सुरहा ताल भारत का 100वाँ रामसर स्थल घोषित

6 Jun 2026

संदर्भ

विश्व पर्यावरण दिवस, 2026 के अवसर पर भारत ने उत्तर प्रदेश स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को अपना 100वाँ रामसर स्थल घोषित किया।

गोखुर (Oxbow) झील के बारे में 

  • निर्माण: गोखुर झील एक अर्द्धचंद्राकार या घोड़े की नाल के आकार का जल निकाय होता है, जो तब बनता है, जब कोई नदी अपनी मेंडर (घुमावदार धारा) को मुख्य धारा से काटकर अलग कर देती है।
  • विशेषताएँ: यह एक अलग जल निकाय होता है, जो कभी नदी का हिस्सा था और जल आपूर्ति के आधार पर स्थायी या मौसमी हो सकता है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: यह एक महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो जैव विविधता, मत्स्यपालन, भूजल पुनर्भरण तथा प्रवासी पक्षियों का समर्थन करता है।

सुरहा ताल (जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य) के बारे में

  • अवस्थिति: यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मध्य गंगा बेसिन में स्थित है।
  • आर्द्रभूमि का प्रकार: यह एक प्राकृतिक, स्थायी (परिनियल) ऑक्सबो झील है, जो गंगा नदी के परित्यक्त मेंडर द्वारा निर्मित है और तीन जल मार्गों द्वारा पोषित होती है।
    • यह सिंचाई और भूजल पुनर्भरण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत भी है।
  • निर्माण: इसका निर्माण वर्ष 1991 में 45 गाँवों की भूमि को समेकित कर, कुल 3,432.93 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया।
    • इसे वर्ष 2002 में जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य नाम दिया गया।
  • पारिस्थितिकी विशेषताएँ: यह बाढ़भूमि, दलदली क्षेत्र, मौसमी जलमग्न क्षेत्र तथा कृषि आर्द्रभूमियों से युक्त है।
  • पक्षी आवास के रूप में महत्त्व: यह मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग (CAF) के अंतर्गत आने वाले
    • प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख शीतकालीन आवास के रूप में कार्य करता है।

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आर्द्रभूमि (Wetlands) क्या हैं?

  • आर्द्रभूमि वे क्षेत्र हैं, जहाँ जल पर्यावरण तथा उससे संबंधित वनस्पतियाँ और जीव-जंतुओं के जीवन को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कारक उपलब्ध होते हैं।
  • रामसर सम्मेलन की परिभाषा: आर्द्रभूमि में दलदल (Marsh), फेन, पीटलैंड या जल क्षेत्र शामिल होते हैं, जो प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थायी या अस्थायी, मीठे या लवणीय जल युक्त हो सकते हैं तथा इसमें निम्न ज्वार (Low tide) पर 6 मीटर की गहराई तक के समुद्री क्षेत्र भी सम्मिलित होते हैं।
  • भारतीय परिभाषा: आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के अंतर्गत नदी मार्ग, धान के खेत, पेयजल टैंक, जलीय कृषि तालाब, लवणीय निकाय तथा सिंचाई आधारित संरचनाओं को आर्द्रभूमि की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है।

आर्द्रभूमि पर रामसर अभिसमय/कन्वेंशन

  • उद्गम: इसे वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था तथा यह वर्ष 1975 में प्रभावी हुआ। यह किसी विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र (आर्द्रभूमि) पर केंद्रित विश्व की पहली वैश्विक संधि थी।
  • तीन स्तंभ
    • अंतरराष्ट्रीय महत्त्व वाली आर्द्रभूमियों का संरक्षण।
    • सभी आर्द्रभूमियों का कुशलतापूर्वक उपयोग करना।
    • साझा आर्द्रभूमियों  और प्रवासी प्रजातियों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
  • भारत और रामसर: भारत वर्ष 1982 में रामसर सम्मेलन में शामिल हुआ और प्रारंभ में चिलका झील तथा केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को रामसर स्थलों के रूप में नामित किया।
  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस: यह प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आर्द्रभूमियों का महत्त्व

  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: ये पृथ्वी के केवल लगभग 6% भू-भाग पर स्थित हैं, लेकिन लगभग 40% वनस्पति और जंतुओं की प्रजातियों को आश्रय एवं संरक्षण प्रदान करते हैं।
  • प्राकृतिक बाढ़ नियंत्रण: ये प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करते हैं, जो अधिक वर्षा जल को अवशोषित कर बाढ़ के जोखिम को कम करते हैं।
  • जल का शुद्धीकरण: इन्हें किडनीज ऑफ द लैंडस्केप” (Kidneys Of The Landscape) कहा जाता है, क्योंकि ये प्रदूषकों को छानकर जल की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
  • जलवायु विनियमन: ये महत्त्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं, जो मृदा और वनस्पतियों में कार्बन का संचयन करते हैं।
  • तटीय संरक्षण: ये तूफानी लहरों, चक्रवातों और सुनामी के लिए एक अवरोधक का कार्य कर तटों के निकट स्थित वैश्विक आबादी के लगभग 60% को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
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