IITM क्लाइमेट-टेक इन्क्यूबेशन सेंटर

16 May 2026

संदर्भ

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology) ने एक क्लाइमेट-टेक इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया और मिशन मौसम’ के तहत वेदर एंड क्लाइमेट इनोवेशन मीट फॉर स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योर्स’ (Weather and Climate Innovation Meet for Startups and Entrepreneurs- WISE-2026) की मेजबानी की।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology- IITM) के बारे में

  • भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), जिसे वर्ष 1962 में पुणे में स्थापित किया गया था, उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए भारत का अग्रणी संस्थान है।
  • नोडल निकाय: यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (भारत सरकार) के तहत एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करता है।
  • मुख्य भूमिकाएँ
    • मानसून का पूर्वानुमान और मौसम मॉडलिंग: IITM ‘मिशन मानसून’ के तहत उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियाँ विकसित करता है, ताकि मौसमी और विस्तारित-अवधि के मानसून पूर्वानुमानों में सुधार किया जा सके।
    • जलवायु परिवर्तन अनुसंधान: यहाँ सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज रिसर्च’ (Centre for Climate Change Research- CCCR) अवस्थित है, जो जलवायु अनुमानों और ग्लोबल वार्मिंग के अध्ययन के लिए अर्थ सिस्टम मॉडल’ (Earth System Models) विकसित करता है।
    • चरम मौसम का पूर्वानुमान: आपदा की तैयारी और जलवायु अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए चक्रवातों, लू और भारी वर्षा की घटनाओं का अध्ययन करता है।
    • वायुमंडलीय अवलोकन और ‘क्लाउड फिजिक्स’: यह एरोसोल, क्लाउड फिजिक्स’ और वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए रडार, उपग्रह डेटा और क्षेत्रीय प्रयोगों का उपयोग करता है।

मिशन मौसम (Mission Mausam) के बारे में 

  • मिशन मौसम को वर्ष 2025 में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 150वीं स्थापना वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में शुरू किया गया था।
  • नोडल मंत्रालय: मिशन मौसम को मुख्य रूप से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा कार्यान्वित किया जाना है।
  • उद्देश्य: खराब मौसम की अत्यधिक घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने तथा उनके प्रति प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता को बढ़ाना।
    • इसका फोकस विभिन्न समय और स्थान के पैमानों पर अत्यधिक सटीक तथा समय पर मौसम व जलवायु की जानकारी प्रदान करने के लिए अवलोकनों एवं समझ को बेहतर बनाने पर होगा।

IITM क्लाइमेट-टेक इन्क्यूबेशन हब (IITM Climate-Tech Incubation Hub) के बारे में

  • IITM ने नेशनल एंटरप्राइज फॉर एटमॉस्फेरिक टेक्नोलॉजी’ (National Enterprise for Atmospheric Technology- NEAT) के तहत भारत का पहला समर्पित वेदर एंड क्लाइमेट स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सेंटर’ (Weather and Climate Startup Incubation Centre) लॉन्च किया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • क्लाइमेट-टेक एंटरप्रेन्योरशिप (जलवायु-तकनीक उद्यमिता): यह केंद्र महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए क्लाइमेट-स्मार्ट (Climate-Smart) और वेदर इंटेलिजेंस सॉल्यूशन (Weather Intelligence Solutions) विकसित करने वाले स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देता है।
    • वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचे तक पहुँच: उत्पाद विकास के लिए स्टार्ट-अप्स को IITM के सुपर कंप्यूटर, जलवायु मॉडल और रिमोट सेंसिंग डेटासेट तक पहुँच प्राप्त होती है।
    • वित्तीय और संस्थागत सहायता: यह इनक्यूबेशन सेंटर, सीड फंडिंग, परामर्श (Mentorship), कार्यक्षेत्र (Workspace) और तकनीकी सत्यापन सहायता प्रदान करता है।
    • उद्योग और निवेशक जुड़ाव: IITM जलवायु प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण का समर्थन करने के लिए स्टार्ट-अप्स को निवेशकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं से जोड़ता है।
    • हाइपरलोकल पूर्वानुमान समाधान (स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान): यह केंद्र कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी लचीलेपन (Urban Resilience) के लिए AI-संचालित स्थानीय पूर्वानुमान उपकरणों को प्रोत्साहित करता है।

वेदर एंड क्लाइमेट इनोवेशन मीट फॉर स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योर्स’ (Weather and Climate Innovation Meet for Startups and Entrepreneurs- WISE-2026) के बारे में 

  • WISE-2026, यानी ‘वेदर एंड क्लाइमेट इनोवेशन मीट फॉर स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योर्स’, का आयोजन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत IITM द्वारा किया गया।
  • मुख्य उद्देश्य
    • विज्ञान और अनुप्रयोग के बीच अंतर को पाटना: इसका उद्देश्य उन्नत जलवायु विज्ञान को व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों में बदलना था।
    • जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) को मजबूत करना: यह कार्यक्रम जीवन, आजीविका और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए जलवायु-अनुकूल नवाचारों पर केंद्रित था।
    • सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देना: इसने स्टार्ट-अप्स, शिक्षा जगत, सरकारी एजेंसियों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित किया।
    • मिशन मौसम को आगे बढ़ाना: इस कार्यक्रम ने मौसम के प्रति तैयार और जलवायु-अनुकूल राष्ट्र के निर्माण के ‘मिशन मौसम’ के दृष्टिकोण का समर्थन किया।
  • प्रतिभागी: इसमें स्टार्ट-अप्स, वैज्ञानिकों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), ‘नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फॉरकास्टिंग’ (National Centre for Medium Range Weather Forecasting- NCMRWF), राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (National Centre for Polar and Ocean Research- NCPOR) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) जैसे संस्थानों ने भाग लिया।
  • महत्त्व: WISE-2026 ने आर्थिक लचीलेपन, आपदा प्रबंधन और सतत् विकास के लिए जलवायु-तकनीक नवाचार (Climate-Tech Innovation) के बढ़ते महत्त्व को रेखांकित किया।

निष्कर्ष

IITM इनक्यूबेशन सेंटर और WISE-2026, सुदृढ़ विकास के लिए जलवायु विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता को एकीकृत करने के भारत के प्रयासों को प्रदर्शित करते हैं।

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