संदर्भ
हाल ही में केंद्र सरकार ने एक पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ से उत्पन्न अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करना तथा उनके राष्ट्रीय सुरक्षा एवं जनजातीय समाजों पर प्रभाव का आकलन करना है।

समिति के प्रमुख बिंदु
यह समिति स्थानीय स्तर पर जनसंख्या परिवर्तनों का आकलन करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक एकता की रक्षा हेतु एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने के लिए गठित की गई है।
- मुख्य अधिदेश: समिति अवैध प्रवासन एवं अन्य अस्वाभाविक कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर आकलन करेगी।
- सूक्ष्म डेटा विश्लेषण: समिति धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या वृद्धि एवं परिवर्तित जनसंख्या पैटर्न का विश्लेषण करेगी।
- कार्यान्वयन योग्य समाधान: समिति को इन असंतुलनों को कम करने तथा सीमावर्ती एवं आंतरिक क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना को सुरक्षित करने हेतु नियोजित एवं समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
- बहुआयामी चुनौतियाँ: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रेखांकित किया कि अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन निम्नलिखित क्षेत्रों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं:
- राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता: विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ढाँचे को प्रभावित करता है।
- कानून एवं व्यवस्था: स्थानीय सामाजिक-आर्थिक तनाव एवं प्रशासनिक दबाव उत्पन्न करता है।
- सामाजिक संरचना: पारंपरिक सामुदायिक संरचनाओं एवं सामाजिक गतिशीलता में परिवर्तन लाता है।
- जनजातीय समाज का संरक्षण: स्वदेशी एवं जनजातीय समुदायों के विशिष्ट सांस्कृतिक, भाषायी एवं भू-अधिकारों के लिए खतरा उत्पन्न करता है।
जनसांख्यिकी एवं संवैधानिक ढाँचे के बारे में
- संवैधानिक क्षेत्राधिकार
- जनगणना एवं जनसांख्यिकी: “जनगणना” का विषय भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 69 के अंतर्गत आता है।
- नागरिकता एवं प्रवासन: नागरिकता, देशीयकरण एवं विदेशी नागरिकों से संबंधित विषय संसद के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं। (संघ सूची की प्रविष्टि 17 एवं 19)।
- घुसपैठ से संबंधित प्रमुख कानून: विदेशी नागरिकों के अवैध प्रवेश एवं अवैध रूप से ठहरने को निम्नलिखित घरेलू कानूनों द्वारा विनियमित किया जाता है, जैसे: विदेशी अधिनियम, 1946, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920।
- जनजातीय क्षेत्रों पर प्रभाव: संविधान की पाँचवीं एवं छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में अनियंत्रित जनसांख्यिकीय परिवर्तन स्थानीय स्वशासन, जनजातीय भूमि संरक्षण प्रावधानों तथा स्वायत्त जिला परिषदों की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।