5% |
चीन, जापान तथा 42 अन्य देश (कुल 43) |
इन देशों में बलात् श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों का अभाव माना गया है। |
टैरिफ से छूट
- कच्चे माल, जिन पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू स्तर पर कमी उत्पन्न हो सकती है।
- ऐसे उत्पाद, जिनसे अर्थव्यवस्था-व्यापी आपूर्ति व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना हो।
- वे वस्तुएँ, जिनका पर्याप्त मात्रा में उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में नहीं किया जा सकता है।
- तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, ईंधन एवं चयनित खाद्य उत्पाद।
- ऑटोमोबाइल, धातु एवं औषधियाँ पहले से ही अलग-अलग क्षेत्र-विशिष्ट टैरिफों के अंतर्गत आते हैं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के अंतर्गत टैरिफ-मुक्त व्यवहार के लिए पात्र वस्तुएँ।
बलात् श्रम (Forced Labour) के बारे में
- परिभाषा: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के बलात् श्रम अभिसमय, 1930 (अभिसमय संख्या 29) के अनुसार, बलात् श्रम का अर्थ है “ऐसा प्रत्येक कार्य या सेवा, जिसे किसी व्यक्ति से किसी दंड के खतरे के अंतर्गत कराया जाता है तथा जिसके लिए उस व्यक्ति ने स्वेच्छा से स्वयं को प्रस्तुत नहीं किया है।”
- वैश्विक अनुमान: ILO के अनुसार, वर्ष 2021 में विश्वभर में लगभग 2.76 करोड़ लोग बलात् श्रम की श्रेणी में आते हैं।
- बलात् श्रम के रूप: इसमें ऋण बंधन (Debt Bondage), मानव तस्करी, अनिवार्य श्रम, राज्य द्वारा आरोपित बलात् श्रम तथा अनैच्छिक कार्यों के अन्य रूप शामिल हैं।
|
भारत की स्थिति:
भारत एक मजबूत संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचे के माध्यम से बलात् श्रम पर प्रतिबंध लगाता है, जिसका प्रमुख आधार संविधान का अनुच्छेद-23 (शोषण के विरुद्ध अधिकार) तथा बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 है।
- नीतिगत प्रतिक्रिया: भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति (FTP) में संशोधन कर बलात् श्रम के माध्यम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे घरेलू नियामक ढाँचा मजबूत हुआ है।
- कूटनीतिक रुख: भारत ने अमेरिकी जाँचों को चुनौती दी है और तर्क दिया है कि ऐसे मुद्दों का समाधान प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ढाँचे के अंतर्गत किया जाना चाहिए।
- टैरिफ श्रेणी में परिवर्तन: विदेश व्यापार नीति में संशोधन के बाद भारत पर प्रस्तावित टैरिफ को 12.5% से घटाकर 10% कर दिया गया, क्योंकि अमेरिका ने भारत में बलात् श्रम पर कानूनी प्रतिबंध को स्वीकार किया, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंता व्यक्त की।
- छूट प्राप्त वस्तुएँ: भारत ने रणनीतिक और आवश्यक मानी जाने वाली 1,600 वस्तुओं को प्रतिकारात्मक उपायों से छूट दी है तथा अमेरिकी रुख को असंगत करार दिया है।
भारत पर प्रभाव
- निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता: यह टैरिफ अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातों की मूल्य प्रतिस्पर्द्धात्मकता को कम कर सकता है, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में।
- व्यापार वार्ता: यह मुद्दा चल रही भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) वार्ताओं में एक महत्त्वपूर्ण विषय बन सकता है।
- आपूर्ति शृंखला अनुपालन: भारतीय निर्यातकों को श्रम मानकों, आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता एवं वस्तुओं की खोज-क्षमता (Traceability) के संबंध में अधिक जाँच-पड़ताल का सामना करना पड़ सकता है।
- नीतिगत सुधार: यह उपाय श्रम प्रशासन, तथा कॉरपोरेट उचित परिश्रम (Corporate Due Diligence) से संबंधित सुधारों को गति दे सकता है।
- वैश्विक व्यापार प्रवृत्तियाँ: यह कार्रवाई दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में श्रम, पर्यावरण एवं स्थायित्व मानकों का उपयोग बढ़ते हुए उपकरणों के रूप में किया जा रहा है।