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भारत–नॉर्वे संबंध

19 May 2026

संदर्भ

हाल ही में भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों कोग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (Green Strategic Partnership)” के स्तर तक उन्नत किया, जिसका उद्देश्य ग्रीन शिपिंग, ब्लू इकोनॉमी, ऊर्जा संक्रमण और सतत् विकास में सहयोग को सुदृढ़ करना है। 

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम् (King Harald V) द्वारा रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट (Grand Cross) से सम्मानित किया गया।

भारत–नॉर्वे बैठक के प्रमुख बिंदु

  • ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: भारत और नॉर्वे ने अपने संबंधों को ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” में उन्नत किया, जिससे जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत् समुद्री विकास में सहयोग को गहराई मिलेगी।
  • ब्लू इकोनॉमी और हरित शिपिंग में सहयोग: दोनों देशों ने हरित शिपिंग, समुद्री नवाचार, महासागरीय अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ईंधन और सतत् बंदरगाह अवसंरचना में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
  • रणनीतिक और भू-राजनीतिक समन्वय: दोनों पक्षों ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, शांतिपूर्ण कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति समर्थन दोहराया, विशेष रूप से यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों के संदर्भ में।

भारत–नॉर्वे संबंध

  • भारत और नॉर्वे के बीच संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुपक्षीय सहयोग, सतत् विकास और बढ़ते आर्थिक जुड़ाव पर आधारित हैं।
  • ऐतिहासिक उत्पत्ति: भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद वर्ष 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए गए, और नॉर्वे संप्रभु भारत को मान्यता प्रदान करने वाले प्रारंभिक देशों में से एक था।
  • रणनीतिक और कूटनीतिक सहयोग: दोनों देश नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, शांतिपूर्ण विवाद समाधान, जलवायु कार्रवाई, आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार का समर्थन करते हैं।

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  • आर्थिक और व्यापारिक संबंध: भारत और नॉर्वे के मध्य द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का अपेक्षाकृत संतुलित आदान-प्रदान होता है।
    • द्विपक्षीय व्यापार नवीकरणीय ऊर्जा, शिपिंग, समुद्री प्रौद्योगिकी, उर्वरक, दूरसंचार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे-क्षेत्रों में विस्तारित हुआ है, जिसे भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के माध्यम से और सुदृढ़ किया गया है।
  • समुद्री और हरित साझेदारी: हाल ही में उन्नत ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के अंतर्गत भारत और नॉर्वे हरित शिपिंग, ब्लू इकोनॉमी, आर्कटिक अनुसंधान, अपतटीय ऊर्जा, सतत् मत्स्यपालन और समुद्री नवाचार में व्यापक सहयोग करते हैं।
  • सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध: नॉर्वे में लगभग 30,000 भारतीय प्रवासी रहते हैं, जबकि भारतीय छात्र, सांस्कृतिक संगठन और ‘टर्बन डे’ तथा ‘ओस्लो कलर फेस्टिवल’ जैसे आयोजन लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं।

ग्रीन शिपिंग (Green Shipping) के बारे में

  • ग्रीन शिपिंग से आशय पर्यावरणीय रूप से सतत समुद्री परिवहन प्रथाओं से है, जिनका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, समुद्री प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना है।
  • ग्रीन शिपिंग की प्रमुख विशेषताएँ
    • स्वच्छ समुद्री ईंधनों का उपयोग: ग्रीन शिपिंग में ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया, मेथेनॉल, LNG और जैव ईंधन जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे जहाजों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
    • ऊर्जा-कुशल पोत डिजाइन: आधुनिक ग्रीन जहाजों में उन्नत डिजाइन, पवन-सहायित प्रणोदन, बैटरी प्रणाली और ईंधन-कुशल इंजन का उपयोग किया जाता है, जिससे ऊर्जा दक्षता में सुधार होता है।
    • समुद्री प्रदूषण में कमी: ग्रीन शिपिंग तेल रिसाव, जल प्रदूषण, जल-नीचे ध्वनि प्रदूषण और प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करने पर बल देती है, जो समुद्री पारितंत्र को प्रभावित करते हैं।
  • ग्रीन शिपिंग हेतु अनुकूलन
    • बंदरगाहों और जहाज का विद्युतीकरण: बंदरगाहों पर शोर पॉवर’ सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं, जिससे जहाज खड़े रहने के दौरान अपने डीजल इंजन बंद कर सकते हैं।
    • स्मार्ट और डिजिटल नेविगेशन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल मार्ग अनुकूलन के उपयोग से ईंधन खपत और परिचालन अक्षमताओं में कमी आती है।
    • नेट-जीरो शिपिंग की ओर संक्रमण: शिपिंग कंपनियाँ कार्बन-न्यूट्रल प्रौद्योगिकियों को अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों का पालन कर रही हैं।

ग्रीन शिपिंग और ब्लू इकोनॉमी को समर्थन देने वाली भारत सरकार की पहलें

  • सागरमाला कार्यक्रम (2015): सागरमाला का उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, तटीय अवसंरचना में सुधार, तटीय शिपिंग को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है।
  • मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 (2021): यह विजन दस्तावेज ग्रीन पोर्ट्स, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, डिजिटल समुद्री अवसंरचना और सतत् तटीय विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • हरित सागर’ ग्रीन पोर्ट दिशा-निर्देश (2023): पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने हरित सागर” दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण-अनुकूल बंदरगाह संचालन को बढ़ावा देना है।
    • इस पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रति टन कार्गो पर कार्बन उत्सर्जन में 30% तथा वर्ष 2047 तक 70% की कमी करना है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023): यह मिशन ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें शिपिंग और समुद्री परिवहन में उनके भविष्य के उपयोग को भी शामिल किया गया है।
  • ब्लू इकोनॉमी नीति ढाँचा: भारत मत्स्य विकास, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा और तटीय पर्यटन के माध्यम से महासागरीय संसाधनों के सतत् उपयोग को बढ़ावा देता है।
  • डीप ओशन मिशन (2021): यह मिशन गहरे समुद्र की खोज, समुद्री जैव विविधता अनुसंधान और महासागरीय संसाधनों के सतत् उपयोग पर केंद्रित है।
  • ग्रीन टग ट्रांजिशन कार्यक्रम (2024): भारत ने पारंपरिक ईंधन आधारित हार्बर टग्स को ग्रीन और हाइब्रिड प्रणोदन प्रणालियों से प्रतिस्थापित करने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया।

भारत के लिए ‘ब्लू इकोनॉमी’ का महत्त्व

  • समुद्री संसाधनों का उपयोग: भारत की विस्तृत तटरेखा और विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) मत्स्यपालन, अपतटीय ऊर्जा, समुद्री तल खनिजों और समुद्री व्यापार में व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।
  • सतत् आर्थिक विकास: ब्लू इकोनॉमी रोजगार सृजन, खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और तटीय आजीविका को सतत् समुद्री संसाधन प्रबंधन के माध्यम से समर्थन देती है।
  • रणनीतिक समुद्री सुरक्षा: समुद्री अवसंरचना का विकास हिंद महासागर क्षेत्र और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।

निष्कर्ष

भारत–नॉर्वे सहयोग सतत् समुद्री विकास, हरित प्रौद्योगिकी और ब्लू इकोनॉमी साझेदारी के बढ़ते महत्त्व को दर्शाता है, जो वैश्विक जलवायु संक्रमण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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