संदर्भ
प्रकाश प्रदूषण में वृद्धि वैश्विक स्तर पर महत्त्वपूर्ण खगोलीय अनुसंधान केंद्र अटाकामा मरुस्थल (Atacama Desert) के रात्रिकालीन आकाश के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है।
अटाकामा मरुस्थल के बारे में
- अटाकामा मरुस्थल पृथ्वी के सबसे शुष्क स्थलों में से एक है, जो अपनी अत्यधिक शुष्कता तथा खगोलीय अवलोकन के लिए अनुकूल विशिष्ट परिस्थितियों के लिए प्रसिद्ध है।
- स्थान: यह दक्षिण अमेरिका में उत्तरी चिली के प्रशांत तट के साथ स्थित है तथा एंडीज पर्वतमाला और चिली तटीय पर्वतमाला के बीच विस्तृत है।
- यद्यपि यह मुख्यतः चिली में स्थित है, फिर भी अटाकामा एक व्यापक शुष्क पट्टी का हिस्सा है, जो दक्षिणी पेरू तक विस्तृत है, किंतु इसका प्रमुख मरुस्थलीय क्षेत्र चिली के भीतर ही स्थित है।
- अटाकामा खगोल विज्ञान के लिए आदर्श क्यों है?
- विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियाँ: यह मरुस्थल उच्च ऊँचाई (3000 मीटर से अधिक), अत्यधिक शुष्क तथा न्यूनतम बादल आवरण का संयोजन प्रस्तुत करता है, जिससे वर्ष में 300 से अधिक स्वच्छ रात्रियाँ उपलब्ध होती हैं।
- कम प्रकाश प्रदूषण: इसकी दूरस्थ अवस्थिति, जो शहरी बस्तियों से दूर है, अत्यंत अंधकारयुक्त आकाश प्रदान करती है, जो गहन अंतरिक्ष अवलोकन के लिए उपयुक्त है।
- स्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ: कम आर्द्रता एवं वायुमंडल विकृति को कम करते हैं, जिससे उच्च-परिशुद्धता खगोलीय चित्रण संभव होता है।

- अटाकामा में प्रमुख खगोलीय अवसंरचना
- वैश्विक वेधशाला केंद्र: यह क्षेत्र विश्व-स्तरीय वेधशालाओं का केंद्र है, जैसे ‘पैरानल ऑब्जर्वेटरी’, जिसका संचालन ‘यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी’ द्वारा किया जाता है।
- एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ELT)
- यह लगभग 1.5 अरब डॉलर की लागत वाली निर्माणाधीन परियोजना है।
- यह वर्तमान दूरदर्शियों की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक शक्तिशाली होगा।
- इसके वर्ष 2030 तक पूर्ण होने की संभावना है।
उभरता हुआ खतरा: प्रकाश प्रदूषण
- शहरी एवं औद्योगिक विस्तार: खनन, पवन ऊर्जा परियोजनाओं तथा शहरी विस्तार में वृद्धि से कृत्रिम प्रकाश बढ़ रहा है, जिससे ‘आकाश’ की दृश्यता प्रभावित हो रही है।
- ऊर्जा अवसंरचना से संघर्ष: वेधशालाओं के समीप प्रस्तावित हरित ऊर्जा परियोजनाएँ विकास और वैज्ञानिक संरक्षण के बीच तनाव को उजागर करती हैं।
- कमजोर विनियामक ढाँचा: वर्तमान ‘आकाश संरक्षण कानून’ अपर्याप्त एवं पुरातन हैं, जिसके कारण चिली सरकार द्वारा इनके पुनरीक्षण की आवश्यकता अनुभव की जा रही है।
PWOnlyIAS विशेष
प्रकाश प्रदूषण के बारे में
प्रकाश प्रदूषण से आशय रात्रि के समय अत्यधिक, अनुचित दिशा में निर्देशित अथवा त्रुटिपूर्ण रूप से डिजाइन किए गए कृत्रिम प्रकाश से है, जो प्राकृतिक अंधकार एवं पारिस्थितिकी संतुलन को बाधित करता है।
प्रकाश प्रदूषण के लिए उत्तरदायी कारक
- शहरीकरण एवं अवसंरचना वृद्धि: शहरों, राजमार्गों तथा वाणिज्यिक क्षेत्रों के तीव्र विस्तार से निरंतर कृत्रिम प्रकाश उत्पन्न होता है, जिससे आकाशीय प्रकाश का अनावश्यक प्रसार बढ़ता है।
- अप्रभावी प्रकाश: बिना आवरण वाले उपकरण तथा अत्यधिक प्रकाश व्यवस्था के कारण चमक एवं प्रकीर्णित प्रकाश उत्पन्न होता है, जिससे अनपेक्षित क्षेत्रों में भी प्रकाश का प्रसार होता है।
- प्रकाश उत्सर्जक ‘डायोड प्रौद्योगिकी’ की ओर परिवर्तन: उच्च तीव्रता वाले प्रकाश उत्सर्जक डायोड के व्यापक उपयोग से, जिनमें नीली रोशनी अधिक होती है, प्रकाश की तीव्रता एवं प्रवेशन क्षमता बढ़ती है, जिससे प्रकाश का प्रसार और अधिक बढ़ जाता है।
प्रकाश प्रदूषण के प्रभाव
- समुद्री पारितंत्र में व्यवधान: कृत्रिम प्रकाश समुद्री कछुओं को प्रभावित करता है, जहाँ मादा उपयुक्त अंधकारमय स्थान नहीं ढूँढ पातीं तथा नवजात कछुए चंद्रमा की दिशा के स्थान पर भूमि की ओर बढ़ जाते हैं, जिससे मृत्यु दर बढ़ती है।
- वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव: प्रकाश प्रवास एवं आहार व्यवहार को बाधित करता है; उदाहरणतः चंद्रमा के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शित पक्षी दिशाभ्रमित हो जाते हैं, जबकि प्रकाश की ओर आकर्षित कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे खाद्य शृंखला प्रभावित होती है।
- मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: रात्रि में कृत्रिम प्रकाश के संपर्क से ‘जैविक चक्र’ बाधित होता है तथा मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव कम होता है, जिससे नींद संबंधी विकार, तनाव एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- खगोलीय और पर्यावरणीय प्रभाव: स्काई ग्लो (Sky glow) के कारण तारों की दृश्यता कम हो जाती है, जिससे खगोलीय अवलोकन और अनुसंधान गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।
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निष्कर्ष
विकास और संरक्षण के मध्य संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि अटाकामा के आकाश, जो खगोलीय ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक संपत्ति हैं, की रक्षा की जा सके।