संक्षेप में समाचार

28 May 2026

खावड़ा में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली

अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने गुजरात के खावड़ा में 3.37 GWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) शुरू की है।

संबंधित तथ्य

  • यह चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थान (Single-location) बैटरी भंडारण परियोजना है।
  • क्षमता: 3.37 GWh BESS लगभग 10 लाख घरों को एक दिन तक बिजली प्रदान कर सकता है, या 1.2 करोड़ से अधिक LED बल्बों को 10 घंटे तक चला सकता है।
  • प्रयुक्त तकनीक: यह परियोजना कुशल विद्युत भंडारण और वितरण के लिए उन्नत ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों के साथ लीथियम-आयन बैटरी तकनीक को एकीकृत करती है।
  • खावड़ा रिन्यूएबल हब (Khavda Renewable Hub): यह भंडारण परियोजना खावड़ा में स्थित AGEL के 30 गीगावाट (GW) क्षमता वाले नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का हिस्सा है, जिसमें से लगभग 9.9 गीगावाट क्षमता पहले ही परिचालन में आ चुकी है।
  • भविष्य का विस्तार: AGEL की योजना अगले पाँच वर्षों में बैटरी भंडारण क्षमता को 50 GWh से अधिक तक बढ़ाने की है।
  • ग्रिड स्थिरता: BESS नवीकरणीय ऊर्जा-प्रधान विद्युत ग्रिड को स्थिर करने और चौबीसों घंटे हरित विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता करेगा।

बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के बारे में

  • कार्य प्रणाली: BESS रीचार्जेबल बैटरियों में विद्युत संगृहीत करता है और बाद में माँग अधिक होने या नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन कम होने पर इसकी आपूर्ति करता है।
  • ग्रिड स्थिरता: यह बिजली की आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में सहायता करता है और 24×7 विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • उच्च माँग प्रबंधन: संग्रहीत ऊर्जा को अत्यधिक माँग, विद्युत कटौती या आपातकालीन स्थितियों के दौरान जारी किया जा सकता है।
  • महत्त्व: स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (Clean Energy Transition), ऊर्जा सुरक्षा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए BESS अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

गैनाकैंथा खासिआका (लॉन्ग टेल्ड डस्कहॉकर)

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दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई गैनाकैंथा खासिआका (Gynacantha khasiaca) को, पिछली बार देखे जाने के लगभग 110 वर्ष बाद, अरुणाचल प्रदेश में पुनः खोजा गया।

  • अक्टूबर 2024 में नामदफा राष्ट्रीय उद्यान के परिसर में मियाओ-विजयनगर रोड के किनारे 600 मीटर की ऊँचाई पर देखा गया था।

गैनाकैंथा खासिआका (Gynacantha khasiaca) के बारे में

  • गैनाकैंथा खासिआका, जिसे आमतौर पर लॉन्ग-टेल्ड डस्कहॉकर (Long-tailed duskhawker) के रूप में जाना जाता है, ओडोनाटा (Odonata) गण से संबंधित एक दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई प्रजाति है।
    • वंश: यह प्रजाति गैनाकैंथा (Gynacantha) वंश से संबंधित है, जिसमें वैश्विक स्तर पर 92 प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें से लगभग 10 प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं।
  • पहली खोज: इसे पहली बार वर्ष 1914 में अरुणाचल प्रदेश की तत्कालीन अबोर पहाड़ियों (Abor Hills) में खोजा गया था और यह प्रजाति भारत में बहुत कम पाई जाती है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • दृष्टि: इस ड्रैगनफ्लाई के पास दो बड़ी संयुक्त आँखें होती हैं, जिनमें हजारों छोटे लेंस होते हैं, जो इसे लगभग 360° की दृष्टि प्रदान करते हैं।
    • व्यवहार: यह वायु में स्थिरता से विचरण कर सकती है।
    • रंग और गतिविधियाँ: इस प्रजाति का रंग आमतौर पर हल्का भूरा और हरा होता है और यह क्रेपस्कुलर’ (Crepuscular) गतिविधि प्रदर्शित करती है, जिसका अर्थ है कि यह सुबह और शाम के समय सक्रिय होती है।
  • आवास और वितरण: इस प्रजाति को अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में स्थित नामदफा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य में पुनः खोजा गया है।
    • पारिस्थितिकी भूमिका: ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई (Damselflies) मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र से निकटता से जुड़े हुए हैं, जहाँ वे जलीय खाद्य शृंखलाओं में शिकारी और शिकार दोनों के रूप में कार्य करते हैं।
    • अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: भारत के बाहर, यह प्रजाति बांग्लादेश, म्याँमार और नेपाल में भी रिकॉर्ड की गई है।
  • महत्त्व
    • ड्रैगनफ्लाई मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और जैव विविधता संरक्षण के महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकी संकेतक हैं।
    • यह खोज उत्तर-पूर्व भारत की पारिस्थितिकी समृद्धि और निरंतर आवास संरक्षण तथा जैव विविधता निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

PM-AJAY पोर्टल और मोबाइल ऐप

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (PM-AJAY) के कार्यान्वयन और निगरानी को डिजिटलीकृत करने के लिए ‘PM-AJAY पोर्टल’ और ‘AJAY मोबाइल एप्लीकेशन’ लॉन्च किया।

PM-AJAY योजना के बारे में

  • उद्देश्य: यह एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों (SCs) का सामाजिक-आर्थिक उत्थान करना है।
  • घटक: प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) के तीन प्रमुख घटक शामिल हैं:-
    • आदर्श ग्राम: इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) बहुल गाँवों में पर्याप्त बुनियादी ढाँचा और सेवाएँ सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार करना है।
    • सहायता अनुदान (GIA): यह अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सुधार के उद्देश्य से जिला/राज्य स्तरीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • छात्रावास विकास: यह साक्षरता बढ़ाने और स्कूलों तथा उच्च शिक्षा में अनुसूचित जातियों के नामांकन को बढ़ावा देने के लिए आवासीय सुविधाएँ प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

PM-AJAY पोर्टल: मुख्य विशेषताएँ

  • डिजिटल गवर्नेंस और मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म
    • केंद्रीकृत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म: यह पोर्टल PM-AJAY के तहत समन्वय, निगरानी और फंड प्रवाह प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा।
    • कवरेज और लाभार्थी ट्रैकिंग: यह 47,000 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) बहुल गाँवों और 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक लाभार्थियों में सामाजिक-आर्थिक विकास को ट्रैक करेगा।
    • लक्ष्य आधारित वित्त प्रवाह प्रणाली (Milestone-Based Fund Flow System): यह डिजिटल रूप से स्वीकृत ग्राम विकास योजनाओं (VDPs) के माध्यम से लक्ष्य से संबंधित वित्त वितरण को सक्षम बनाएगा।
    • डेटा-संचालित विकास डैशबोर्ड: यह पोर्टल 10 विकासात्मक क्षेत्रों के 50 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर राष्ट्रीय, राज्य और जिला डैशबोर्ड प्रदान करेगा।
  • आदर्श ग्राम घटक
    • एक ‘आदर्श ग्राम’ वह है, जहाँ सभी बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता हो ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी हो सकें और सामाजिक-आर्थिक असमानता न्यूनतम स्तर पर आ जाए।
    • डिजिटल ग्राम योजना में परिवर्तन: यह पोर्टल कागज-आधारित ग्राम योजना से डिजिटल योजना प्रणालियों में परिवर्तन की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे ग्राम विकास योजनाओं (VDPs) को वास्तविक समय में तैयार और स्वीकृत किया जा सकेगा।
  • सहायता अनुदान (GIA) घटक
    • आजीविका कार्यक्रमों के लिए केंद्रीकृत MIS: यह पोर्टल आजीविका और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए एक केंद्रीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) के रूप में कार्य करेगा।
    • वित्तीय और भौतिक प्रगति की निगरानी: यह लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं के वित्तीय आवंटन और भौतिक प्रगति को ट्रैक करेगा।
    • वास्तविक समय लाभार्थी ट्रैकिंग: यह डिजिटल लाभार्थी पंजीकरण और आजीविका पहलों की वास्तविक समय पर निगरानी का समर्थन करेगा।
  • छात्रावास घटक
    • छात्रावास बुनियादी ढाँचे की डिजिटल निगरानी: यह अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत की निगरानी के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा।
    • ऑनलाइन प्रस्ताव और सत्यापन प्रणाली: यह ऑनलाइन प्रस्ताव जमा करने, बुनियादी ढाँचे की ट्रैकिंग और जियो-टैग्ड (Geo-tagged) तस्वीरों के माध्यम से सत्यापन को सक्षम बनाएगा।
    • पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना: यह छात्रावास बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करेगा।

PM-AJAY मोबाइल ऐप

  • एकीकृत मोबाइल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म: यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए PM-AJAY और PMAGY पोर्टल की सेवाओं का विस्तार करता है।
  • विशेषताएँ
    • ऑफलाइन सर्वेक्षण और VDP तैयारी: यह ऑफलाइन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने और वास्तविक समय में ग्राम विकास योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाता है।
    • क्षेत्र-स्तरीय निगरानी विशेषताएँ: यह जियो-टैगिंग, डैशबोर्ड रिपोर्टिंग, मोबाइल निरीक्षण, सूचनाएँ और फोटो अपलोड का समर्थन करता है।
    • लाभार्थी और प्रस्ताव प्रबंधन: यह प्रस्ताव प्रबंधन, लाभार्थी ट्रैकिंग और क्षेत्र-स्तरीय निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।

हंबोल्टिया नैरियाना (Humboldtia nairiana)

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जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटैनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (JNTBGRI) के शोधकर्ताओं ने दक्षिणी पश्चिमी घाट के अंतर्गत केरल के शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य (Shendurney Wildlife Sanctuary) में एक दुर्लभ नई सदाबहार पेड़ की प्रजाति हंबोल्टिया नैरियाना (Humboldtia Nairiana) की खोज की है।

  • इस खोज को आधिकारिक तौर पर ‘जर्नल ऑफ प्लांट डेवलपमेंट साइंसेज’ (Journal of Plant Development Sciences) में प्रकाशित किया गया था।

हंबोल्टिया नैरियाना (Humboldtia Nairiana) के बारे में

  • हंबोल्टिया नैरियाना, हंबोल्टिया वंश से संबंधित एक नई खोजी गई सदाबहार पेड़ की प्रजाति है।
    • नामकरण: इस प्रजाति का नाम वनस्पति अनुसंधान और पौधों के संरक्षण में उनके योगदान के लिए JNTBGRI के पूर्व निदेशक प्रो. जी.एम. नायर के सम्मान में रखा गया है।
    • JNTBGRI: जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटैनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (JNTBGRI), तिरुवनंतपुरम्, केरल, एक स्वायत्त अनुसंधान और संरक्षण केंद्र है, जो उष्णकटिबंधीय पौधों की विविधता के बाह्य-स्थाने (ex-situ) संरक्षण, सतत् जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान की खोज के लिए समर्पित है।
  • आवास और वितरण: यह प्रजाति केरल के अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य के नदी तटीय जंगलों में खोजी गई थी।
    • स्थानिकता: यह पूरी तरह से केरल की स्थानिक प्रजाति है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • भौतिक विशेषताएँ: हंबोल्टिया नैरियाना मध्यम आकार का एक सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई 5-8 मीटर के बीच होती है।
    • फूल और फल: इस प्रजाति में लंबे डंठल (Pedicels) वाले तुलनात्मक रूप से बड़े फूल एवं गोलाकार लंबे (Elliptic-oblong) फल पाए जाते हैं।
      • विशिष्टता: इसकी अनूठी वानस्पतिक और प्रजनन विशेषताएँ इसे ‘हंबोल्टिया पोनमुडियाना’ जैसी निकट से संबंधित प्रजातियों से अलग करती हैं।
  • संरक्षण स्थिति: शोधकर्ताओं ने सीमित आबादी डेटा के कारण IUCN मानदंडों के तहत इस प्रजाति को अस्थायी रूप से डेटा अपर्याप्तता’ (आँकड़ों की कमी) के रूप में वर्गीकृत किया है।

शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य (Shendurney Wildlife Sanctuary)

  • शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य दक्षिणी-पश्चिमी घाट में स्थित एक महत्त्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्र है और यह अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है।
  • स्थान: यह अभयारण्य केरल के कोल्लम् जिले में स्थित है और अपने समृद्ध सदाबहार जंगलों, नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और उच्च जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1984 में पश्चिमी घाट क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानिक वनस्पतियों तथा जीवों के संरक्षण के लिए की गई थी।
  • संरक्षण प्रयास: यह अभयारण्य पौधों, स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों और कीड़ों की कई स्थानिक और लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करता है।
    • बायोस्फीयर रिजर्व: यह अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है, जिसे पारिस्थितिकी संरक्षण और सतत जैव विविधता प्रबंधन के लिए मान्यता प्राप्त है।

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