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सर्वोच्च न्यायालय ने ‘पागल कुत्तों’ को मारने की अनुमति दी

20 May 2026

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार कर दिया है और रेबीज से प्रभावित कुत्तों को मारनेकी अनुमति दी है।

मुद्दे की पृष्ठभूमि

  • उत्पत्ति: आवारा कुत्तों के हमलों पर बढ़ती सार्वजनिक चिंता के बाद वर्ष 2025 में स्वतः संज्ञान कार्यवाही शुरू हुई थी।
  • प्रासंगिक कानून: इस मामले में पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की व्याख्या शामिल थी।

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ

  • सार्वजनिक सुरक्षा: न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और सम्मान का अधिकार में नागरिकों का कुत्तों के हमलों के डर के बिना सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित रूप से पहुँचने का अधिकार शामिल है।
  • मानव जीवन को प्राथमिकता: न्यायालय ने कहा कि जब मानव सुरक्षा का पशु कल्याण के साथ टकराव होता है, तो संवैधानिक संतुलन मानव जीवन की सुरक्षा के पक्ष में होना चाहिए।
  • कुत्ते के काटने के मामलों में वृद्धि: न्यायालय ने पूरे भारत में कुत्ते के काटने के बढ़ते मामलों का हवाला दिया, जिसमें वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में तमिलनाडु में कुत्ते के काटने के 2.63 लाख मामले शामिल हैं।
  • प्रशासनिक विफलता: ABC ढाँचे के लगभग दो दशक बीत जाने के बावजूद, राज्य आवारा कुत्तों के प्रबंधन के बुनियादी ढाँचे का व्यवस्थित रूप से विस्तार करने में विफल रहे थे।

न्यायालय द्वारा जारी निर्देश

  • कुत्तों को हटाना: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस डिपो, रेलवे स्टेशनों और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया।
  • दोबारा न छोड़ना: पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी, कुत्तों को संवेदनशील संस्थागत परिसरों में दोबारा नहीं छोड़ा जा सकता है।
  • पशु जन्म नियंत्रण केंद्र: पशु चिकित्सा बुनियादी ढाँचे और नसबंदी सुविधाओं के साथ प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक पूर्ण रूप से कार्यात्मक ABC केंद्र की स्थापना करना।
  • एंटी-रेबीज तैयारी: राज्यों को सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीकों और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
  • मृत्यु: नगर निकायों (नगर पालिकाओं) को निम्नलिखित मामलों में मृत्यु सहित अन्य उपाय अपनाने की अनुमति दी गई:-
    • रेबीज से पीड़ित कुत्ते
    • असाध्य रूप से बीमार कुत्ते
    • प्रमाणित रूप से खतरनाक या आक्रामक कुत्ते।
  • पशु चिकित्सा मूल्यांकन: मृत्यु योग्य पशु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन पर आधारित होनी चाहिए।

पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023

  • कानूनी आधार: पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अधिसूचित किया गया था।
  • पूर्व नियम: इन नियमों ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग) रूल्स, 2001 का स्थान लिया।
  • उद्देश्य: पशु कल्याण सुनिश्चित करने और मानव-पशु संघर्ष को कम करने के साथ-साथ नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण के माध्यम से आवारा कुत्तों की आबादी का प्रबंधन करना।
  • स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी: नगरपालिकाएँ, नगर निगम और पंचायतें एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) और एंटी-रेबीज कार्यक्रमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
  • कोई स्थानांतरण नहीं: ये नियम, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, आवारा कुत्तों को उनके क्षेत्रों से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर रोक लगाते हैं।
  • AWBI-मान्यता प्राप्त संगठन: ABC कार्यक्रम केवल भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (AWBI) द्वारा पशु जन्म नियंत्रण गतिविधियों के लिए मान्यता प्राप्त संगठनों द्वारा ही चलाए जाने चाहिए।
  • CNVR दृष्टिकोण: ये नियम ‘कैप्चर-न्यूटर-वैक्सीनेट-रिलीज’ यानी पकड़ना-नसबंदी करना-टीका लगाना-छोड़ना (CNVR) दृष्टिकोण के लिए विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के मानकों के अनुरूप हैं।
  • क्रूरता की रोकथाम: ये नियम नसबंदी और टीकाकरण प्रक्रियाओं के दौरान जानवरों को सही तरीके से सँभालने और क्रूरता की रोकथाम पर जोर देते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने ‘पागल कुत्तों’ को मारने की अनुमति दी

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