संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने नई दिल्ली में “PMSMA के 10 वर्ष – देखभाल का एक दशक” नामक राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया, जो प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
संबंधित तथ्य
वर्ष 2026 में 9 जून को ‘देखभाल के दशक’ (Decade Of Care) को चिह्नित करने हेतु सरकार प्रमुख राष्ट्रीय गतिविधियाँ प्रारंभ कर रही है:
- आयुष्मान आरोग्य शिविर: देशभर के 1.8 लाख (1,80,000) आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गुणवत्तापूर्ण जाँच सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं।
- स्मारक सिक्का एवं डाक टिकट: सरकार 10वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का डाक टिकट जारी करेगी।

- विशेष अस्पताल सत्र: सभी जिला अस्पतालों एवं ‘फर्स्ट रेफरल यूनिट’ (first referral units- FRUs) में विशेष स्वास्थ्य अभियान आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नियमित जाँच से वंचित महिलाओं को पुनः इनमे जोड़ा जा सके।

‘PMSMA’ एवं ‘विस्तारित PMSMA’ के बारे में: (UPSC CSE प्रारंभिक परीक्षा 2024)
वर्ष 2016 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का उद्देश्य संपूर्ण देश में गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व देखभाल प्रदान करना है।
- PMSMA योजना के मुख्य बिंदु
- माह की 9 तारीख का नियम: प्रत्येक माह की 9 तारीख को निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को निश्चित दिवस पर, सुनिश्चित एवं पूर्णतः निःशुल्क प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) प्रदान की जाती है।
- केयर पैकेज: यह एक सिंगल-विंडो प्रणाली के माध्यम से सेवाओं का समेकित पैकेज प्रदान करता है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा क्लिनिकल जाँच, आवश्यक प्रयोगशाला परीक्षण (रक्त एवं मूत्र), अल्ट्रासाउंड जाँच, निःशुल्क दवाएँ तथा प्रसवपूर्व तैयारी से संबंधित परामर्श शामिल हैं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी: निजी क्षेत्र के प्रसूति विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं रेडियोलॉजिस्ट स्वेच्छा से वर्ष में 12 दिन सरकारी संस्थानों में सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को ‘‘आई प्लेज फॉर 9’ अचीवर्स अवॉर्ड्स या पुरस्कार के द्वारा सम्मानित किया जाता है।
- उद्देश्य: ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (PMSMA), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य + पोषण (RMNCAH+N) रणनीति के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करता है।
- यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक गर्भवती महिला को दूसरी या तीसरी तिमाही में कम-से-कम एक बार चिकित्सक/विशेषज्ञ द्वारा जाँच प्राप्त हो।
- प्रसवपूर्व जाँचों के दौरान देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करना।
- उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (HRP) की प्रारंभिक अवस्था में पहचान एवं प्रबंधन करना।
- प्रत्येक गर्भवती महिला के लिए उपयुक्त प्रसव योजना एवं जटिलताओं हेतु तैयारी सुनिश्चित करना।
- कुपोषण से ग्रस्त महिलाओं के उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करना।
- किशोरावस्था एवं प्रारंभिक गर्भधारण पर विशेष ध्यान देना।
- मुख्य विशेषताएँ
- प्रत्येक माह की 9 तारीख को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में मासिक प्रसवपूर्व जाँचें आयोजित की जाती हैं।

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- सेवाएँ ओबीजीवाई विशेषज्ञों, रेडियोलॉजिस्ट एवं चिकित्सकों द्वारा प्रदान की जाती हैं, जिसमें निजी क्षेत्र का सहयोग भी शामिल होता है।
- प्रत्येक महिला के लिए न्यूनतम सेवा पैकेज: आवश्यक जाँचें (जिसमें दूसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड शामिल है) तथा दवाएँ (आईएफए, कैल्शियम) शामिल हैं।
- सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सेवाओं एवं जाँचों के लिए सिंगल विंडो प्रणाली।
- विशेष ध्यान
- पंजीकृत न हुई या प्रसव-पूर्व जाँच (ANC) से वंचित महिलाएँ
- ड्रॉपआउट महिलाएँ
- उच्च जोखिम युक्त गर्भावस्थाएँ।
- मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड तथा सुरक्षित मातृत्व पुस्तिकाओं का वितरण।

- कलर स्टिकर के माध्यम से उच्च जोखिम ट्रैकिंग: आपात स्थितियों की प्रारंभिक पहचान हेतु चिकित्सक 25 विभिन्न उच्च जोखिम कारकों (जैसे गंभीर एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह या गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप) की जाँच करते हैं।
- स्वास्थ्यकर्मी रोगी के मातृ एवं शिशु सुरक्षा (MCP) कार्ड पर संबंधित कलर-कोडिड स्टिकर चिपकाते हैं:
| स्टिकर का रंग |
क्लिनिकल वर्गीकरण |
| 🟢 हरा स्टिकर |
कोई जोखिम कारक न पाए जाने पर सामान्य गर्भावस्था। |
| 🔴 लाल स्टिकर |
उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP), जिसमें कड़ी निगरानी की आवश्यकता होती है। |
| 🔵नीला स्टिकर |
उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से जटिल गर्भावस्था। |
| 🟡 पीली स्टिकर |
हाइपोथायरॉइडिज्म या मलेरिया जैसी अन्य बीमारियों के साथ होने वाली गर्भावस्था। |
- विस्तारित PMSMA (प्रारंभ 2022)
- फॉलो-अप ट्रैकिंग: मासिक सत्रों के बीच उच्च जोखिम मामलों की सुरक्षा हेतु इसे प्रारंभ किया गया है, जो प्रत्येक लाल-स्टिकर रोगी के लिए सुरक्षित प्रसव तक अतिरिक्त, विशेषीकृत ANC विजिट तथा निरंतर निगरानी सुनिश्चित करता है।
- वित्तीय प्रोत्साहन: लाभार्थी को यात्रा व्यय की पूर्ति हेतु अधिकतम तीन अतिरिक्त फॉलो-अप विजिट के लिए प्रति विजिट ₹100 प्रदान किए जाते हैं। आशा कार्यकर्ताओं को ट्रैकिंग के लिए प्रति विजिट ₹100 तथा प्रसव के 45 दिन बाद माँ और शिशु दोनों के स्वस्थ परिणाम को सुनिश्चित करने पर अतिरिक्त ₹500 प्रदान किए जाते हैं।
- डिजिटल अलर्ट: रोगी एवं उनके स्थानीय आशा कार्यकर्ता को आगामी क्लिनिक तिथियों के संबंध में स्वचालित SMS रिमाइंडर भेजे जाते हैं।
- ई-PMSMA की प्रमुख विशेषताएँ
- उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (HRP) की नाम-आधारित सूची तैयार करना।
- अतिरिक्त PMSMA सत्रों की व्यवस्था (एक माह में अधिकतम 4 बार)।
- प्रत्येक उच्च जोखिम गर्भावस्था का व्यक्तिगत रूप से ट्रैकिंग करना, जब तक कि स्वस्थ परिणाम प्राप्त न हो जाए (प्रसव के 45वें दिन तक)।
- लाभार्थी तथा आशा कार्यकर्ता दोनों को उच्च जोखिम गर्भावस्था के पंजीकरण एवं फॉलो-अप विजिट हेतु एसएमएस अलर्ट भेजना।
वर्तमान कवरेज एवं उपलब्धियाँ
- विशाल लाभार्थी आधार: अपनी 10 वर्षीय यात्रा के दौरान इस योजना ने देशभर में 7.50 करोड़ (75 मिलियन) से अधिक गर्भवती महिलाओं को नियमित ANC जाँचों के अतिरिक्त निःशुल्क एवं समग्र प्रसवपूर्व सेवाएँ सफलतापूर्वक प्रदान की हैं।
- विस्तृत संस्थागत पहुँच: योजना के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व सेवाएँ अब व्यापक रूप से विकेंद्रीकृत हैं और देशभर में 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से सक्रिय रूप से प्रदान की जा रही हैं।
- सभी जिला अस्पतालों, उप-जिला अस्पतालों तथा निर्धारित FRUs में नियमित रूप से विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं।

- प्रारंभिक उच्च जोखिम पहचान: 25 जोखिम कारकों की जाँच के माध्यम से लाखों उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (HRPs) की सफलतापूर्वक पहचान की गई है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील माताओं की सूची तैयार कर उन्हें प्रसव से पहले ही विशेष देखभाल से जोड़ने में सहायता मिली है।
- सफल सार्वजनिक-निजी भागीदारी: निजी क्षेत्र के हजारों प्रसूति विशेषज्ञ, स्त्रीरोग विशेषज्ञ एवं रेडियोलॉजिस्ट स्वेच्छा से जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की कमी को प्रभावी रूप से पूरा किया गया है।
- राष्ट्रीय संकेतकों पर प्रत्यक्ष प्रभाव: अनियमित जाँचों को एक निश्चित एवं संरचित देखभाल प्रणाली में परिवर्तित करके इस योजना ने भारत के मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 43 अंकों की कमी लाने में प्रमुख भूमिका निभाई है, जो 130 प्रति लाख जीवित जन्म (2014–16) से घटकर 87 प्रति लाख जीवित जन्म (2022–24) हो गया है।
मातृ स्वास्थ्य क्यों महत्त्वपूर्ण है एवं एमएमआर क्या है?
- राष्ट्र की आधारशिला: सुरक्षित गर्भावस्था और स्वस्थ प्रसव सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य की मूल आधारशिला है।
- अप्रबंधित गर्भकालीन जटिलताएँ ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर दबाव डालती हैं और जीवन के लिए जोखिम उत्पन्न करती हैं।

- मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): यह एक आधिकारिक सांख्यिकीय सूचकांक है, जो गर्भावस्था या प्रसव से संबंधित कारणों से प्रति 1 लाख (1,00,000) जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु की संख्या को दर्शाता है।
- आधारभूत चुनौती: वर्ष 2014–16 की आधार अवधि में भारत का एमएमआर 130 प्रति लाख जीवित जन्म था, जो एक उच्च स्तर था। इससे संरचित चिकित्सा देखभाल स्थापित करने की राष्ट्रीय आवश्यकता उत्पन्न हुई, ताकि संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत वर्ष 2030 तक वैश्विक एमएमआर को 70 से कम करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
- प्रगति: वर्ष 2014–16 की आधार अवधि और हाल की वर्ष 2022–24 रिपोर्टिंग अवधि के बीच भारत ने एमएमआर में 43 अंकों की कमी हासिल की है, जिससे यह अनुपात 130 से घटकर 87 हो गया है।
अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के साथ समन्वय
PMSMA को व्यापक प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) रणनीति के अंतर्गत एकीकृत किया गया है:
- जननी सुरक्षा योजना (JSY): यह एक सुरक्षित मातृत्व हस्तक्षेप है, जो संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने हेतु नकद प्रोत्साहन प्रदान करता है और 11.96 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभान्वित कर चुका है। (UPSC CSE Prelims 2012)
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): इसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और बीमार शिशुओं को 100% निःशुल्क दवाएँ, जाँच, आहार एवं परिवहन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे व्यक्तिगत खर्च शून्य हो जाता है। इससे 18.05 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिली है।
- सुमन पहल: सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN) योजना सेवा से इनकार के प्रति शून्य सहनशीलता सुनिश्चित करती है और 99,290 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करती है।
- लक्ष्य एवं PMMVY: लक्ष्य पहल प्रसव कक्षों एवं मातृत्व ऑपरेशन थिएटरों में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करती है, जबकि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) आंशिक वेतन क्षतिपूर्ति एवं पोषण के लिए प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण प्रदान करती है।
क्रियान्वयन में प्रमुख चुनौतियाँ
- मातृ स्वास्थ्य में क्षेत्रीय असमानताएँ: असम, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भौगोलिक बाधाओं, गरीबी तथा कमजोर स्वास्थ्य अवसंरचना के कारण मातृ मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है।
- चिकित्सीय विशेषज्ञों की कमी: अनेक ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) में आपात मातृ देखभाल हेतु आवश्यक प्रसूति विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ एवं एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।
- अप्रत्याशित गर्भावस्था जटिलताएँ: कुछ महिलाएँ प्रारंभ में निम्न-जोखिम श्रेणी में होने के बावजूद बाद में अचानक जटिलताओं का सामना करती हैं, जिससे मासिक जाँच आधारित निगरानी की सीमाएँ स्पष्ट होती हैं।
- अंतिम चरण परिवहन समस्याएँ: दूरस्थ या जनजातीय क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाने में देरी, रोके जा सकने वाले मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
- जागरूकता एवं फॉलो-अप में असमानता: कुछ क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, कुपोषण, सामाजिक बाधाएँ तथा अनियमित ‘फॉलो-अप विजिट’ योजना की प्रभावशीलता को कम करते हैं।
आगे की राह
- निरंतर डिजिटल निगरानी: केवल मासिक जाँचों पर निर्भर रहने के बजाय उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग मोबाइल अनुप्रयोगों एवं क्लाउड-आधारित स्वास्थ्य अभिलेखों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
- विशेषज्ञों का बेहतर वितरण: प्रथम संदर्भ इकाइयों (FRUs) तथा ग्रामीण अस्पतालों को सुदृढ़ करते हुए प्रशिक्षित स्त्रीरोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ एवं एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की उपलब्धता बढ़ाई जाए।
- गतिशील जोखिम स्क्रीनिंग: ANMs एवं आशा कार्यकर्ताओं को अधिक बार सामुदायिक स्तर पर जाँच करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि तेजी से विकसित होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान हो सके।
- आपातकालीन परिवहन में सुधार: एंबुलेंस सेवाओं को GPS-आधारित ट्रैकिंग एवं गाँव-स्तरीय आशा नेटवर्क से जोड़कर आपात स्थितियों में देरी को कम किया जाए।
- सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि: पोषण, संस्थागत प्रसव, नियमित प्रसवपूर्व देखभाल तथा गर्भावस्था के दौरान खतरे के संकेतों के संबंध में जागरूकता अभियानों का विस्तार किया जाए, विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों में।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने नियमित जोखिम जाँच एवं संस्थागत देखभाल के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में महत्त्वपूर्ण सुधार किया है। डिजिटल निगरानी को सुदृढ़ करना, विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना तथा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना भारत में सुरक्षित एवं सार्वभौमिक मातृत्व प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।