क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (Global Supply Chain Observatory- GSCO)
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भारत और ब्रिटेन ने लचीली, पारदर्शी और सुरक्षित महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (Global Supply Chain Observatory- GSCO) की शुरुआत की।
क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO) के बारे में
- क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO) एक विशेषीकृत भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय मंच है, जिसे उन्नत डेटा विश्लेषण और प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से वैश्विक महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं की निगरानी, विश्लेषण और सुदृढ़ीकरण के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- संचालन: टेक्नोलॉजी इनोवेशन इन एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग फाउंडेशन (Technology Innovation in Exploration & Mining Foundation- TEXMiN), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (ISM) धनबाद और कैंब्रिज विश्वविद्यालय, ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित।
- उद्देश्य
- स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक उद्योगों के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों तक सुरक्षित तथा विश्वसनीय पहुँच सुनिश्चित करना।
- आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक जोखिम और बाजार संकेंद्रण से उत्पन्न होने वाली कमजोरियों को कम करना।
- GSCO की मुख्य विशेषताएँ
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- वास्तविक समय आपूर्ति शृंखला निगरानी: यह प्लेटफॉर्म खनन और प्रसंस्करण से लेकर औद्योगिक उपयोग और अंतिम उपयोग क्षेत्रों तक, मूल्य शृंखला में महत्त्वपूर्ण खनिजों की निरंतर निगरानी करता है।
- जोखिम पहचान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: उन्नत पूर्वानुमान उपकरण निर्यात प्रतिबंध, लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाएँ, आपूर्ति की कमी और भू-राजनीतिक झटके जैसी संभावित रुकावटों की पहचान करते हैं।
- बाजार खुफिया और डेटा विश्लेषण: GSCO सूचित निर्णय लेने में सहायता के लिए खनिज कीमतों, भंडार, माँग के रुझान और वैश्विक उत्पादन पैटर्न पर साक्ष्य-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
- अनुसंधान और प्रौद्योगिकी सहयोग: यह वेधशाला भारतीय और ब्रिटिश शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के बीच सीमा पार अनुसंधान, डेटा साझाकरण तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देती है।
- महत्त्व
- महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना: GSCO लीथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति शृंखला के लचीलेपन को बढ़ाता है, जो भारत के ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
- भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना: यह पहल भारत के राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission- NCMM) और भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल के तहत सहयोग को बढ़ावा देती है, जिससे निवेश, नवाचार और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा मिलता है।
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इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (Islamic State West Africa Province- ISWAP)
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नाइजीरिया और अमेरिका के संयुक्त अभियान में इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (Islamic State West Africa Province- ISWAP) के एक वरिष्ठ कमांडर को मार दिया गया है, जो लेक चाड बेसिन में ISWAP द्वारा उत्पन्न बढ़ते खतरे को उजागर करता है।
इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) के बारे में
- उत्पत्ति: वर्ष 2016 में जिहादी समूह बोको हराम में फूट पड़ने के बाद ISWAP का उदय हुआ और इसने इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा की शपथ ली।
- संचालन क्षेत्र: यह चाड झील बेसिन में सक्रिय है, जिसमें नाइजीरिया, नाइजर, चाड और कैमरून के कुछ हिस्से शामिल हैं।
- उद्देश्य: इस्लामी कानून (शरिया) की अपनी व्याख्या के आधार पर शासन स्थापित करना और राज्य के अधिकार को चुनौती देना इसका उद्देश्य है।
- संगठनात्मक संरचना: यह शूरा (परामर्श परिषद) और क्षेत्रीय कमांडरों के माध्यम से संचालित होता है, जो इसे बोको हराम की तुलना में अधिक संगठित बनाता है।
- वित्तपोषण स्रोत: यह कराधान, जबरन वसूली, मत्स्यन, कृषि गतिविधियों और स्थानीय व्यापार मार्गों पर नियंत्रण के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करता है।
- वर्तमान स्थिति: बोको हराम नेता अबू बकर शेकाऊ (2021) की मृत्यु के बाद, ISWAP चाड झील क्षेत्र में प्रमुख जिहादी समूह के रूप में उभरा।
- प्रमुख क्यों बना: इसने अपहरण और लूटपाट पर मुख्य रूप से निर्भर रहने के बजाय स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर कराधान के माध्यम से एक मजबूत कमान संरचना, क्षेत्रीय नियंत्रण और राजस्व प्रणाली विकसित की।
- बहुराष्ट्रीय संयुक्त कार्य बल (Multinational Joint Task Force-MNJTF): नाइजीरिया, नाइजर, चाड, कैमरून और बेनिन से मिलकर बना क्षेत्रीय सुरक्षा बल, जिसका गठन चाड झील बेसिन में बोको हराम और ISWAP से निपटने के लिए किया गया है।
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ATF मूल्य स्थिरीकरण समर्थन तंत्र
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में होने वाली वृद्धि से एयरलाइंस को बचाने के लिए ₹10,000 करोड़ के ATF मूल्य स्थिरीकरण सहायता तंत्र को मंजूरी दी।
ATF मूल्य स्थिरीकरण सहायता तंत्र के बारे में
- कार्यप्रणाली: सरकार भाग लेने वाली भारतीय एयरलाइनों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों हेतु एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को स्थिर रखेगी।
- तेल विपणन कंपनियाँ (Oil Marketing Companies-OMC) अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता की परवाह किए बिना ATF को एक निश्चित कीमत पर बेचेंगी।
- योजना में शामिल होने वाली एयरलाइनों को ATF की खरीद केवल OMC से ही करनी होगी।
- कवरेज: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के लिए निर्धारित भारतीय एयरलाइनों पर लागू।
- उद्देश्य: ATF की लागत में स्थिरता और पूर्वानुमान सुनिश्चित करना, हवाई सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना और हवाई किरायों में अचानक वृद्धि को रोकना।
- वित्तीय सहायता: तेल विपणन कंपनियों (OMC) को ₹10,000 करोड़ की ब्याज-मुक्त बजटीय सहायता।
- मूल्य स्थिरीकरण कोष: यदि अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतें निर्धारित कीमत से ऊपर बढ़ती हैं, तो OMC को मूल्य स्थिरीकरण कोष के माध्यम से मुआवजा दिया जाएगा।
- अवधि: यह व्यवस्था 3 वर्षों तक या अग्रिम राशि की पूरी वसूली होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगी।
- आवश्यकता: ATF एयरलाइन के परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, जो ईंधन की कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता के समय 60% तक बढ़ सकता है।
एविएशन टरबाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel- ATF) के बारे में
- एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) एक उच्च गुणवत्ता वाला केरोसिन-आधारित ईंधन है, जिसका उपयोग जेट विमानों और टरबाइन-चालित हवाई जहाजों में किया जाता है।
- यह विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण घटक है और आमतौर पर एयरलाइन परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है।
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ब्लू माइक्रोमून (Blue Micromoon
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हाल ही में रात के आकाश में ‘ब्लू माइक्रोमून’ (Blue Micromoon) नामक एक दुर्लभ खगोलीय घटना दिखाई दी।
‘ब्लू माइक्रोमून’ (Blue Micromoon) के बारे में
- परिभाषा: ब्लू माइक्रोमून तब होता है, जब ब्लू मून और माइक्रोमून एक साथ दिखाई देते हैं।
- वर्ष 2026 की घटना: 31 मई, 2026 को देखा गया ब्लू माइक्रोमून इस वर्ष का सबसे छोटा और सबसे धुँधला चंद्रमा (पूर्णिमा का) था।
- दुर्लभता: ब्लू मून और माइक्रोमून अलग-अलग तो नियमित रूप से दिखाई देते हैं, लेकिन इनका एक साथ होना असामान्य है।
- अगला ब्लू माइक्रोमून वर्ष 2053 में दिखाई देने की आशा है।
ब्लू मून (Blue Moon) और माइक्रोमून (Micromoon) के बारे में
- ब्लू मून: ब्लू मून एक कैलेंडर माह में पड़ने वाला दूसरा पूर्णिमा का चंद्रमा होता है, जो चंद्रमा के 29.5 दिनों के सिनोडिक चक्र के कारण लगभग प्रत्येक 2-3 वर्ष में एक बार होता है।
- इसके नाम के बावजूद, चंद्रमा आमतौर पर नीला दिखाई नहीं देता है।
- माइक्रोमून: चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक अंडाकार कक्षा में घूमता है।
- अपोजी (Apogee): पृथ्वी से सबसे दूरस्थ बिंदु (लगभग 4,03,945 किमी.)।
- पेरिजी (Perigee): पृथ्वी से सबसे निकटतम बिंदु (लगभग 3,63,711 किमी.)।
- माइक्रोमून तब होता है, जब पूर्णिमा का चंद्रमा अपोजी के साथ या उसके निकट पड़ता है, जिससे यह सामान्य से थोड़ा छोटा और धुँधला दिखाई देता है।
- माइक्रोमून का कारण: चंद्रमा की अंडाकार कक्षा के कारण, अपोजी (पृथ्वी से सबसे दूरस्थ बिंदु) के निकट पड़ने वाला पूर्णिमा का चंद्रमा सामान्य से छोटा और धुंधला दिखाई देता है। इसके विपरीत, पेरिजी के निकट पड़ने वाला पूर्णिमा का चंद्रमा बड़ा तथा चमकीला दिखाई देता है एवं इसे सुपरमून कहा जाता है।
- संबंधित घटना: पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु (पेरिजी) के निकट दिखाई देने वाली पूर्णिमा को सुपरमून के रूप में जाना जाता है, जो औसत से बड़ा और चमकीला दिखाई देता है।
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फूड प्लैनेट प्राइज 2026
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‘आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि’ (Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming- APCNF) कार्यक्रम ने ‘फूड प्लैनेट प्राइज 2026’ जीता है।
- वैश्विक मान्यता: फूड प्लैनेट प्राइज प्राप्त करने वाली यह पहली भारतीय पहल बन गई है।
आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि (APCNF) के बारे में
- आरंभ: आंध्र प्रदेश कृषि विभाग के अंतर्गत रायथु साधिका संस्था द्वारा वर्ष 2016 में शुरू किया गया।
- उद्देश्य: प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, जिससे कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो और कृषि की स्थिरता में सुधार हो।
- सामुदायिक नेतृत्व मॉडल: किसानों, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, किसान वैज्ञानिकों और महिला स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क के माध्यम से संचालित।
- संचालन का दायरा: आंध्र प्रदेश भर में लगभग 18 लाख किसान परिवारों और 3,40,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को कवर करता है।
- ज्ञान साझाकरण: 10,000 से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों द्वारा समर्थित, जो किसानों के बीच ज्ञानवर्द्धन और क्षमता निर्माण को सुगम बनाते हैं।
APCNF की मुख्य विशेषताएँ
- रासायनिक मुक्त कृषि: कृत्रिम कृषि रसायनों के बजाय स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
- मृदा स्वास्थ्य में सुधार: मृदा की उर्वरता, सूक्ष्मजीव गतिविधियों और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता को बढ़ाती है।
- जलवायु अनुकूलन क्षमता: किसानों को सूखे, अनियमित वर्षा और अन्य जलवायु संबंधी समस्याओं का सामना करने की क्षमता प्रदान करती है।
- जैव विविधता संरक्षण: विविध और प्रकृति-आधारित कृषि प्रणालियों के माध्यम से पारिस्थितिकी संतुलन को बढ़ावा देती है।
- लागत में कमी: बाहरी कृषि संसाधनों पर होने वाले खर्च को कम करती है, जिससे किसानों की शुद्ध आय में सुधार होता है।
फूड प्लैनेट प्राइज के बारे में
- स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 2019 में स्वीडिश उद्यमी और परोपकारी कर्ट बर्गफोर्स द्वारा की गई थी।
- उद्देश्य: वैश्विक खाद्य प्रणालियों को स्थायी रूप से बदलने में सक्षम पहलों की पहचान करना और उनका समर्थन करना।
- पुरस्कार राशि: 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की धनराशि से सम्मानित, यह खाद्य प्रणालियों पर केंद्रित दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरण पुरस्कारों में से एक है।
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