BCCI, RTI के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है

20 May 2026

संदर्भ

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने निर्णय दिया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत “लोक प्राधिकारी” (पब्लिक अथॉरिटी) नहीं है।

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की मुख्य टिप्पणियाँ

  • कोई ठोस सरकारी नियंत्रण नहीं: CIC ने पाया कि BCCI अपने प्रशासन, वित्त या प्रबंधन पर ‘गहन और व्यापक’ सरकारी नियंत्रण के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
  • RTI अधिनियम के तहत लोक प्राधिकारी नहीं: आयोग ने माना कि BCCI, RTI अधिनियम की धारा 2(h) को संतुष्ट नहीं करता है क्योंकि यह न तो संविधान द्वारा स्थापित है और न ही सरकारी धन द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तपोषित है।
    • RTI अधिनियम की धारा 2(h) एक “लोक प्राधिकारी” को संविधान द्वारा, संसद/राज्य विधानमंडल के कानूनों द्वारा, या सरकारी अधिसूचना द्वारा स्थापित स्वशासन के किसी भी निकाय या संस्थान के रूप में परिभाषित करती है।
    • यह कानूनी रूप से इन संस्थाओं को जानकारी का खुलासा करने और नागरिकों के अनुरोधों का जवाब देने के लिए बाध्य करता है।
  • स्वायत्त निजी निकाय: BCCI को तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1975 के तहत पंजीकृत एक निजी स्वायत्त संगठन के रूप में मान्यता दी गई थी।
  • सार्वजनिक कार्य स्वचालित रूप से RTI को आमंत्रित नहीं करते: CIC ने स्पष्ट किया कि क्रिकेट प्रबंधन जैसे सार्वजनिक कार्यों को करने से कोई संगठन RTI ढाँचे के तहत स्वचालित रूप से “लोक प्राधिकारी” नहीं बन जाता है।

BCCI के बारे में

  • BCCI क्रिकेट के लिए भारत का राष्ट्रीय शासी निकाय (गवर्निंग बॉडी) है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से संबद्ध है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना 10 दिसंबर, 1928 को हुई थी और इसका मुख्यालय वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में है।
  • संगठनात्मक संरचना: BCCI राज्य क्रिकेट संघों द्वारा सामान्य सभा और शीर्ष परिषद के माध्यम से शासित होता है, जिसमें पदाधिकारी और खिलाड़ियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • मुख्य भूमिकाएँ: BCCI भारत की पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट टीमों का प्रबंधन करता है, रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट आयोजित करता है और IPL व WPL जैसे व्यावसायिक आयोजनों का संचालन करता।
  • वैश्विक प्रभाव: BCCI को वैश्विक स्तर पर सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड माना जाता है और यह आईसीसी (ICC) के कार्यक्रम निर्धारण, प्रसारण और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।

BCCI की स्थिति पर न्यायिक उदाहरण

  • जी टेलीफिल्म्स लिमिटेड बनाम भारत संघ (2005): सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि गहन सरकारी नियंत्रण की अनुपस्थिति के कारण BCCI अनुच्छेद-12 के तहत “राज्य” (State) नहीं है।
    • अनुच्छेद-12 ‘राज्य’ शब्द को परिभाषित करता है, जिसमें भारत सरकार और संसद, राज्य सरकारें और सभी स्थानीय एवं अन्य प्राधिकारी शामिल हैं।
  • BCCI बनाम बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (2015): न्यायालय ने निर्णय दिया कि हालाँकि BCCI “राज्य” नहीं है, फिर भी इसे अनुच्छेद-226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र के अधीन किया जा सकता है क्योंकि यह सार्वजनिक कार्य करता है।
  • BCCI बनाम बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (2018): सर्वोच्च न्यायालय ने पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए शासन सुधारों और लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया।
  • थलाप्पलम को-ऑपरेटिव बैंक बनाम केरल राज्य (2013): न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल सार्वजनिक कार्य ही किसी संस्थान को “लोक प्राधिकारी” नहीं बनाते हैं, जब तक कि ठोस सरकारी वित्तपोषण या नियंत्रण मौजूद न हो।
  • BCCI बनाम दीपक कंसल (2026): सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए BCCI के विशेष अधिकार की पुष्टि की।

BCCI के संबंध में मुख्य सिफारिशें और घटनाक्रम

  • लोढ़ा समिति (2015): सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति ने पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को RTI अधिनियम के तहत लाने की सिफारिश की थी।
    • समिति ने कूलिंग-ऑफ अवधि, निश्चित कार्यकाल सीमा और मंत्रियों व सरकारी अधिकारियों के BCCI पदों पर रहने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया था।
    • समिति ने हितों के टकराव को कम करने के लिए IPL शासन को नियमित BCCI प्रशासन से अलग करने की सिफारिश की थी।
  • भारतीय विधि आयोग (275वीं रिपोर्ट): विधि आयोग ने BCCI को उसके सार्वजनिक कार्यों और राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की भूमिका के कारण RTI अधिनियम के तहत “लोक प्राधिकारी” के रूप में वर्गीकृत करने की सिफारिश की थी।
    • रिपोर्ट में कहा गया था कि BCCI को रिट अधिकार क्षेत्र के तहत न्यायिक समीक्षा के अधीन रहना चाहिए क्योंकि यह सार्वजनिक हित को प्रभावित करने वाले कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने BCCI को एक निजी स्वायत्त निकाय के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखते हुए एक राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में आधिकारिक मान्यता दी।
    • इस अधिनियम के तहत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को क्रिकेट के लिए शीर्ष NSF के रूप में कार्य करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय खेल बोर्ड से औपचारिक मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है।
  • वर्ष 2025 के अधिनियम के तहत RTI से छूट: अधिनियम ने स्पष्ट किया कि केवल प्रत्यक्ष सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले खेल निकाय ही RTI अधिनियम के दायरे में आएँगे, जिससे BCCI को छूट मिल गई।
    • RTI छूट के बावजूद, 2025 का अधिनियम BCCI के लिए राष्ट्रीय खेल बोर्ड से मान्यता प्राप्त करना और नैतिक व सुरक्षित-खेल मानकों का पालन करना अनिवार्य बनाता है।

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के बारे में

  • CIC एक वैधानिक और अर्द्ध-न्यायिक निकाय है, जिसकी स्थापना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत RTI से संबंधित शिकायतों और अपीलों का निपटारा करने के लिए की गई थी।
  • संरचना और बनावट: इसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्त होते हैं।
  • नियुक्ति: सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है; इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
  • पात्रता: सदस्यों के पास कानून, शासन, पत्रकारिता, विज्ञान, प्रशासन या समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता होनी चाहिए।
  • पद से हटाना: सर्वोच्च न्यायालय की जाँच और सिफारिश के बाद, राष्ट्रपति, सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता जैसे आधारों पर CIC सदस्यों को पद से हटा सकते हैं।
  • शक्तियाँ और कार्य: CIC RTI अपीलों की सुनवाई करता है, सूचना के प्रकटीकरण का निर्देश देता है, RTI के कार्यान्वयन की निगरानी करता है और सार्वजनिक प्राधिकरणों में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

BCCI का निर्णय उन संस्थाओं में संस्थागत स्वायत्तता, सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के बीच चल रही संवैधानिक बहस को उजागर करता है, जो महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य करती हैं।

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