‘कंट्री स्ट्रैटेजिक ऑपर्च्युनिटीज प्रोग्राम’ (COSOP) 2026–2033: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना

13 May 2026

संदर्भ

भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक नया कंट्री स्ट्रैटेजिक ऑपर्च्युनिटीज प्रोग्राम’ (COSOP) 2026–2033 शुरू किया।

संबंधित तथ्य

  • अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक ने ग्रामीण वित्त प्रणाली को और मजबूत करने तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को समर्थन देने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • यह रणनीति विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

COSOP, 2026-2033

  • कंट्री स्ट्रैटेजिक ऑपर्च्युनिटीज प्रोग्राम’ (COSOP) एक मध्यम से दीर्घकालिक रणनीतिक ढाँचा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष द्वारा किसी सदस्य देश के साथ अपनी साझेदारी के लिए तैयार किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ के बारे में

  • यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी।
  • मुख्यालय: रोम।
  • उद्देश्य: कृषि और ग्रामीण विकास में निवेश के माध्यम से ग्रामीण गरीबी और भुखमरी का उन्मूलन करना।
  • मुख्य फोकस क्षेत्र
    • ग्रामीण आजीविका
    • महिला सशक्तीकरण
    • कृषि रूपांतरण
    • वित्तीय समावेशन
    • जलवायु सहनशीलता।

मुख्य विशेषताएँ

  • फोकस क्षेत्र: ग्रामीण समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करना।
    • ज्ञान प्रणालियों को मजबूत करना ताकि सिद्ध विकास मॉडलों को भारत और वैश्विक दक्षिण के अन्य देशों में विस्तारित किया जा सके।
  • आधारभूत संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण: यह आधारभूत संस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष बल देता है, जैसे:
    • स्वयं सहायता समूह (SHGs)
    • किसान उत्पादक संगठन (FPOs)
    • सहकारी संस्थाएँ
    • ये संस्थाएँ ग्रामीण समुदायों को वित्त, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और बाजारों से जोड़ेंगी।
  • ज्ञान आधारित साझेदारी और दक्षिण-दक्षिण सहयोग: भारत ‘नॉलेज लीडर’ के रूप में कार्य करेगा और सफल ग्रामीण विकास मॉडल को निम्नलिखित क्षेत्रों के देशों के साथ साझा करेगा:
    • अफ्रीका
    • दक्षिण-पूर्व एशिया
    • लैटिन अमेरिका।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था से आशय उन आर्थिक गतिविधियों और आजीविका प्रणालियों से है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती हैं, जो मुख्यतः कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर होती हैं।
  • इसमें खेती, पशुपालन, मत्स्यपालन, वानिकी, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और ग्रामीण सेवाएँ शामिल हैं।

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भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चुनौतियाँ

  • कृषि में संरचनात्मक बाधाएँ: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब भी गहरी संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रही है, जैसे खंडित और अलाभकारी भूमि जोत, कम कृषि उत्पादकता तथा मानसून वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता।
    • कृषि जनगणना और नीति आयोग के आकलनों के अनुसार, अधिकांश किसान लघु और सीमांत कृषक हैं, जिनकी यंत्रीकरण, सिंचाई, भंडारण और आधुनिक प्रौद्योगिकी में निवेश करने की क्षमता सीमित है, जिससे कम आय और तनावों के प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है।
  • ग्रामीण बेरोज़गारी और कृषि संकट: लगातार बनी रहने वाली ग्रामीण बेरोजगारी, कृषि में प्रछन्न बेरोजगारी और खेती की घटती लाभप्रदता ने भारत के कई क्षेत्रों में कृषि संकट को बढ़ा दिया है।
  • जलवायु संवेदनशीलता और पारिस्थितिकी दबाव: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों जैसे बार-बार सूखा, बाढ़, अनियमित वर्षा, मृदा क्षरण और बढ़ती जल कमी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनी हुई है।
    • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना और आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, जलवायु परिवर्तनशीलता कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है, विशेषकर वर्षा-आधारित तथा पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में।
  • कमजोर ग्रामीण संस्थाएँ और बाजार तक पहुँच: संस्थागत ऋण तक सीमित पहुँच, अपर्याप्त ग्रामीण अवसंरचना, कमजोर बाजार संपर्क और सहकारी संस्थाओं तथा किसान उत्पादक संगठनों का असमान प्रदर्शन ग्रामीण परिवर्तन को बाधित करता है।
  • अपर्याप्त ग्रामीण अवसंरचना: सड़क संपर्क की कमी, सीमित कोल्ड स्टोरेज सुविधाएँ, अविश्वसनीय विद्युत आपूर्ति, कमजोर डिजिटल अवसंरचना और अपर्याप्त सिंचाई नेटवर्क जैसी समस्याएँ ग्रामीण आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं।
    • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम गति शक्ति के अंतर्गत सरकारी आकलन दर्शाते हैं कि अवसंरचना की कमी लेन-देन लागत बढ़ाती है, बाजार तक पहुँच कम करती है और ग्रामीण आजीविका के विविधीकरण को सीमित करती है।
  • वित्तीय बहिष्करण और औपचारिक ऋण तक सीमित पहुँच: ग्रामीण परिवारों का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर छोटे किसान, बटाईदार, महिलाएँ और भूमिहीन मजदूर, अभी भी सस्ती संस्थागत ऋण तथा वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करता है।
  • ग्रामीण औद्योगीकरण और गैर-कृषि रोजगार का निम्न स्तर: ग्रामीण अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि पर अत्यधिक निर्भर है क्योंकि ग्रामीण उद्योगों, कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों और गैर-कृषि रोजगार अवसरों का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में मानव विकास की कमी: शिक्षा की खराब गुणवत्ता, अपर्याप्त स्वास्थ्य अवसंरचना, कुपोषण और कौशल अंतराल ग्रामीण भारत में मानव पूँजी निर्माण को कमजोर करते हैं।

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भारत के लिए COSOP, 2026–2033 का महत्त्व

  • आर्थिक: COSOP 2026–2033 ढाँचा ग्रामीण आय में वृद्धि करने और सतत् रोजगार अवसरों का सृजन करने में सहायक होगा, क्योंकि यह विविधीकृत आजीविका, मूल्य संवर्द्धन और बेहतर बाजार एकीकरण को बढ़ावा देता है।
    • बाजार-उन्मुख कृषि, ग्रामीण उद्यमों और मजबूत किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहित कर यह कार्यक्रम सरकार के उस उद्देश्य का समर्थन करता है, जिसमें जीविकोपार्जन कृषि को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्द्धी और आय-उन्मुख ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना शामिल है।
  • सामाजिक: यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर देता है, इसलिए यह आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देता है, जिससे वंचित समुदायों के लिए वित्त, कौशल, प्रौद्योगिकी और आजीविका अवसरों तक पहुँच में सुधार होता है।
  • पर्यावरणीय: यह रणनीति जलवायु-सहिष्णु कृषि, सतत् प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अनुकूलनशील आजीविका प्रणालियों का समर्थन करती है, ताकि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों का सामना किया जा सके।
    • बेहतर जल प्रबंधन, जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों और सुदृढ़ मूल्य शृंखलाओं के माध्यम से यह कार्यक्रम सूखा, बाढ़ और पारिस्थितिकी क्षरण के विरुद्ध ग्रामीण समुदायों की अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
  • रणनीतिक: COSOP ढाँचा, स्वयं सहायता समूह (SHGs), डिजिटल कृषि, सहकारी शासन और समावेशी ग्रामीण वित्त जैसे सफल मॉडलों को वैश्विक दक्षिण के देशों के समक्ष प्रस्तुत कर भारत की सॉफ्ट पॉवर को सुदृढ़ करता है।
    • यह भारत को दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एक महत्त्वपूर्ण विकास भागीदार के रूप में स्थापित करता है और सतत् एवं समावेशी ग्रामीण परिवर्तन में ‘नॉलेज लीडर’ की भूमिका को मजबूत करता है।
  • संस्थागत: COSOP ढाँचा स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और सहकारी संस्थाओं जैसी जमीनी संस्थाओं की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
    • इन समुदाय-आधारित संस्थाओं को मजबूत करने से सामूहिक सौदेबाजी शक्ति बढ़ेगी तथा विकेंद्रीकृत और सहभागी ग्रामीण शासन को बढ़ावा मिलेगा।
  • वित्तीय: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) जैसे संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से यह कार्यक्रम ग्रामीण वित्तीय प्रणालियों को सुदृढ़ करने और किसानों, महिला उद्यमियों तथा ग्रामीण उद्यमों के लिए संस्थागत ऋण तक पहुँच में सुधार करने का प्रयास करता है।
  • विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण का समर्थन: COSOP, 2026–2033 भारत के व्यापक विकासात्मक दृष्टिकोण विकसित भारत@2047 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य समावेशी, सतत् और सुदृढ़ विकास प्राप्त करना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ग्रामीण विकास को कैसे उत्प्रेरित कर रही है?

  • सटीक कृषि के माध्यम से कृषि उत्पादकता में सुधार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसानों को मृदा स्थिति, मौसम पैटर्न, फसल स्वास्थ्य और कीट आक्रमण का वास्तविक समय में विश्लेषण कर डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर रही है।
    • AI-सक्षम परामर्श प्रणालियाँ, उपग्रह चित्रण और सेंसर-आधारित प्रौद्योगिकियाँ सटीक कृषि को समर्थन देती हैं, जिससे उच्च उत्पादकता, कम इनपुट लागत और जल तथा उर्वरकों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है।
  • मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करना: AI-आधारित जलवायु और मौसम पूर्वानुमान मॉडल वर्षा पूर्वानुमान, सूखा चेतावनी, बाढ़ अलर्ट और फसल-जोखिम आकलन की सटीकता में सुधार कर रहे हैं।
  • ऋण तक पहुँच और वित्तीय समावेशन का विस्तार: AI डिजिटल ऋण स्कोरिंग, धोखाधड़ी पहचान और अनुकूलित ऋण आकलन के माध्यम से किसानों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए तीव्र एवं समावेशी वित्तीय सेवाएँ प्रदान कर रही है।
  • बाजार संपर्क और मूल्य खोज को सुदृढ़ करना: AI-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को बाजार मूल्य, माँग प्रवृत्तियों, लॉजिस्टिक्स और भंडारण सुविधाओं की वास्तविक समय जानकारी प्रदान करते हैं।
    • ऐसी प्रौद्योगिकियाँ सूचना विषमता को कम करती हैं, सौदेबाजी शक्ति बढ़ाती हैं और किसानों को सीधे खरीदारों, प्रसंस्करण इकाइयों तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ती हैं, जिससे कृषि मूल्य शृंखलाएँ सुदृढ़ होती हैं एवं बिचौलियों द्वारा शोषण कम होता है।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन: AI टेलीमेडिसिन, AI-सहायता प्राप्त निदान, रोग निगरानी और मोबाइल स्वास्थ्य अनुप्रयोगों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार कर रही है।
    • AI उपकरण रोगों की प्रारंभिक पहचान, दूरस्थ परामर्श और स्वास्थ्य सेवा वितरण को बेहतर बनाने में सहायक हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ डॉक्टरों और चिकित्सा अवसंरचना की कमी है।
  • ग्रामीण शिक्षा और कौशल विकास में सुधार: AI-सक्षम शैक्षिक प्लेटफॉर्म ग्रामीण छात्रों और युवाओं के लिए व्यक्तिगत शिक्षण, बहुभाषी सामग्री और दूरस्थ कौशल प्रशिक्षण के अवसर प्रदान कर रहे हैं।
    • AI समर्थित डिजिटल शिक्षण प्रणालियाँ शैक्षिक अंतर को कम, साक्षरता और रोजगार क्षमता में सुधार तथा उभरते क्षेत्रों में ग्रामीण कार्यबल की भागीदारी को बढ़ावा देती हैं।

आगे की राह

  • डिजिटल ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करना ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, कृषि-परामर्श सेवाएँ, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन शिक्षा तक पहुँच में सुधार हो सके।
  • योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुँच में सुधार बेहतर प्रशासनिक समन्वय, वास्तविक समय निगरानी, सामाजिक लेखा-परीक्षण तथा पंचायती राज संस्थाओं एवं स्थानीय समुदायों की अधिक भागीदारी के माध्यम से।
  • जलवायु-स्मार्ट कृषि का विस्तार सूखा-रोधी फसलों, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, सटीक कृषि और सतत् प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देकर।
  • ग्रामीण कौशल विकास को सुदृढ़ करना स्थानीय आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि-प्रसंस्करण, खाद्य प्रौद्योगिकी, हस्तशिल्प, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में।
  • कृषि-प्रसंस्करण और मूल्य शृंखलाओं को बढ़ावा देना भंडारण सुविधाएँ, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कोल्ड चेन, ब्रांडिंग और बेहतर बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए।
  • SHGs, FPOs, सहकारी संस्थाओं और सरकारी योजनाओं के बीच अभिसरण सुनिश्चित करना ताकि एकीकृत ग्रामीण विकास पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सके और ऋण, बाजार, प्रौद्योगिकी तथा संस्थागत समर्थन तक पहुँच में सुधार हो।

ग्रामीण विकास को समर्थन देने हेतु सरकारी पहलें

योजना/पहल  मंत्रालय  उद्देश्य  मुख्य विशेषताएँ/प्रभाव 
दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण विकास मंत्रालय स्वरोजगार और SHGs के माध्यम से गरीबी उन्मूलन महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), वित्तीय समावेशन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण संपर्क में सुधार गाँवों को बाजार, स्कूल और अस्पतालों से जोड़ने वाली सभी मौसम में उपलब्ध  सड़कें।
प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण ग्रामीण विकास मंत्रालय गरीब परिवारों के लिए ग्रामीण आवास मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के घरों के लिए वित्तीय सहायता
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण कौशल विकास और रोजगार ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट से जोड़ना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय किसानों को आय सहायता पात्र किसानों को ₹6,000 वार्षिक DBT सहायता
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय फसल बीमा और जोखिम में कमी फसल विफलता, प्राकृतिक आपदाओं और कीटों के विरुद्ध बीमा कवरेज
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना) कृषि मंत्रालय सिंचाई दक्षता में सुधार “पर ड्राप, मोर क्रॉप”, सूक्ष्म सिंचाई और जल संरक्षण को बढ़ावा
e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) कृषि मंत्रालय कृषि विपणन में सुधार देशभर की मंडियों को जोड़ने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म
FPOs का गठन एवं प्रोत्साहन  कृषि मंत्रालय सामूहिक खेती और विपणन को सुदृढ़ करना किसान उत्पादक संगठनों को ऋण और बाजार तक पहुँच का समर्थन
कुसुम योजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय कृषि का सौरीकरण किसानों के लिए सोलर पंप और नवीकरणीय ऊर्जा समर्थन
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारीकरण) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ग्रामीण एग्रो-प्रोसेसिंग को बढ़ावा सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय वंचित वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा वृद्ध, विधवा और दिव्यांग ग्रामीण नागरिकों के लिए पेंशन।

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