संदर्भ
हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन एवं अन्य बनाम भारत संघ (2026) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रॉमा-केयर (Trauma Care) तक पहुँच को अनुच्छेद-21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना है।
संबंधित तथ्य
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ट्रॉमा-केयर (Trauma Care) तक पहुँच अब केवल एक कल्याणकारी उपाय नहीं रह गई है, बल्कि यह अनुच्छेद-21 से उत्पन्न होने वाला एक संवैधानिक दायित्व है। इस प्रकार, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा को एक न्यायालय में प्रवर्तनीय अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश
- एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली: न्यायालय ने सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे 100, 101, 102, 108, 1033 तथा 1091 जैसी आपातकालीन हेल्पलाइनों को तीन माह के भीतर एकीकृत राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 से जोड़ें।
- एम्बुलेंस सेवाओं का मानकीकरण: सभी सरकारी एवं निजी एम्बुलेंसों को राष्ट्रीय एम्बुलेंस संहिता का अनुपालन करना होगा। इनमें GPS ट्रैकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी तथा इन्हें 112 आपातकालीन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
- ट्रॉमा-केयर अवसंरचना एवं रजिस्ट्रियाँ: राज्यों को राष्ट्रीय डेटाबेस से संबद्ध ट्रॉमा रजिस्ट्रियों (Trauma Registries) की स्थापना करनी होगी। साथ ही, राजमार्गों, शहरी, अर्द्ध-शहरी (Peri-Urban) एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध ट्रॉमा-केयर क्षमता के आधार पर अस्पतालों का वर्गीकरण किया जाएगा।
- पीएम राहत (PM RAHAT) एवं गुड समैरिटन संरक्षण का कार्यान्वयन: न्यायालय ने पीएम राहत (PM RAHAT) कैशलेस उपचार योजना के समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले गुड समैरिटन्स (Good Samaritans) के लिए शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्देश भी दिया।
पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पतालीकरण एवं सुनिश्चित उपचार) योजना
- पीएम राहत (PM RAHAT) एक राष्ट्रव्यापी कैशलेस ट्रॉमा-केयर योजना (Cashless Trauma-Care Scheme) है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना के बाद के महत्त्वपूर्ण “गोल्डन आवर (Golden Hour)” के दौरान समयबद्ध आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराना है।
- प्रारंभ: इस योजना का शुभारंभ फरवरी 2026 में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करना है।
- नोडल संस्थाएँ: इस योजना का क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) तथा राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों (State Health Agencies) के समन्वय से किया जाता है।
- कार्यान्वयन तंत्र
- कैशलेस उपचार: प्रत्येक पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा।
- 112 हेल्पलाइन से एकीकरण: योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS)-112 हेल्पलाइन से जोड़ा गया है, जिससे एम्बुलेंस सहायता एवं निकटतम नामित अस्पताल में रेफरल सुनिश्चित किया जा सके।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म: यह MoRTH के eDAR प्लेटफॉर्म को NHA के TMS 2.0 से जोड़ता है, जिससे दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर क्लेम (Claim) तक के निपटान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से संचालित होती है।
- वित्तपोषण एवं क्लेम :अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) से की जाती है। स्वीकृत क्लेम का निपटान 10 दिनों के भीतर किया जाता है।
गुड समैरिटन योजना
- प्रारंभ: 3 अक्टूबर 2021 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा प्रारंभ की गई।
- उद्देश्य: आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने के लिए प्रोत्साहित करना। अधिक से अधिक लोगों को मानव जीवन बचाने हेतु प्रेरित करना।
- प्रावधान: ऐसे गुड समैरिटन (Good Samaritan) को पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जिसने मोटर वाहन से संबंधित घातक सड़क दुर्घटना के पीड़ित को तत्काल सहायता प्रदान की हो तथा दुर्घटना के गोल्डन आवर (Golden Hour) के भीतर अस्पताल/ट्रॉमा-केयर केंद्र पहुँचाकर उसकी जान बचाने में योगदान दिया हो।
- पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र: योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक गुड समैरिटन कोप्रति घटना ₹5,000 की पुरस्कार राशि, तथा प्रशंसा प्रमाण-पत्र (Certificate of Appreciation) प्रदान किया जाता है।
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ट्रॉमा केयर (Trauma Care) के बारे में
- ट्रॉमा केयर (Trauma Care) से तात्पर्य चोटग्रस्त व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली संगठित आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्रणाली से है।
- इसमें दुर्घटनाओं, जलने (Burns), गिरने (Falls), हिंसा, आपदाओं अथवा अन्य आपात स्थितियों से प्रभावित पीड़ितों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ, परिवहन, निदान, उपचार, पुनर्वास तथा अनुवर्ती देखभाल (Follow-up Care) शामिल होती हैं।
भारत में ट्रॉमा केयर से संबंधित प्रावधान
- अनुच्छेद-21: जीवन के अधिकार (Right to Life) के अंतर्गत समयबद्ध आपातकालीन चिकित्सा उपचार एवं ट्रॉमा केयर का अधिकार भी शामिल है।
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988: धारा-162 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को PM RAHAT जैसी नामित योजनाओं के माध्यम से कैशलेस उपचार (Cashless Treatment) प्रदान करने का प्रावधान करती है।
- धारा-134A, मोटर वाहन अधिनियम: दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले गुड समैरिटन्स को कानूनी एवं प्रक्रियागत उत्पीड़न से सांविधिक संरक्षण प्रदान करती है।
- गुड समैरिटन नियम, 2020: यह सुनिश्चित करते हैं कि घायल व्यक्तियों की सहायता करने वाले राहगीरों को अनावश्यक पुलिस पूछताछ या कानूनी दायित्वों का सामना न करना पड़े।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: यह देशभर में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, ट्रॉमा सेंटर (Trauma Centres) तथा एम्बुलेंस नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने में सहायता प्रदान करता है।
ट्रॉमा केयर का महत्त्व
- रोकथाम योग्य मृत्यु में कमी: समय पर उपलब्ध ट्रॉमा केयर से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, विशेषकर “गोल्डन आवर” के दौरान।
- गोल्डन आवर (Golden Hour): यह गंभीर चोट लगने के बाद का प्रथम एक घंटा होता है, जिसके दौरान त्वरित एवं उचित चिकित्सा सहायता प्रदान करके मृत्यु को रोकने की सर्वाधिक संभावना होती है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाना: एक सुदृढ़ ट्रॉमा-केयर नेटवर्क विभिन्न क्षेत्रों में आपातकालीन तैयारी तथा स्वास्थ्य सेवा वितरण को बेहतर बनाता है।
- सड़क सुरक्षा परिणामों में सुधार: प्रभावी ट्रॉमा प्रतिक्रिया प्रणाली सड़क सुरक्षा उपायों को पूरक बनाती है तथा सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर को कम करती है।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच को बढ़ावा: मानकीकृत ट्रॉमा-केयर सेवाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि जीवनरक्षक उपचार स्थान, आय या सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी को उपलब्ध हो।
- आपदा एवं आपातकालीन तैयारी में सुधार: एक समन्वित ट्रॉमा-केयर प्रणाली प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक दुर्घटनाओं, आगजनी तथा बहु-हानि घटनाओं (Mass-Casualty Incidents) से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को सुदृढ़ करती है।
निष्कर्ष
अनुच्छेद-21 के अंतर्गत ट्रॉमा केयर (Trauma Care) को संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता देकर सर्वोच्च न्यायालय ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मात्र एक नीतिगत उद्देश्य से आगे बढ़ाकर प्रवर्तनीय अधिकार का स्वरूप प्रदान किया है। यह निर्णय न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समयबद्ध उपचार सुनिश्चित कर असंख्य जीवन बचाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।