CLEAR तकनीक (CLEAR Technology)

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जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उन्नत रोग अनुसंधान के लिए CLEAR नामक एक नई प्रोटीन इमेजिंग टेक्नोलॉजी विकसित की है।
CLEAR तकनीक के बारे में
- पूर्ण नाम: क्लीवेबल लाइट-इरेज्ड एंटीबॉडी रिपोर्टर (Cleavable Light-Erased Antibody Reporter- CLEAR)
- यह एक उन्नत ‘प्रोटीन इमेजिंग टेक्नोलॉजी’ है।
- कार्य प्रणाली: यह ‘लाइट-क्लीवेबल फ्लोरोसेंट प्रॉब्स’ का उपयोग करती है, जिन्हें पृथक कर और पुनः उपयोग करके एक ही जैविक नमूने में कई प्रोटीनों की इमेजिंग की जा सकती है।
- यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: प्रोटीन अधिकांश जैविक कार्यों को नियंत्रित करते हैं और कैंसर तथा न्यूरोलॉजिकल विकारों जैसी बीमारियों के प्रमुख संकेतक होते हैं।
- महत्त्व: ‘क्लीवेबल लाइट-इरेज्ड एंटीबॉडी रिपोर्टर’ कोशिकाओं और ऊतकों में प्रोटीनों की ‘हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग’ को संभव बनाता है, जिससे कैंसर, इम्यूनोलॉजी, न्यूरोलॉजिकल विकारों और प्रिसीजन मेडिसिन से जुड़े अनुसंधानों को सहायता मिलती है।
- प्रकाशन: यह अध्ययन जर्नल ‘केमिकल साइंस’ में प्रकाशित हुआ।
- ‘क्लीवेबल लाइट-इरेज्ड एंटीबॉडी रिपोर्टर’ की प्रमुख विशेषताएँ
- हाई मल्टीप्लेक्सिंग: CLEAR एक ही फ्लोरोफोर (Fluorophore) का उपयोग करके अनेक प्रोटीनों की क्रमिक इमेजिंग की सुविधा प्रदान करता है।
- उच्च स्थानिक रिजॉल्यूशन (Spatial Resolution): यह कोशिकाओं और ऊतकों में प्रोटीनों के अत्यंत विस्तृत मानचित्र तैयार करता है।
- जीवंत कोशिकाओं के साथ अनुकूलन: यह विधि संवेदनशील जैविक नमूनों और जीवंत कोशिकाओं पर भी प्रभावी रूप से कार्य करती है।
- अधिक तीव्र एवं कुशल: कई मौजूदा मल्टीप्लेक्स इमेजिंग तकनीकों के विपरीत, CLEAR गति, उच्च रिजॉल्यूशन, पुनः प्रयोज्यता और कम जटिलता को एक साथ जोड़ता है।
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वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप, (WYC), 2026

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केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री ने नई दिल्ली में प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप, 2026 की आधिकारिक चैंपियनशिप फिल्म लॉन्च की।
- चैंपियनशिप का लोगो, ट्रॉफी, आधिकारिक जर्सी और शुभंकर ‘वीर द लायन’ का भी अनावरण किया गया।
वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप (WYC), 2026 के बारे में
- स्थान और कार्यक्रम: वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप (WYC), 2026 का उद्घाटन संस्करण 4 से 8 जून, 2026 तक अहमदाबाद के EKA एरिना में आयोजित किया जाएगा।
- पहला वैश्विक योगासन खेल आयोजन: यह योगासन को प्रतिस्पर्द्धी खेल के रूप में समर्पित पहला वैश्विक चैंपियनशिप आयोजन है।
- ओलंपिक मान्यता का उद्देश्य: इस चैंपियनशिप का उद्देश्य योगासन को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त खेल विधा के रूप में स्थापित करना और ओलंपिक मान्यता का मार्ग प्रशस्त करना है।
- अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: इस आयोजन के लिए लगभग 75 देशों ने पंजीकरण कराया है, जिसमें 500 से अधिक खिलाड़ियों और प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है।
- भाग लेने वाले देश: भाग लेने वाले देशों में युगांडा, जांबिया, श्रीलंका, नेपाल, केन्या, जापान, ओमान, मॉरीशस और नीदरलैंड्स शामिल हैं।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए समर्पित मंत्रालय
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तमिलनाडु ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल सेवाओं के लिए एक समर्पित मंत्रालय का गठन किया है, जो केरल की हालिया कैबिनेट-स्तरीय AI शासन पहल के बाद उठाया गया कदम है।
समर्पित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मंत्रालय के बारे में
- समर्पित AI मंत्रालय: यह एक विशेष सरकारी विभाग होता है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संबंधित नीतियों के निर्माण, डिजिटल शासन, उभरती प्रौद्योगिकियों, नैतिक विनियमन, नवाचार को बढ़ावा देने तथा AI पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए उत्तरदायी होता है।
अग्रणी राज्य
- तमिलनाडु: तमिलनाडु ने आर. कुमार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं के मंत्री के रूप में नियुक्त किया, ताकि AI शासन, डिजिटल अवसंरचना और तकनीकी अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके।
- केरल: केरल ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अंतर्गत एक समर्पित AI पोर्टफोलियो बनाया, जिसमें AI को सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप्स और औद्योगिक विकास के साथ एकीकृत किया गया।
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नौतपा और भारत में बढ़ती हीटवेव परिस्थितियाँ
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भारत वर्तमान में 25 मई से 2 जून तक ‘नौतपा’ के कारण तीव्र हीटवेव परिस्थितियों का सामना कर रहा है, जो शक्तिशाली सुपर एल-नीनो (Super El Niño) घटना के लगातार प्रभाव के बीच उत्पन्न हुई हैं।
नौतपा (Nautapa) के बारे में
- नौतपा भारतीय ग्रीष्म ऋतु के वे पारंपरिक रूप से मान्य नौ सबसे गर्म दिन होते हैं, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पूर्व आते हैं।
- पारंपरिक विवरण: ‘नौतपा’ शब्द हिंदू खगोलीय परंपराओं से उत्पन्न हुआ है और इसकी शुरुआत तब मानी जाती है, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जो सामान्यतः मई के अंतिम सप्ताह में होता है।
- जलवायु संबंधी विशेषताएँ: नौतपा के दौरान अत्यधिक उच्च तापमान, गर्म और शुष्क हवाएँ, तीव्र सौर विकिरण तथा उत्तर और मध्य भारत में लू (हीटवेव) जैसी परिस्थितियाँ देखने को मिलती हैं।
- भौगोलिक प्रभाव: इस अवधि में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।
- तापमान सीमा: नौतपा के समय तापमान सामान्यतः 40°C से 46°C तक पहुँच जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और जल संकट का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में गर्मी बढ़ने के प्रमुख कारण
- सुपर एल-नीनो परिस्थितियाँ: प्रशांत महासागर में शक्तिशाली एल-नीनो घटना ने वैश्विक तापमान बढ़ा दिया है और भारत सहित दक्षिण एशिया में हीटवेव की स्थितियों को तीव्र कर दिया है।
- सौर ताप में तीव्रता: मई के अंतिम दिनों में स्वच्छ आसमान और सौर विकिरण के सीधी पड़ने के कारण मानसून वर्षा शुरू होने से पूर्व भूमि सतह तेजी से गर्म हो जाती है।
- शुष्क महाद्वीपीय हवाएँ: उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्रों से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएँ वायुमंडलीय नमी को कम करती हैं और भारत के आंतरिक भागों में दिन के तापमान को और बढ़ा देती हैं।
- मानसून में देरी या कमजोर स्थिति: मानसून के आगमन में किसी भी प्रकार की देरी हीटवेव की स्थिति को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखती है और कृषि, जल संसाधनों तथा विद्युत की माँग पर दबाव बढ़ाती है।
- ‘शहरी ऊष्मा द्वीप’ प्रभाव: तीव्र शहरीकरण, कंकरीट आधारित अवसंरचना और हरित आवरण में कमी, शहरों को गर्म रखने में सहायक होती है, जिससे शहरी क्षेत्र आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म हो जाते हैं।
अत्यधिक गर्मी के प्रभाव
- सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम: हीटवेव के कारण हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हृदय संबंधी तनाव और मृत्यु के मामलों में वृद्धि होती है, विशेषकर बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों जैसी संवेदनशील आबादी में।
- कृषि पर दबाव: अत्यधिक तापमान मृदा की नमी को कम करता है, फसलों को नुकसान पहुँचाता है और सिंचाई की माँग बढ़ाता है, जिससे कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
- ऊर्जा और जल संसाधनों पर दबाव: शीतलन आवश्यकताओं के कारण विद्युत की माँग तेजी से बढ़ती है, जबकि सूखा-प्रवण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जल संकट और गंभीर हो जाता है।
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बेलगोरोद क्षेत्र (Belgorod Region)

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रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिनसे ऊर्जा अवसंरचना को नुकसान पहुँचा तथा यूक्रेन सीमा के निकट विद्युत एवं जल आपूर्ति बाधित हो गई।
बेलगोरोद क्षेत्र के बारे में
- बेलगोरोद पश्चिमी रूस का एक प्रशासनिक क्षेत्र (ओब्लास्ट) है, जिसने रूस–यूक्रेन संघर्ष के दौरान रणनीतिक महत्त्व प्राप्त किया है।
- स्थान: बेलगोरोद क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी रूस में अवस्थित है और इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा उत्तर-पूर्वी यूक्रेन से लगती है।
- प्रशासनिक केंद्र: बेलगोरोद शहर इस क्षेत्र का प्रशासनिक मुख्यालय है और यह प्रमुख संघर्ष क्षेत्रों के निकट स्थित है।
बेलगोरोद क्षेत्र का महत्त्व
- रणनीतिक सीमा क्षेत्र: बेलगोरोद रूस की सैन्य रसद, सैनिकों के आवागमन और यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति गतिविधियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण सीमा क्षेत्र के रूप में कार्य करता है।
- ऊर्जा और अवसंरचना केंद्र: इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण परिवहन, विद्युत और ईंधन अवसंरचनाएँ मौजूद हैं, जिससे युद्धकालीन तनाव बढ़ने पर यह ड्रोन एवं मिसाइल हमलों के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
- सुरक्षा और रक्षा महत्त्व: बेलगोरोद में बार-बार होने वाले सीमा-पार हमले आधुनिक संघर्षों में ड्रोन, मिसाइल प्रणालियों और हाइब्रिड वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका को उजागर करते हैं।
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