संदर्भ
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) दिशा-निर्देश, 2026 को सहभागी एवं परिणाम-उन्मुख विद्यालय शासन को सुदृढ़ करने हेतु प्रारंभ किया।
विद्यालय प्रबंधन समिति के बारे में
- विद्यालय प्रबंधन समिति एक वैधानिक निकाय है, जिसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य विद्यालय शासन का विकेंद्रीकरण, जवाबदेही में वृद्धि तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।
- कानूनी आधार: यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के अनुरूप ढाँचे पर आधारित है।
- जारीकर्ता: शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के अंतर्गत जारी।
- नीतिगत संरेखण: यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा समग्र शिक्षा अभियान के साथ विद्यालय प्रशासन को संरेखित करता है।
- कवरेज: यह बालवाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यालयों पर एक एकीकृत SMC ढाँचे के माध्यम से लागू होता है।

विद्यालय प्रबंधन समिति दिशा-निर्देश, 2026 के बारे में
- SMC दिशा-निर्देश 2026 एक व्यापक राष्ट्रीय ढाँचा प्रदान करते हैं, जो विद्यालय प्रबंधन समितियों के कार्यों, शक्तियों और उत्तरदायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
- ये दिशा-निर्देश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक सामान्य संदर्भ के रूप में कार्य करते हैं, ताकि वे अपने-अपने नियमों और प्रथाओं को समावेशी, सहभागी, पारदर्शी एवं जवाबदेह विद्यालय शासन के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के अनुरूप संरेखित कर सकें।
नए दिशा-निर्देशों की आवश्यकता
- शासन के दायरे का विस्तार: पूर्व में SMC मुख्यतः अनुदान, अवसंरचना तथा प्रशासनिक पर्यवेक्षण तक सीमित थे।
- अधिगम परिणामों पर ध्यान: नई चुनौतियों में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, विद्यार्थी कल्याण, समावेशन, मानसिक स्वास्थ्य तथा डिजिटल पारदर्शिता शामिल हैं।
- सामुदायिक सहभागिता: अभिभावकों, पूर्व छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों तथा स्थानीय समुदायों की शिक्षा शासन में अधिक सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन: यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने हेतु एक संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।
SMC दिशा-निर्देश 2026 के प्रमुख प्रावधान
- एकीकृत SMC संरचना: बालवाटिका से कक्षा 12 तक सभी स्तरों के लिए एक एकल विद्यालय प्रबंधन समिति।
- प्रतिनिधिक सदस्यता संरचना: कुल सदस्यता का 75% अभिभावक एवं संरक्षक होते हैं, जिससे सशक्त सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित होती है।
- शेष 25% में शिक्षक, स्थानीय प्राधिकरण के प्रतिनिधि, शिक्षाविद् तथा आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जैसे अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता शामिल होते हैं।
- समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना: विद्यालय प्रबंधन समितियों में कम-से-कम 50% सदस्य महिलाएँ होंगी, ताकि लैंगिक संतुलन सुनिश्चित हो सके।
- साथ ही सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों तथा विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के अभिभावकों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।
- परिभाषित उत्तरदायित्व: SMC सदस्यों तथा सदस्य सचिव के कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- विद्यालय विकास योजना का निर्माण: SMC को तीन वर्षीय विद्यालय विकास योजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
- इस योजना में तीन वार्षिक उप-योजनाएँ शामिल होंगी, जिनका उद्देश्य अवसंरचना एवं शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करना है।
- विशेषीकृत समितियों के माध्यम से समर्थन: SMC को बेहतर कार्य निष्पादन हेतु विशेष उप-समितियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है।
- इनमें विद्यालय भवन समिति (अवसंरचना विकास हेतु) तथा शैक्षणिक समिति (अधिगम परिणामों की निगरानी हेतु) शामिल हैं।
- वित्तीय निगरानी एवं प्रशासनिक अधिकार: SMC विद्यालयों को आवंटित सरकारी अनुदानों के उपयोग की निगरानी करती है।
- इन्हें ₹30 लाख तक की लागत वाले सिविल कार्यों को निष्पादित करने का अधिकार भी प्राप्त है।
- अधिगम परिणामों की निगरानी: उपस्थिति, शिक्षक सहभागिता तथा विद्यार्थी अधिगम उपलब्धियों की निगरानी को प्रोत्साहित किया गया है।
- पारदर्शिता एवं सामाजिक अंकेक्षण: वित्तीय निगरानी, विद्यालय विकास योजना तथा समुदाय-आधारित सामाजिक अंकेक्षण को सुदृढ़ किया गया है।
- समग्र-सरकार दृष्टिकोण: विद्यांजलि, इको-क्लब, उल्लास, प्रशस्त ऐप तथा आपदा तैयारी जैसी पहलों का एकीकरण किया गया है।
दिशा-निर्देशों का महत्त्व
- जमीनी स्तर पर शासन को सुदृढ़ करना: SMC को सामुदायिक-आधारित शैक्षिक शासन संस्थाओं में रूपांतरित करता है।
- मूलभूत अधिगम को सुदृढ़ करना: मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता तथा कक्षा-स्तरीय परिणामों में सुधार का समर्थन करता है।
- सहभागी लोकतंत्र को बढ़ावा देना: स्थानीय स्वामित्व तथा विकेंद्रीकृत निर्णय-निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
- समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ाना: समानता, बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य तथा संवेदनशील विद्यार्थियों के समावेशन पर ध्यान केंद्रित करता है।
- विकसित भारत 2047 का समर्थन: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुधारों को भारत के दीर्घकालिक मानव पूँजी विकास लक्ष्यों से जोड़ता है।
निष्कर्ष
SMC दिशा-निर्देश 2026 का उद्देश्य विद्यालयों को सामुदायिक-प्रेरित संस्थाओं में रूपांतरित करना है, जो समावेशी, जवाबदेह और परिणाम-उन्मुख शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप समर्थन प्रदान करें।