सार्थक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (SARTHAK-PDS) योजना
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2031 तक के कार्यान्वयन हेतु सार्थक-पीडीएस (SARTHAK-PDS) योजना को ₹25,530 करोड़ के केंद्रीय परिव्यय के साथ मंजूरी प्रदान की है।
सार्थक-पीडीएस (SARTHAK-PDS) योजना के बारे में
- सार्थक-पीडीएस (SARTHAK-PDS) योजना अर्थात् ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली में स्वचालन के साथ राशन परिवहन एवं प्रबंधन सहायता योजना’ एक अंब्रेला योजना है, जिसे वित्तीय सहायता तथा प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के क्रियान्वयन को सुदृढ़ बनाने के लिए तैयार किया गया है।
- यह योजना खाद्यान्न वितरण सहायता को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के उन्नत डिजिटल आधुनिकीकरण के साथ एकीकृत करती है।
- उद्देश्य
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों तक सब्सिडी युक्त खाद्यान्नों की अंतिम छोर तक कुशल और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- खाद्यान्न रिसाव को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना, शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करना तथा एक बुद्धिमान और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके राशन वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण करना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: यह योजना उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा कार्यान्वित की जाएगी।
सार्थक-पीडीएस योजना के घटक
- NFSA के अंतर्गत खाद्यान्नों के राज्य के भीतर परिवहन तथा उचित मूल्य दुकान (FPS) डीलरों के मार्जिन हेतु राज्य एजेंसियों को सहायता करना।
- इस घटक के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को राज्य के भीतर खाद्यान्नों के परिवहन, हैंडलिंग (प्रबंधन) और वितरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- इसके अतिरिक्त, उचित मूल्य दुकान (Fair Price Shop- FPS) डीलरों को डीलर मार्जिन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि राशन दुकानों का संचालन आर्थिक रूप से व्यवहार्य एवं सतत् बना रहे।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण एवं सुधार योजना;
- यह घटक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में डिजिटलीकरण तथा प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर केंद्रित है।
- इसके अंतर्गत आधार सीडिंग, ई-पीओएस (e-PoS) उपकरणों, ऑनलाइन आवंटन प्रणालियों, कंप्यूटरीकृत आपूर्ति-शृंखला प्रबंधन तथा रियल-टाइम निगरानी को बढ़ावा दिया जाता है।
- यह योजना एकीकृत डेटाबेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शिकायत निवारण प्रणाली, राज्य कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा ISO-प्रमाणित परिचालन ढाँचे की स्थापना का भी प्रस्ताव करती है।
- महत्त्व
- सार्थक-पीडीएस राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
- यह योजना डिजिटल शासन के माध्यम से कल्याणकारी सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ावा देती है।
- यह ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ (ONORC) की परिकल्पना को समर्थन प्रदान करती है तथा भारत की प्रौद्योगिकी-सक्षम सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाती है।
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हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित ट्रेन
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हाल ही में भारतीय रेल ने हरियाणा के जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन के संचालन को मंजूरी प्रदान की है।
हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन के बारे में
- हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन एक शून्य-उत्सर्जन रेल प्रणाली है, जो डीजल इंजनों के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है।
- विकसितकर्ता: भारतीय रेल द्वारा अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) के माध्यम से विकसित।
- हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख विशेषताएँ
- यह ट्रेन रासायनिक ऊर्जा उत्पादन तथा वैद्युत-रासायनिक रूपांतरण के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है।
- रासायनिक ऊर्जा उत्पादन: ट्रेन में संगृहीत संपीडित हाइड्रोजन गैस को विशेष फ्यूल-सेल स्टैक के अंतर्गत ऑक्सीजन के साथ मिश्रित किया जाता है।
- वैद्युत-रासायनिक रूपांतरण: एक वैद्युत-रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ये गैसें फ्यूल-सेल की आंतरिक झिल्ली से होकर गुजरती हैं, जहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु संयोजित होकर निरंतर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन करते हैं।
- स्वच्छ ऊर्जा आधारित प्रणोदन: 1,200 किलोवाट की प्रणोदन प्रणाली, ट्रेन को शक्ति प्रदान करती है तथा उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प और ऊष्मा का उत्सर्जन करती है।
- परिचालन गति: 10-कोच वाली यह ट्रेन प्रारंभिक तैनाती चरण में अधिकतम 75 किमी./घंटा की गति से संचालित होने के लिए डिजाइन की गई है।
- ‘इंडीजीनियस रीफ्यूलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर’: परिचालन सहायता के लिए जींद स्टेशन पर समर्पित हाइड्रोजन भंडारण, संपीडन और रीफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है।
- सुरक्षा तंत्र: परियोजना में हाइड्रोजन रिसाव डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर, सुरक्षा ऑडिट तथा प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था शामिल है, जिससे सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
- रखरखाव एवं निगरानी: भारतीय रेल स्वीकृत परिचालन प्रोटोकॉल के अंतर्गत 24×7 निगरानी तथा विशेष रखरखाव सुविधाओं की व्यवस्था करेगी।
- महत्त्व: यह परियोजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाती है तथा हाइड्रोजन-आधारित सतत् रेल परिवहन की दिशा में कार्य करने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में भारत को स्थापित करती है।
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मिशन क्वीन पाइनएप्पल (Mission Queen Pineapple)

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हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ने त्रिपुरा क्वीन पाइनएप्पल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन क्वीन पाइनएप्पल का शुभारंभ किया।
मिशन के बारे में
- मिशन क्वीन पाइनएप्पल की प्रमुख विशेषताएँ
- अभिसरण-आधारित विकास पहल: त्रिपुरा में अनानास की खेती तथा संपूर्ण मूल्य शृंखला के विकास के लिए ₹236 करोड़ की बहु-मंत्रालयी समन्वय पर आधारित पहल।
- कार्यान्वयन अवधि: इसका क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (2026) से वित्तीय वर्ष 2028 की चौथी तिमाही (2028) तक, कुल तीन वर्षों में किया जाएगा।
- संस्थागत ढाँचा: इस मिशन का नेतृत्व पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) द्वारा किया जाएगा, जिसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों तथा त्रिपुरा सरकार के साथ समन्वय के माध्यम से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
योजना के प्रमुख घटक
- हब-एंड-स्पोक पोस्ट-हार्वेस्ट इकोसिस्टम
- अगरतला हवाई अड्डे के निकट एक केंद्रीय हब की स्थापना और अनानास उत्पादक प्रमुख जिलों में आठ स्पोक संग्रह केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
- प्रसंस्करण अवसंरचना
- व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मॉडल के माध्यम से नलकाटा अनानास प्रसंस्करण इकाई का पुनरुद्धार किया जाएगा।
- जैव-अर्थव्यवस्था और सर्कुलर इकोनॉमी पहल
- अनानास की कृषि से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट (लगभग 60%) का उपयोग बायोमास के रूप में किया जाएगा।
- प्रोत्साहन उपाय
- भौगोलिक संकेतक (GI) संरक्षण एवं व्यावसायीकरण: GI प्राधिकरण कार्यशालाओं का आयोजन, QR-आधारित ट्रेसबिलिटी प्रणाली की स्थापना तथा GI के माध्यम से मुद्रीकरण के लिए ढाँचे का विकास किया जाएगा।
- बाजार संपर्क एवं निर्यात तैयारी: घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच को मजबूत करने हेतु ‘क्रेता-विक्रेता समागम’ और निर्यात करने से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए।
- गुणवत्ता प्रमाणन सहायता: उत्पाद की गुणवत्ता और निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिए ऑर्गेनिक प्रमाणन प्राप्त करने में सहायता प्रदान की जाएगी।
- ब्रांड संवर्द्धन एवं प्रचार: प्रत्येक वर्ष प्रमुख आयोजन के रूप में ‘त्रिपुरा क्वीन पाइनएप्पल फेस्टिवल’ का आयोजन किया जाएगा, जिसे 27 जून को अंतरराष्ट्रीय अनानास दिवस के साथ जोड़ा जाएगा।
त्रिपुरा क्वीन अनानास के बारे में
- यह त्रिपुरा राज्य का राजकीय फल है, जो अपनी विशिष्ट सुगंध, मिठास, रसदार गुण, कम रेशेदार, कठोर छिलके और मजबूत संरचना के लिए जाना जाता है।
- भौगोलिक वितरण: त्रिपुरा भारत के प्रमुख अनानास उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ इसकी खेती मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्रों में फैली हुई है।
- मुख्य किस्में: क्वीन (Queen) किस्म, केव (Kew) किस्म।
- क्वीन किस्म सबसे अधिक प्रसिद्ध और व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, जिसकी खेती मुख्यतः मध्य मई से मध्य सितंबर के बीच की जाती है।
- GI टैग: त्रिपुरा क्वीन अनानास को वर्ष 2015 में भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण प्राप्त हुआ।
- उपयुक्त मिट्टी: यह मुख्यतः लैटेराइट मिट्टी में उगाया जाता है, जो ह्यूमस से भरपूर और कैल्शियम में अपेक्षाकृत कम होती है।
- आदर्श तापमान: यह फसल 15.6°C से 32.2°C के बीच अच्छी तरह विकसित होती है।
- वर्षा की आवश्यकता: इसके लिए लगभग 1000–1500 मिमी. वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है।
- उत्पादन: भारत का सबसे बड़ा अनानास उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल।
- विश्व का सबसे बड़ा अनानास उत्पादक देश: इंडोनेशिया।
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ताइवान बना पाँचवाँ सबसे बड़ा इक्विटी बाजार
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हाल ही में ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बन गया, जिसका प्रमुख कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकी शेयरों में तेजी है।
इक्विटी बाजार पर प्रमुख बिंदु
- बाजार पूँजीकरण: ताइवान का कुल शेयर बाजार पूँजीकरण लगभग $4.95 ट्रिलियन तक पहुँच गया, जिससे उसने भारत के लगभग $4.92 ट्रिलियन के मूल्यांकन को सामान्य अंतर से पीछे छोड़ दिया।
- वैश्विक स्थिति: ताइवान अब विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया है, जो क्रमशः अमेरिका, चीन, जापान, हांगकांग और भारत के बाद आता है।
- विदेशी निवेश प्रवृत्ति: वैश्विक निवेशकों ने लगभग $24 बिलियन मूल्य के भारतीय इक्विटी बेच दिए और पूँजी प्रवाह AI-आधारित टेक्नोलॉजी बाजारों जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर बढ़ रहा है।
- भारत की बाजार चुनौतियाँ: भारतीय शेयर बाजार पर ऊर्जा लागत में वृद्धि, कॉरपोरेट आय में धीमी वृद्धि और उच्च मूल्यांकन जैसी चिंताओं का दबाव रहा।
- ‘MSCI इमर्जिंग मार्केट्स’ भारांक: भारत का हिस्सा MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में लगभग 19% (पिछले वर्ष) से घटकर वर्ष 2026 में लगभग 12% रह गया है।
- आर्थिक तुलना: ताइवान का शेयर बाजार पूँजीकरण भले ही अधिक हो, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था का आकार इससे कहीं बड़ा है, जिसका अनुमानित GDP $4 ट्रिलियन से अधिक है।
ताइवान के उभार के प्रमुख कारण
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम (AI Boom): वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश ने ताइवान के टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया।
- ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) का प्रभुत्व: TSMC, जो दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है, ताइवान के बेंचमार्क स्टॉक इंडेक्स का लगभग 42% हिस्सा बनाती है।
- नेतृत्व: ताइवान की मजबूत सेमीकंडक्टर उत्पादन व्यवस्था ने उसे वैश्विक AI हार्डवेयर सप्लाई चेन के केंद्र में स्थापित किया है।
- टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी: AI चिप्स और उन्नत सेमीकंडक्टर की बढ़ती माँग के कारण TSMC सहित टेक कंपनियों के शेयरों में भारी वृद्धि हुई।
- नियामकीय उदारीकरण: ताइवान के वित्तीय नियामक ने घरेलू फंड्स के निवेश प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे बड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ा।
- पूँजी प्रवाह में वृद्धि: AI आधारित विकास की उम्मीदों और नीतिगत सुधारों के कारण वैश्विक निवेशकों ने ताइवान के बाजार में अधिक पूँजी निवेश की।
- टेक्नोलॉजी-केंद्रित बाजार संरचना: ताइवान का शेयर बाजार मुख्यतः हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर आधारित है, जबकि भारत जैसे उभरते बाजार अधिक विविध हैं।
इक्विटी बाजार (Equity Market) के बारे में
- इक्विटी बाजार एक ऐसा वित्तीय बाजार है, जहाँ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर जारी किए जाते हैं तथा निवेशकों द्वारा खरीदे और बेचे जाते हैं।
- पूंजी निर्माण: इक्विटी बाजार कंपनियों को सार्वजनिक निवेश के माध्यम से दीर्घकालिक पूँजी जुटाने में सहायता करता है, जिसका उपयोग व्यवसाय विस्तार, अवसंरचना विकास और नवाचार के लिए किया जाता है।
- धन सृजन और आर्थिक वृद्धि: यह बाजार निवेश भागीदारी को बढ़ावा देता है, वित्तीय संसाधनों के कुशल आवंटन को सुनिश्चित करता है तथा आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता में योगदान देता है।
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साँची के स्तूप के अवशेष
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हाल ही में भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को साँची के स्तूप से मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में प्रदर्शनी के लिए भेजा गया है।
साँची के स्तूप के अवशेष के बारे में
- साँची में संरक्षित पवित्र अवशेष भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और मौद्गल्यायन से संबंधित हैं।
- दोनों का जन्म प्राचीन मगध राज्य (वर्तमान बिहार, भारत) में स्थित राजगृह के निकट हुआ था। सारिपुत्र अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे।
- वहीं मौद्गल्यायन अपनी अद्भुत आध्यात्मिक शक्तियों और अलौकिक क्षमताओं के लिए जाने जाते थे।
- अवशेषों का स्थान: ये पवित्र अवशेष साँची बौद्ध परिसर में स्थित स्तूप 3 के भीतर पाए गए थे।
- धार्मिक महत्त्व: ये अवशेष बौद्ध परंपराओं में अत्यंत पूजनीय माने जाते हैं, विशेषकर हीनयान या थेरवाद परंपरा के अनुयायियों के बीच इनका विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है।
साँची के स्तूप के बारे में
- साँची के स्तूप प्राचीन बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन जीवंत बौद्ध पवित्र स्थल है और यह प्राचीन भारतीय बौद्ध कला एवं वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
- स्थान: रायसेन जिला, मध्य प्रदेश।
- यूनेस्को स्थिति: वर्ष 1989 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया, क्योंकि यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: महान स्तूप का निर्माण, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए कराया गया था।
- पुनः खोज और पुनर्स्थापना: इसे वर्ष 1818 में ब्रिटिश अधिकारी हेनरी टेलर द्वारा पुनः खोजा गया, जिसके बाद इसका वैज्ञानिक संरक्षण किया गया।
साँची के स्तूप की प्रमुख विशेषताएँ
- अर्द्धगोलाकार गुंबद: केंद्रीय गुंबद ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसमें पवित्र बौद्ध अवशेष संरक्षित किए गए हैं।
- अलंकरणयुक्त तोरण द्वार: चारों दिशाओं में स्थित ये नक्काशीदार द्वार, भगवान बुद्ध के जीवन, जातक कथाओं और बौद्ध प्रतीकों के दृश्यों को दर्शाते हैं।
- हर्मिका और यष्टि: स्तूप के शीर्ष पर स्थित वर्गाकार रेलिंग को हर्मिका कहा जाता है, जबकि केंद्र में स्थित स्तंभनुमा संरचना यष्टि कहलाती है, जो ब्रह्मांडीय अक्ष का प्रतीक है।
- अशोक स्तंभ: यहाँ प्रसिद्ध अशोक स्तंभ के अवशेष भी पाए जाते हैं, जिस पर सुंदर नक्काशी किए गए चार सिंह अंकित है।
- मठ का परिसर: साँची के परिसर में मठ, मंदिर, स्तूप और पाषाण संरचनाएँ शामिल हैं, जो बौद्ध वास्तुकला के विभिन्न चरणों को दर्शाती हैं।
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व: इन अवशेषों का मंगोलिया में प्रदर्शन का उद्देश्य भारत और मंगोलिया के मध्य सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा बौद्ध धर्म के सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करना है।
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