संदर्भ
केंद्र सरकार एक विशाल ₹1.25 लाख करोड़ के ग्रामीण विकास परिवर्तन की शुरुआत कर रही है, जिसके अंतर्गत नया ‘विकसित भारत GRAMG’ ढांचा लागू किया जा रहा है, जो 1 जुलाई, 2026 से पुरानी मनरेगा (MGNREGA) प्रणाली को पूरी तरह प्रतिस्थापित करेगा।
मुख्य बिंदु
- अत्यधिक वित्तीय प्रवाह: कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹95,692 करोड़ का अंतरिम पैकेज जारी किया। मौजूदा निधियों के साथ मिलाकर कुल पूँजी ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक हो जाती है।
- ग्राम स्तर पर प्रत्यक्ष वित्त पोषण: संपूर्ण पूँजी लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक सीधे पहुँचेगी, जिससे प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थानीय परिसंपत्ति निर्माण हेतु उचित वित्त उपलब्ध होगा।
विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान
यह विधेयक योजना को रणनीतिक अभिसरण और साझा शासन के सिद्धांतों के आधार पर पुनर्गठित करता है:
- गारंटी में वृद्धि: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों का श्रम रोजगार सुनिश्चित किया गया है।
- वित्तीय दायित्व में परिवर्तन: योजना का वित्तीय बोझ अब पूर्णतः केंद्र आधारित मॉडल से हटकर केंद्र प्रायोजित योजना में बदल दिया गया है, जिसमें साझा जिम्मेदारी होगी:
- 60:40 केंद्र-राज्य भागीदारी (अधिकांश राज्यों के लिए)।
- 90:10केंद्र-राज्य भागीदारी (पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर) के लिए।
- आवंटन मॉडल: मांग-आधारित ‘लेबर बजट’ को हटाकर, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राज्य-वार मानक आवंटन प्रणाली लागू की गई है।
- कार्य का अनिवार्य स्थगन: राज्यों को अधिकार दिया गया है कि वे वित्तीय वर्ष में अधिकतम 60 दिनों की अवधि (बुवाई/कटाई जैसे कृषि के चरम समय) के दौरान योजना कार्यों को रोक सकें, ताकि श्रम की कमी न हो।
- रणनीतिक परिसंपत्तियों पर ध्यान: कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक के अनुरूप होना होगा, जिसमें चार प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:
- जल सुरक्षा
- मुख्य ग्रामीण अवसंरचना
- आजीविका संबंधी अवसंरचना
- चरम मौसम घटनाओं का शमन
- डिजिटल एकीकरण: GIS आधारित उपकरण, पीएम गति शक्ति लेयर्स और AI ऑडिट का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
- बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान बरकरार: यदि आवेदन के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान जारी रखा गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के बारे में: (UPSC CSE Prelims- 2011)
- MGNREGA विश्व का सबसे बड़ा रोजगार गारंटी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसके तहत प्रत्येक वर्ष कम-से-कम 100 दिनों का रोजगार प्रदान किया जाता है उन ग्रामीण परिवारों को, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हों।
- प्रारंभ: MGNREGA को वर्ष 2005 में अधिनियमित किया गया और यह 2 फरवरी, 2006 से लागू हुआ।
- यह एक अधिकार-आधारित ढाँचा है, जो ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार को उत्तरदायी बनाता है।
- क्रियान्वयन: इस योजना को ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से लागू किया जाता है।
- MGNREGA के अंतर्गत परियोजनाओं की योजना निर्माण और क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों का चयन सुनिश्चित होता है।
- वित्तीय संरचना
- MGNREGA का वित्तपोषण मुख्यतः केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है, जो अकुशल श्रम की लागत का 100% और सामग्री लागत का 75% वहन करती है।
- राज्य सरकारों का योगदान: राज्य सरकारें शेष 25% सामग्री लागत वहन करती हैं तथा यदि माँग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोज़गारी भत्ता देने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होती है।
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मनरेगा बनाम VB-G RAM G के बीच तुलना
| विशेषता |
मनरेगा (अधिकार-आधारित) |
VB-G RAM G (विकास-उन्मुख) |
| मुख्य दर्शन |
न्यायसंगत कानूनी अधिकार |
सशर्त गारंटीकृत सेवा |
| गारंटी दिवस |
100 दिन/परिवार/वर्ष |
125 दिन/परिवार/वर्ष (वैधानिक) |
| मजदूरी के लिए वित्तपोषण |
100% केंद्र सरकार |
60:40 केंद्र-राज्य (सामान्य राज्यों में) |
| बजट मॉडल |
मांग-आधारित (खुली प्रतिबद्धता) |
मानक आवंटन (केंद्र द्वारा निर्धारित वार्षिक सीमा) |
| कार्य अवरोध |
नहीं (वर्ष भर काम का अधिकार) |
अधिकतम 60 दिन (कृषि के चरम समय में) |
| डिजिटल/प्रौद्योगिकी एकीकरण |
मजदूरी भुगतान हेतु आधार/DBT का मूल उपयोग |
योजना, क्रियान्वयन और लेखा-परीक्षण हेतु अनिवार्य बायोमेट्रिक, GIS/AI |