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8 May 2026
हाल ही में नीति आयोग द्वारा ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एन्हांसमेंट’ (School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement’) शीर्षक से एक नीति रिपोर्ट जारी की गई है।




| चरण | समय अवधि | मुख्य विशेषताएँ / विकास |
| प्राचीन भारतीय शिक्षा | प्राचीन भारत | शिक्षा (विद्या) को पवित्र एवं समग्र माना गया; नैतिक अनुशासन, आध्यात्मिक विकास, विनम्रता, धर्मनिष्ठा तथा आजीवन अधिगम पर बल। |
| शिक्षा का औपनिवेशिक पुनर्संरचना | 1823–1947 | ‘एल्फिंस्टन मिनट’ (1823) एवं ‘मैकॉले मिनट’ (1835) ने अंग्रेजी माध्यम एवं लिपिकीय शिक्षा को बढ़ावा दिया, जिससे स्वदेशी ज्ञान प्रणाली एवं स्थानीय भाषा आधारित शिक्षा हाशिए पर चली गई। |
| स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्माण | वर्ष 1947 के बाद | शैक्षिक अवसंरचना के पुनर्निर्माण, पहुँच के विस्तार, शिक्षक गुणवत्ता सुधार तथा अनुच्छेद-45 के तहत संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति पर बल। |
| प्रारंभिक शैक्षिक आयोग | 1950 का दशक | माध्यमिक शिक्षा आयोग (मुदालियर आयोग, 1952) ने विज्ञान शिक्षा, मातृभाषा में शिक्षण, व्यावसायिक मार्गदर्शन एवं शिक्षक प्रशिक्षण सुधार को प्रोत्साहित किया। |
| प्रथम तीन पंचवर्षीय योजनाएँ | 1951–1966 | सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा, वयस्क साक्षरता, तकनीकी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं बालिका शिक्षा तथा राज्य स्तरीय शिक्षा नियोजन का विस्तार। |
| कोठारी आयोग एवं प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति | 1964–1968 | शिक्षा आयोग (कोठारी आयोग) ने आधुनिक शिक्षा नीति को आकार दिया; राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1968) ने तीन-भाषा सूत्र, सार्वभौमिक शिक्षा, तथा विज्ञान एवं शिक्षक प्रशिक्षण पर बल दिया। |
| राष्ट्रीय नीतियों के माध्यम से विस्तार | 1968–1995 | राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986/1992 ने पहुँच, समानता, अवसंरचना, ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड, नवोदय विद्यालय, DIETs, SCERTs, विकेंद्रीकरण एवं व्यावसायिक शिक्षा पर बल दिया। |
| अधिकार-आधारित एवं समावेशी शिक्षा चरण | 1995–2010 | मध्याह्न भोजन योजना, सर्व शिक्षा अभियान, सभी के लिए शिक्षा, सहस्राब्दी विकास लक्ष्य, तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 ने सार्वभौमिक पहुँच एवं समावेशन को सुदृढ़ किया। |
| माध्यमिक शिक्षा एवं गुणवत्ता पर फोकस | 2009–2020 | राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, सतत् विकास लक्ष्य 4, एवं समग्र शिक्षा ने गुणवत्ता, समानता, अधिगम परिणाम तथा एकीकृत विद्यालयी शिक्षा पर बल दिया। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 एवं रूपांतरणकारी सुधार | 2020 के बाद | राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने 5+3+3+4 संरचना, मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, क्षमता-आधारित अधिगम, व्यावसायिक शिक्षा, प्रौद्योगिकी एकीकरण तथा समग्र विकास को प्रोत्साहित किया। |
भारत की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली ने अवसंरचना, समावेशन तथा अधिगम पुनर्प्राप्ति में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है, किंतु संरचनात्मक एवं गुणवत्ता संबंधी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत निरंतर सुधार सभी के लिए समान, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक हैं।
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