स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (GMS)

12 May 2026

संदर्भ

उद्योग निकायों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme- GMS) को मजबूत करे, ताकि स्वर्ण के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता को कम किया जा सके।

स्वर्ण बाजार (Gold Market) के संबंध में मुख्य चिंताएँ

  • स्वर्ण आयात में वृद्धि: भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण आयातकों में से एक बना हुआ है, जो लगभग 700–900 टन/वर्ष स्वर्ण का आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ जाता है।
  • विदेशी मुद्रा पर दबाव: स्वर्ण के उच्च आयात से विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ जाती है और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार तथा भारतीय रुपये की स्थिरता पर दबाव पड़ता है।
  • भारतीय परिवारों के पास निष्क्रिय स्वर्ण की मौजूदगी: अनुमान है कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास 25,000 टन से अधिक निष्क्रिय स्वर्ण है, जिसका अधिकांश हिस्सा औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रहता है।
  • अनौपचारिक और अनियमित व्यापार: उच्च सीमा शुल्क और कीमतों में अंतर स्वर्ण की तस्करी को बढ़ावा देते हैं, जैसा कि तटीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में बार-बार होने वाली स्वर्ण जब्ती में देखा जाता है।

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चालू खाता घाटा (CAD) के बारे में (UPSC CSE Pre 2017)

  • चालू खाता घाटा (CAD) तब होता है, जब किसी विशिष्ट अवधि में किसी देश का वस्तुओं, सेवाओं और हस्तांतरण का कुल आयात उसके कुल निर्यात से अधिक हो जाता है।
  • चालू खाते के घटक 
    • वाणिज्य वस्तु व्यापार (Merchandise Trade): इसमें पेट्रोलियम, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों जैसी भौतिक वस्तुओं का निर्यात तथा आयात शामिल है।
    • सेवा व्यापार (Services Trade): इसमें IT, बैंकिंग, पर्यटन, शिपिंग और बीमा जैसी सेवाओं से होने वाली आय तथा भुगतान शामिल हैं।
    • आय खाता (Income Account): इसमें विदेशी निवेश और रोजगार से अर्जित ब्याज, लाभांश, लाभ और मजदूरी शामिल है।
    • चालू हस्तांतरण (Current Transfers): इसमें वस्तुओं या सेवाओं के किसी भी विनिमय के बिना प्रेषण, उपहार, अनुदान और विदेशी सहायता जैसे एकतरफा हस्तांतरण शामिल हैं।
  • उच्च चालू खाता घाटा (CAD) विदेशी पूँजी प्रवाह पर निर्भरता बढ़ाता है और विनिमय दरों तथा विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकता है।

स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme- GMS) के बारे में (UPSC CSE Pre 2016)

  • स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) व्यक्तियों और संस्थानों को बैंकों में निष्क्रिय स्वर्ण जमा करने और उस पर ब्याज अर्जित करने की अनुमति देती है।
  • उद्देश्य: अप्रयुक्त स्वर्ण को गतिशील बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना।
  • शुरुआत: केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015 में।

GMS की मुख्य विशेषताएँ

  • स्वर्ण जमा सुविधा: व्यक्ति, ट्रस्ट और संस्थान शुद्धता परीक्षण के बाद कच्चा स्वर्ण, आभूषण या बुलियन (ईंट/सिक्के) जमा कर सकते हैं।
  • ब्याज आय: जमाकर्ताओं को जमा किए गए स्वर्ण पर ब्याज मिलता है, जिससे निष्क्रिय संपत्ति वित्तीय रूप से उत्पादक बन जाती है।
  • जमा अवधि के विकल्प: यह योजना अलग-अलग परिपक्वता अवधि के साथ अल्पकालिक, मध्यम अवधि और लंबी अवधि के जमा विकल्प प्रदान करती है।
  • 26 मार्च, 2025 तक की स्थिति: GMS को 1-3 वर्षों की अल्पकालिक बैंक जमा (STBD) तक सीमित कर दिया गया है, जबकि मध्यम/दीर्घकालिक सरकारी जमा (5-15 वर्ष) को बंद कर दिया गया है।
    • यह योजना व्यक्तियों और संस्थानों को ब्याज अर्जित करने के लिए अपरिष्कृत स्वर्ण (न्यूनतम 10 ग्राम) जमा करने की अनुमति देती है, जिसका रिटर्न आमतौर पर स्वर्ण की कीमत के आधार पर भारतीय रुपये (INR) में दिया जाता है।
  • शुद्धता सत्यापन: स्वीकृति से पहले संग्रह और शुद्धता परीक्षण केंद्रों पर स्वर्ण का परीक्षण तथा प्रमाणन किया जाता है।
  • ऋणमुक्ति का विकल्प: योजना की शर्तों के आधार पर, जमाकर्ता परिपक्वता मूल्य या तो स्वर्ण में अथवा समकक्ष नकद में प्राप्त कर सकते हैं।

वर्तमान परिदृश्य में GMS का महत्त्व

  • आयात निर्भरता को कम करना: घरेलू निष्क्रिय स्वर्ण को गतिशील बनाने से अत्यधिक स्वर्ण के आयात को कम किया जा सकता है और व्यापार संतुलन में सुधार हो सकता है।
  • वित्तीय बचत को मजबूत करना: यह योजना परिवारों को भौतिक स्वर्ण जमा करने के बजाय औपचारिक वित्तीय भागीदारी की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • विदेशी मुद्रा स्थिरता में सहायक: स्वर्ण के कम आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है और रुपये को स्थिर करने में सहायता मिलती है।
  • स्वर्ण अर्थव्यवस्था का औपचारीकरण: GMS पारदर्शिता, संगठित स्वर्ण पुनर्चक्रण और बैंकिंग प्रणाली में स्वर्ण संपत्तियों के एकीकरण को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

प्रभावी ढंग से लागू की गई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करते हुए निष्क्रिय स्वर्ण को एक उत्पादक वित्तीय संपत्ति में बदल सकती है।

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