संदर्भ
केंद्र सरकार ने पूरे भारत में अपशिष्ट पृथक्करण, डिजिटल निगरानी और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 के बारे में (UPSC CSE Pre 2019)
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो 1 अप्रैल, 2026 से 2016 के नियमों का स्थान लेते हैं।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधान
- चार स्तरीय पृथक्करण: अपशिष्ट को स्रोत पर गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल अपशिष्ट श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा।
- विस्तारित थोक अपशिष्ट आधारित उत्तरदायित्व (EBWGR): प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले या 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में संचालित संस्थानों को जैविक अपशिष्ट का स्थल पर या अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से प्रसंस्करण करना होगा।
- डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा संचालित केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपशिष्ट उत्पादन, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
- पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति: अवैध डंपिंग और अपशिष्ट पृथक्करण का पालन न करने पर कड़े दंड और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति प्रावधान लागू किए गए हैं।
- रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल (RDF) और लैंडफिल प्रतिबंध: उद्योगों को रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल (RDF) के उपयोग को 15% तक बढ़ाना होगा, जबकि लैंडफिल केवल गैर-पुनर्चक्रणीय और मूल अपशिष्ट तक सीमित रहेंगे।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कार्यान्वयन
- केंद्रीय स्तर के निकाय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नीतियाँ बनाएँगे और डिजिटल निगरानी प्रणाली की देख-रेख करेंगे।
- राज्य स्तर के निकाय: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियाँ अनुपालन की निगरानी करेंगी और नियमों को लागू करेंगी।
- स्थानीय निकाय: नगरपालिकाएँ और पंचायतें अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण, परिवहन और मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRFs) के संचालन का प्रबंधन करेंगी।
- कार्य प्रवाह: अपशिष्ट प्रबंधन शृंखला में स्रोत पर पृथक्करण, संग्रह, परिवहन, MRFs और कंपोस्टिंग सुविधाओं के माध्यम से प्रसंस्करण, सीमित लैंडफिल निपटान और अनिवार्य डिजिटल रिपोर्टिंग शामिल हैं।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित प्रमुख चिंताएँ
- संघवाद संबंधी चिंताएँ: अपशिष्ट प्रबंधन का संबंध स्थानीय शासन, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से निकटता से होने के बावजूद इन नियमों की अत्यधिक केंद्रीकरण के लिए आलोचना की जा रही है।
- एक समान दृष्टिकोण: समान अनुपालन आवश्यकताएँ हिमालयी शहरों, द्वीपीय बस्तियों, जनजातीय क्षेत्रों और तटीय पंचायतों जैसे विविध क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती हैं।
- ग्रामीण क्षमता संबंधी कमी: अधिकांश ग्राम पंचायतों के पास स्वच्छता अभियंता, अपशिष्ट वाहन, वित्तीय संसाधन और डिजिटल अवसंरचना का अभाव है, जो चार स्तरीय पृथक्करण और रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक हैं।
- अनुपालन का बोझ: स्थानीय निकाय वास्तविक अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं में सुधार करने के बजाय डेटा अपलोड करने और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक समय व्यतीत कर सकते हैं।
- वित्तीय बाधाएँ: नगरपालिकाओं और पंचायतों पर बढ़ी हुई जिम्मेदारियाँ पर्याप्त और पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता के बिना एक अपर्याप्त वित्तपोषित दायित्व बन सकती हैं।
आगे की राह
- राज्यों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान करना: राज्यों को अपनी पारिस्थितिकी और प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुरूप अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियाँ डिजाइन करने के लिए अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जानी चाहिए।
- सशक्त स्थानीय शासन: नगर निकायों, वार्ड समितियों और ग्राम सभाओं को योजना निर्माण, निगरानी तथा नागरिक भागीदारी में अधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
- चरणबद्ध और विभेदित कार्यान्वयन: कार्यान्वयन में पहले महानगरों और महानगरीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, इसके बाद छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सरलीकृत मॉडल के माध्यम से धीरे-धीरे विस्तार किया जाना चाहिए।