संदर्भ
MoSPI के वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (ASUSE), 2025 ने भारत के असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि को दर्शाया है, जिसमें रोजगार में वृद्धि, महिला उद्यमिता, डिजिटल अपनाने और औपचारिक वित्तीय समावेशन पर प्रकाश डाला गया है।
असंगठित क्षेत्र उद्यमों पर वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) 2025 के बारे में
असंगठित क्षेत्र उद्यमों के बारे में
- असंगठित क्षेत्र उद्यमों के बारे में: असंगठित क्षेत्र उद्यम ऐसे गैर-कॉरपोरेट व्यावसायिक इकाइयाँ होती हैं, जो व्यक्तियों, परिवारों, साझेदारियों, या स्वयं सहायता समूहों के स्वामित्व में होती हैं और जिनकी अलग कानूनी पहचान नहीं होती है।
- असंगठित क्षेत्र उद्यमों की विशेषताएँ
- लघु-स्तरीय संचालन: सीमित पूँजी, निम्न प्रौद्योगिकी, और स्थानीय बाजार उन्मुखता के साथ संचालित होते हैं, मुख्यतः सूक्ष्म और घरेलू-आधारित व्यवसाय।
- स्वामित्व प्रधानता: अधिकांश व्यक्तिगत स्वामित्व या पारिवारिक उद्यमों के रूप में संचालित, जहाँ निर्णय-निर्धारण परिवार के भीतर केंद्रित होता है।
- श्रम-प्रधान प्रकृति: परिवारिक श्रम और अनौपचारिक श्रमिकों पर अत्यधिक निर्भर।
- अनौपचारिक और लचीला ढाँचा: कई उद्यम औपचारिक पंजीकरण या कॉरपोरेट अनुपालन के बिना कार्य करते हैं।
- लचीला संचालन उन्हें स्थानीय माँग की परिस्थितियों के अनुसार शीघ्र अनुकूलन में सक्षम बनाता है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उदाहरण
- खुदरा और किराना स्टोर: स्थानीय किराना दुकानें और पड़ोस के खुदरा आउटलेट शहरी और ग्रामीण बाजारों में प्रमुख।
- घरेलू विनिर्माण इकाइयाँ: सिलाई की दुकानें, परिधान निर्माण इकाइयाँ, कुम्हार, हस्तशिल्प उद्यम।
- मरम्मत और सेवा उद्यम: मोबाइल मरम्मत दुकानें, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, सैलून, इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत केंद्र।
- खाद्य और आतिथ्य इकाइयाँ: ढाबे, चाय स्टॉल, स्ट्रीट फूड विक्रेता, और छोटे रेस्तराँ, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देते हैं।
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- ASUSE एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण है, जो भारत के असंगठित गैर-कृषि उद्यमों की आर्थिक और परिचालन विशेषताओं को दर्शाता है।
- संकलन और प्रकाशन: सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा।
- फोकस क्षेत्र: इसमें विनिर्माण, व्यापार, और अन्य सेवाओं में संलग्न असंगठित उद्यमों को शामिल किया जाता है, निर्माण गतिविधियों को छोड़कर।
- कवरेज: यह सर्वेक्षण ग्रामीण और शहरी भारत को कवर करता है, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के दुर्गम गाँवों को छोड़कर।
- अध्ययन के मानदंड: ASUSE में उद्यमों की स्थापनाएँ, रोजगार, सकल मूल्य वर्द्धन (GVA), डिजिटल अपनाने, पंजीकरण स्थिति, परिसंपत्तियाँ, ऋण, और महिला भागीदारी का आकलन किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: यह सर्वेक्षण बहु-स्तरीय स्तरीकृत नमूना डिजाइन तथा कंप्यूटर सहायतित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI) आधारित डेटा संग्रहण का उपयोग करता है।
ASUSE 2025 के प्रमुख निष्कर्ष
- उद्यमों की स्थापनाओं में वृद्धि: उद्यमों की स्थापनाओं की संख्या में 7.97% की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2023-24 में 7.34 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 में 7.92 करोड़ हो गई।
- प्रमुख राज्यों में, ग्रामीण और शहरी संयुक्त रूप से सबसे अधिक स्थापनाएँ उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, इसके बाद पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र रहे।

- रोजगार विस्तार: इस क्षेत्र ने 74.5 लाख से अधिक अतिरिक्त रोजगार सृजित किए, जिससे वर्ष 2025 में कुल रोजगार 12.81 करोड़ श्रमिकों तक पहुँच गया।
- एक-तिहाई से अधिक कार्यबल उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में केंद्रित था।

- आर्थिक उत्पादन में वृद्धि: सकल मूल्य वर्द्धन (GVA) में 10.87% की वृद्धि हुई, जिसमें व्यापार क्षेत्र ने 16.77% की वृद्धि के साथ अग्रणी भूमिका निभाई।
- महिला उद्यमिता: महिला स्वामित्व वाले उद्यमों ने 60% से अधिक विनिर्माण स्थापनाओं का नेतृत्व किया, जबकि महिलाएँ कुल कार्यबल का लगभग 29% थीं।
- लगभग 72% महिला-नेतृत्व वाले वेतनभोगी श्रमिक उद्यमों में कम-से-कम एक महिला श्रमिक कार्यरत थी।
- डिजिटल स्वीकृति: व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इंटरनेट उपयोग 26.68% से बढ़कर 39.37% हो गया, जिसमें 50% से अधिक व्यापारी इंटरनेट सेवाओं का उपयोग कर रहे थे।
- बेहतर वित्तीय समावेशन: लगभग 80% बकाया ऋण संस्थागत स्रोतों से प्राप्त हुआ, जो औपचारिक ऋण चैनलों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।
निष्कर्षों का महत्त्व
- आर्थिक पुनर्प्राप्ति का संकेतक: उद्यमों, रोजगार, और GVA में वृद्धि भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में लचीलापन और सतत् गति को दर्शाती है।
- महिला सशक्तीकरण: महिला उद्यमियों की उच्च भागीदारी आर्थिक अवसरों के विस्तार और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों की बढ़ती गतिविधियों को उजागर करती है।
- डिजिटल परिवर्तन: इंटरनेट अपनाने में वृद्धि MSMEs और अनौपचारिक व्यवसायों के बीच डिजिटल एकीकरण के बढ़ने का संकेत देती है, जो ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में दिखाई देता है।
- वित्तीय औपचारिकता: संस्थागत ऋण पर बढ़ती निर्भरता वित्तीय समावेशन में सुधार और अनौपचारिक उधारी चैनलों पर निर्भरता में कमी को दर्शाती है।
निष्कर्ष
ASUSE 2025 भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में मजबूती को प्रदर्शित करता है, जो रोजगार, उद्यमिता, डिजिटलीकरण, और समावेशी आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक है।