संदर्भ
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी, महत्त्वपूर्ण खनिजों के सहयोग और जून 2026 में भारत-वेनेजुएला रणनीतिक जुड़ाव के विस्तार पर चर्चा की।
भारत-वेनेजुएला बैठकों की मुख्य बिंदु
- दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी पर चर्चा: दोनों पक्षों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और वेनेजुएला के स्थिर निर्यात को सुनिश्चित करने के लिए स्रोत से खरीद संबंधी दीर्घकालिक कच्चे तेल आपूर्ति अनुबंधों की ओर बढ़ने की संभावना तलाशी है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में सहयोग: नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का समर्थन करने के लिए अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखला विविधीकरण सहित महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
- तेल क्षेत्र में निवेश का विस्तार: वेनेजुएला द्वारा किए जा रहे प्रमुख ऊर्जा क्षेत्र सुधारों के मद्देनजर, चर्चा वेनेजुएला के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम तेल क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों की अधिक भागीदारी पर केंद्रित रही।
- फर्मास्यूटिकल सहयोग को मजबूत करना: मार्च 2026 में भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने वाले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद सस्ती भारतीय जेनेरिक दवाओं तक पहुँच का विस्तार करना।
- तकनीकी प्रतिनिधिमंडल और व्यावसायिक सहभागिता: भारत ऊर्जा, खनन, परिवहन, कृषि और औद्योगिक सहयोग में अवसरों की पहचान करने के लिए वेनेजुएला में एक तकनीकी दल भेजेगा।
भारत-वेनेजुएला संबंधों के बारे में
- ऐतिहासिक और राजनयिक साझेदारी: भारत और वेनेजुएला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर समान दृष्टिकोण के आधार पर सौहार्दपूर्ण संबंध साझा करते हैं।
- दोनों देशों ने वर्ष 2025 में राजनयिक संबंधों के 66 वर्ष पूर्ण किए और नई दिल्ली और काराकास में चार दशकों से अधिक समय से स्थायी दूतावास मौजूद हैं।
- राजनीतिक और बहुपक्षीय सहयोग: दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन, वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट (Voice of Global South Summit- VOGSS) जैसे बहुपक्षीय मंचों और ब्रिक्स विस्तार से संबंधित चर्चाओं में घनिष्ठ सहयोग करते हैं।
- हाल के वर्षों में, विशेष रूप से कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में, उच्च स्तरीय आदान-प्रदान में तेजी आई है।
- ऊर्जा और वाटरकार्बन सहयोग: ऊर्जा द्विपक्षीय संबंधों का आधारशिला बनी हुई है।
- वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार (~303 अरब बैरल) है, जबकि भारत सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है जो अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का 85% से अधिक आयात करता है।
- सहयोग में कच्चे तेल का व्यापार, रिफाइनरी साझेदारी और ONGC विदेश के माध्यम से अपस्ट्रीम निवेश शामिल हैं।
- आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध: वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 679 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- भारत के प्रमुख निर्यातों में फार्मास्यूटिकल, कपास, मशीनरी और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं, जबकि आयात में मुख्य रूप से कच्चा तेल, खनिज ईंधन, एल्युमीनियम और लौह उत्पाद शामिल हैं।
- सांस्कृतिक एवं विकास सहयोग: भारत, भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (Indian Technical and Economic Cooperation Programme- ITEC), अटल बिहारी वाजपेयी छात्रवृत्ति योजना और भारत-UNDP विकास साझेदारी कोष के माध्यम से वेनेजुएला में आयुर्वेद, योग, छात्रवृत्ति और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।
महत्त्व
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना: यह दौरा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के मध्य कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने और पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की भारत की रणनीति का समर्थन करता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच सुनिश्चित करना: महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग रणनीतिक खनिज सुरक्षा पहलों के तहत भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्त्वाकांक्षाओं, इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र और विनिर्माण क्षमता को मजबूत करता है।
- ग्लोबल साउथ में भारत की पहुँच को सुदृढ़ करना: यह यात्रा ग्लोबल साउथ देशों के मध्य भारत के नेतृत्व को मजबूत करती है और व्यापार, विकास और बहुपक्षीय शासन पर लैटिन अमेरिकी देशों के साथ साझेदारी को सुदृढ़ करती है।
- भारतीय व्यवसायों के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार: वेनेजुएला में चल रहे आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र के सुधार हाइड्रोकार्बन, फार्मास्यूटिकल्स, खनन, कृषि और अवसंरचना विकास में भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर उत्पन्न करते हैं।
निष्कर्ष
हालिया मुलाकात भारत-वेनेजुएला संबंधों में एक नए चरण का प्रतीक है, जो ऊर्जा सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिजों के सहयोग, आर्थिक विविधीकरण और ग्लोबल साउथ की एकजुटता से प्रेरित है।