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DNA मैपिंग और पैंगोलिन की तस्करी

20 May 2026

संदर्भ

वैज्ञानिकों ने पूरे एशिया और अफ्रीका में पैंगोलिन की तस्करी के रास्तों और अवैध शिकार के केंद्रों की पहचान करने के लिए उन्नत “DNA मैप” विकसित किए हैं।

DNA मैपिंग और पैंगोलिन की तस्करी

  • आनुवंशिक मानचित्रण तकनीक (Genetic Mapping Technique): शोधकर्ताओं ने तस्करी किए गए पैंगोलिन की भौगोलिक मूल का पता लगाने के लिए उन्नत आबादी जीनोमिक्स का उपयोग किया और 671 प्रमुख जीनोम स्थानों को लक्षित किया।
  • उद्देश्य: इस अध्ययन का उद्देश्य तस्करी के मुख्य केंद्रों की पहचान करना और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पैंगोलिन व्यापार नेटवर्क के बीच संबंधों को समझना था।
  • मुख्य निष्कर्ष: शोध ने विभिन्न पैंगोलिन प्रजातियों के लिए दक्षिण-पश्चिम कैमरून, दक्षिण-पश्चिम बोर्नियो और म्याँमार के आस-पास प्रमुख तस्करी हॉटस्पॉट की पहचान की।
  • भारत से जुड़ाव: साक्ष्यों से संकेत मिला है कि अरुणाचल प्रदेश, असम और संभवतः भूटान के तस्करी नेटवर्क चीन के युन्नान के रास्ते पैंगोलिन के शल्कों (स्केल्स) की आपूर्ति कर रहे थे।
  • DNA डेटाबेस का महत्त्व: भू-संदर्भित आनुवंशिक डेटाबेस प्रवर्तन एजेंसियों को शिकार के स्रोतों की पहचान करने और वन्यजीव-अपराध जाँच को मजबूत करने में सहायता करते हैं।

DNA मैपिंग के बारे में

  • DNA मैपिंग (DNA Mapping) एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसका उपयोग किसी गुणसूत्र (क्रोमोसोम) या जीनोम पर जीन अथवा विशिष्ट आनुवंशिक मार्करों की व्यवस्था और उनकी सटीक स्थिति की पहचान करने के लिए किया जाता है।

अनुप्रयोग 

  • वन्यजीव संरक्षण: DNA मैपिंग अवैध शिकार के हॉटस्पॉट का पता लगाने, तस्करी की गई प्रजातियों की पहचान करने और पैंगोलिन व बाघों जैसे लुप्तप्राय जानवरों में आनुवंशिक विविधता की निगरानी करने में सहायता करती है।
  • चिकित्सा अनुसंधान: इसका उपयोग आनुवंशिक विकारों का पता लगाने, वंशानुगत बीमारियों का अध्ययन करने और व्यक्तिगत चिकित्सा के विकास में सहायता के लिए किया जाता।
  • फोरेंसिक विज्ञान: DNA मैपिंग आपराधिक जाँच, पीड़ितों की पहचान और जैविक साक्ष्यों के विश्लेषण में सहायता करती है।
  • कृषि और जैव प्रौद्योगिकी: यह आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से रोग-प्रतिरोधी और उच्च उपज वाली फसलों की किस्मों के विकास का समर्थन करती है।
  • उद्विकास और आबादी अध्ययन: वैज्ञानिक प्रजातियों के उद्विकास, प्रवासन के पैटर्न और विभिन्न क्षेत्रों में आबादी के संबंधों का अध्ययन करने के लिए DNA मैपिंग का उपयोग करते हैं।

भारतीय पैंगोलिन के बारे में

  • भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin) एक रात्रिचर, शल्कों से ढका रहने वाला स्तनधारी जीव है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है और यह दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारियों में से एक है।
  • आवास: यह उष्णकटिबंधीय जंगलों, घास के मैदानों, झाड़ियों वाले क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और भुरभुरी मृदा वाले शुष्क क्षेत्रों में रहता है जो बिल बनाने के लिए अनुकूल होते हैं।
  • वितरण: यह प्रजाति पूरे भारत, श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान व बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में पाई जाती है।
  • भारतीय पैंगोलिन की प्रमुख विशेषताएँ
    • सुरक्षात्मक शल्क: इसका शरीर कठोर किरेटिन शल्कों से ढका होता है, जो एक कवच के रूप में कार्य करते हैं।
    • विशेष आहार: भारतीय पैंगोलिन मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों को खाते हैं, जिसके लिए वे अपनी लंबी चिपचिपी जीभ और खोदने के लिए मजबूत पंजों का उपयोग करते हैं।
    • एकांतप्रिय व्यवहार: यह प्रजनन काल को छोड़कर अकेले रहना पसंद करता है।
    • बिल बनाने की क्षमता (Burrowing Ability): यह आश्रय और सुरक्षा के लिए गहरे बिल बनाता है।
  • भारतीय पैंगोलिन की संरक्षण स्थिति
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I
    • IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)
    • CITES संरक्षण: परिशिष्ट I

पैंगोलिन की तस्करी के कारण

  • अवैध वन्यजीव व्यापार: पैंगोलिन के शल्क और मांस की तस्करी पारंपरिक दवाओं, विलासितापूर्ण भोजन आदि के लिए की जाती है।
  • आवास का नुकसान: वनों की कटाई, खनन और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के कारण प्राकृतिक आवास कम हो रहे हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।
  • कमज़ोर प्रवर्तन नेटवर्क: सीमा-पार तस्करी के रास्ते और संगठित वन्यजीव-अपराध गिरोह संरक्षण प्रयासों को जटिल बना देते हैं।

महत्त्व

  • कानून प्रवर्तन को मजबूत बनाना: DNA मैपिंग, जब्त किए गए वन्यजीव उत्पादों को वैज्ञानिक रूप से शिकार के हॉटस्पॉट से जोड़कर अभियोजन प्रक्रिया को बेहतर बनाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: यह तकनीक, वन्यजीवों के अवैध व्यापार के नेटवर्क के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समन्वय में सहायता करती है।
  • जैव विविधता संरक्षण: वैज्ञानिक ट्रैकिंग उपकरण, लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा करने और पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
  • नीति और निगरानी में सहायता: जीनोमिक डेटाबेस, लक्षित संरक्षण योजना बनाने और वन्यजीवों की निगरानी के तंत्र को उन्नत करने में सक्षम बनाते हैं।
DNA मैपिंग और पैंगोलिन की तस्करी

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