संदर्भ
केरल सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण एवं देखभाल हेतु भारत का पहला समर्पित विभाग स्थापित करने की घोषणा की है।
केरल में वरिष्ठ नागरिक कल्याण विभाग के बारे में
- उद्देश्य: केरल की तीव्र गति से बढ़ती वृद्धजन आबादी से उत्पन्न सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना।
- मौजूदा संस्थागत समर्थन: केरल ने पहले ही निम्नलिखित व्यवस्थाएँ स्थापित कर ली हैं:-
- राज्य वृद्धजन आयोग (2025): वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय।
- सामुदायिक पहलें: जैसे वयोमित्रम् (Vayomithram), जो मोबाइल चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता है, तथा समयप्रभा (Samayaprabha) डे-केयर केंद्र।
- केरल केयर पैलिएटिव ग्रिड सरकारी संस्थानों एवं गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को एकीकृत कर पैलिएटिव देखभाल सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करने वाला तंत्र है।
केरल की जनसांख्यिकी में परिवर्तन
- वृद्धजन आबादी में वृद्धि: केरल भारत में वृद्धजन आबादी में सबसे तेज वृद्धि वाला राज्य है, जहाँ लगभग 16.5% जनसंख्या 60 वर्ष से अधिक है, जो वर्ष 2031 तक बढ़कर 20.9% होने का अनुमान है।
- वृद्धावस्था आश्रित अनुपात में वृद्धि: केरल का वृद्धावस्था आश्रित अनुपात वर्ष 2011 में 19.6% से बढ़कर वर्ष 2021 में 26.1% हो गया है और वर्ष 2031 तक 34.3% तक पहुँचने की संभावना है।
- वृद्धावस्था आश्रित अनुपात (OADR): प्रति 100 कार्यशील आयु वर्ग के व्यक्तियों पर वृद्ध आश्रितों की संख्या को दर्शाता है।
- वृद्धाश्रमों में वृद्धि: वर्ष 2016-17 में 19,149 से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 37,895 निवासियों तक पहुँचने से वृद्धजन देखभाल की बढ़ती आवश्यकता का संकेत मिलता है।
- ग्रामीण एवं महिला वृद्धावस्था में वृद्धि: केरल की ग्रामीण जनसंख्या का लगभग 17.5% भाग 60 वर्ष से अधिक आयु का है, जबकि 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी अधिक है।
केरल की जनसंख्या के तीव्र वृद्धावस्था के कारण
- प्रजनन दर में गिरावट: केरल की कुल प्रजनन दर (TFR) वर्ष 2023 में घटकर 1.35 हो गई, जो प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन दर (2.1) से अत्यधिक कम है।
- उच्च जीवन प्रत्याशा: बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है, जो महिलाओं के लिए लगभग 78.4 वर्ष तथा पुरुषों के लिए 71.9 वर्ष तक पहुँच गई है।
- बड़े पैमाने पर प्रवासन: कार्यशील आयु वर्ग के लोगों के विदेश प्रवासन के कारण केरल में अनेक वृद्ध माता-पिता अकेले रहने को विवश हो गए हैं।
- प्रति प्रवासन: पश्चिम एशिया से सेवानिवृत्ति के बाद लौटने वाले प्रवासियों ने राज्य में वृद्धजन आबादी में और वृद्धि की है।
केरल की वृद्ध होती जनसंख्या से संबंधित चुनौतियाँ
- स्वास्थ्य भार में वृद्धि: केरल के 70% से अधिक वृद्धजन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया एवं हृदय-रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से ग्रस्त हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य एवं डिमेंशिया की समस्या: लगभग एक-चौथाई वृद्धजन मनोवैज्ञानिक तनाव से प्रभावित हैं, जबकि 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में डिमेंशिया का प्रसार उल्लेखनीय बना हुआ है।
- वृद्धावस्था देखभाल संबंधी कार्यबल की कमी: केरल में वर्तमान में लगभग 120 जेरियाट्रिशियन तथा 600 प्रशिक्षित वृद्ध-देखभाल नर्सें हैं, जो वर्ष 2030 की अनुमानित आवश्यकताओं की तुलना में अत्यंत कम हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए पृथक विभाग का महत्त्व
- केंद्रित संस्थागत तंत्र: यह विभाग वृद्धजन कल्याण, वृद्धावस्था संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा नीतियों के लिए समर्पित प्रशासनिक सेवाएँ प्रदान करेगा।
- देखभाल अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: यह पहल प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं, पैलिएटिव केयर सेवाओं एवं वृद्ध-सहायक अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित कर सकती है।
- भारत में वृद्धावस्था शासन का मॉडल: केरल की यह पहल जनसांख्यिकीय संक्रमण एवं बढ़ती वृद्धजन आबादी से जूझ रहे अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।
निष्कर्ष
केरल द्वारा वरिष्ठ नागरिकों हेतु पृथक विभाग की स्थापना जनसांख्यिकीय वृद्धावस्था से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए सक्रिय एवं दूरदर्शी शासन दृष्टिकोण को परिलक्षित करती है, जो विशेषीकृत स्वास्थ्य सेवाओं, कल्याण समर्थन तथा दीर्घकालिक देखभाल अवसंरचना के माध्यम से समग्र समाधान प्रदान करने की दिशा में अग्रसर है।