संदर्भ
हाल ही में दूरसंचार विभाग ने डिजिटल संप्रभुता एवं दूरसंचार सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचार अवसंरचना प्रदाताओं के लिए कड़े डेटा लोकलाइजेशन (Data Localisation) को अनिवार्य किया है।
डेटा लोकलाइजेशन के बारे में
- डेटा लोकलाइजेशन एक कानूनी आवश्यकता है, जिसके अंतर्गत डिजिटल डेटा, विशेष रूप से व्यक्तिगत, वित्तीय या संवेदनशील जानकारी को उसी देश की सीमाओं के भीतर एकत्रित, संसाधित एवं संगृहीत करना आवश्यक होता है, जहाँ से वह उत्पन्न हुआ है।
- यह ऐसे डेटा को राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर स्थानांतरित करने को प्रतिबंधित करता है।
- अनिवार्य डेटा लोकलाइजेशन: नए अधिकृत संस्थाओं को सभी दूरसंचार नेटवर्क प्रणालियों, डेटा, लॉग एवं संबंधित सूचनाओं को भारत में ही संगृहीत करना अनिवार्य होगा। इनकी कोई भी प्रति विदेश में भेजी, साझा या उपलब्ध नहीं कराई जा सकेगी।
- दायरे में आई संस्थाएँ: यह ढाँचा क्लाउड-आधारित दूरसंचार नेटवर्क प्रदाताओं, मोबाइल टॉवर संचालकों, सेटेलाइट अर्थ-स्टेशन गेटवे, डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना प्रदाताओं, इंटरनेट एक्सचेंज प्वाइंट प्रदाताओं तथा राष्ट्रीय मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) प्रदाताओं पर लागू होगा।
- सरकार की निरीक्षण शक्तियाँ: केंद्र सरकार को दूरसंचार उपकरणों एवं नेटवर्क स्थलों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा, जिसमें उपयोगकर्ता परिसरों के भीतर स्थित उपकरण भी शामिल हैं। सार्वजनिक हित में तत्काल कार्रवाई आवश्यक होने की स्थिति में सरकार बिना किसी पूर्व सूचना के ऑडिट भी कर सकती है।
कानूनी आधार
- दूरसंचार अधिनियम, 2023: यह ढाँचा दूरसंचार अधिनियम, 2023 से कानूनी आधार प्राप्त करता है, जिसने पूर्व लाइसेंस आधारित व्यवस्था को प्राधिकरण (Authorisation) आधारित विनियामक प्रणाली से प्रतिस्थापित किया है।
- प्राधिकरण ढाँचा: यह नया ढाँचा शिथिल विनियमन (Light-touch Regulation) एवं बाजार में आसान प्रवेश को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जबकि डेटा सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हित से संबंधित कठोर दायित्वों को लागू करता है।
- राइट ऑफ वे (RoW) अनुपालन: अधिकृत संस्थाएँ नेटवर्क विस्तार के लिए आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी रहेंगी। राइट ऑफ वे (RoW) अनुमतियों में देरी को अनुपालन न करने का आधार नहीं बनाया जा सकेगा।
- राइट ऑफ वे (RoW): दूरसंचार अवसंरचना स्थापित करने और उसके रखरखाव के लिए सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों के उपयोग की कानूनी अनुमति, जो दूरसंचार अधिनियम और RoW नियमों के अंतर्गत दी जाती है।
- अनुपालन ऑडिट: केंद्र सरकार अधिकृत संस्थाओं की प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों का विनियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक नामित एजेंसी को ऑडिट हेतु नियुक्त कर सकती है।
- स्पेक्ट्रम संबंधी मुद्दा: यह ढाँचा स्वयं अधिकृत संस्थाओं को स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं देता है। सेटेलाइट संचार के लिए गेटवे स्पेक्ट्रम का आवंटन निजी संचालकों के लिए एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।