आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित ‘जनसंख्या प्रोत्साहन नीति’
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आंध्र प्रदेश सरकार ने घटती प्रजनन दर और भविष्य में वृद्ध आबादी से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए तीन या अधिक बच्चों वाले परिवारों के लिए प्रोत्साहनों का प्रस्ताव दिया है।
आंध्र प्रदेश क्यों चिंतित है?
- घटती प्रजनन दर: आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.5 हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से अत्यधिक कम है, जिससे भविष्य में जनसंख्या में गिरावट की चिंताएं बढ़ गई हैं।
- वृद्ध आबादी: अनुमान बताते हैं कि इस सदी के मध्य तक राज्य की लगभग 25% आबादी वृद्ध हो सकती है, जिससे बुढ़ापे पर निर्भरता का बोझ बढ़ जाएगा।
- कार्यबल में कमी: कम जन्म दर से कामकाजी उम्र की आबादी कम हो सकती है, जिससे भविष्य में आर्थिक विकास, उत्पादकता और श्रम (मजदूरों) की उपलब्धता प्रभावित होगी।
आंध्र प्रदेश जनसंख्या प्रोत्साहन नीति के बारे में
- नकद प्रोत्साहन: बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए तीसरे बच्चे के लिए ₹30,000 और चौथे बच्चे के लिए ₹40,000।
- मासिक सहायता: अतिरिक्त बच्चों वाले पात्र परिवारों के लिए पाँच वर्ष तक ₹1,000 प्रति माह।
- शिक्षा लाभ: 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त शिक्षा और ‘थल्लीकी वंदनम’ योजना के तहत बढ़ी हुई सहायता।
- माताओं के लिए सहायता: लंबी मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश), ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ के प्रावधान और आंगनबाड़ियों के माध्यम से बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) सहायता का विस्तार।
- उद्देश्य: राज्य में घटती प्रजनन दर, वृद्ध होती आबादी और कार्यशील आयु की आबादी की भविष्य की कमी को दूर करना।
- चिंता: अन्य देशों के साक्ष्य दिखाते हैं कि नकद प्रोत्साहन समय से पहले बच्चे के जन्म को बढ़ावा दे सकते हैं, लेकिन इनसे प्रजनन दर में शायद ही कभी कोई महत्त्वपूर्ण या निरंतर वृद्धि होती है।
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ऑपरेशन अंतिम प्रहार
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‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के तहत गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के बाद गढ़चिरौली को सक्रिय नक्सली उपस्थिति से मुक्त घोषित कर दिया गया।
ऑपरेशन अंतिम प्रहार के बारे में
- ऑपरेशन अंतिम प्रहार महाराष्ट्र पुलिस द्वारा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism) को समाप्त करने के लिए शुरू किया गया एक विशेष नक्सल विरोधी अभियान है।
- रणनीति: इस अभियान में नक्सलियों की उपस्थिति को कमजोर करने के लिए खुफिया-आधारित कार्रवाइयों, लक्षित गिरफ्तारियों, आत्मसमर्पण नीतियों और क्षेत्रीय वर्चस्व (एरिया डोमिनेशन) को समाहित किया गया है।
- उपलब्धियाँ: इस ऑपरेशन के तहत, कई वांछित नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे भारी मात्रा में नकदी, हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ।
- परिणाम: इस अभियान ने गढ़चिरौली को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त घोषित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
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लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स
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लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) 2024–25 को जहाजरानी, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री द्वारा जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी के 37वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान लॉन्च किया गया।
- नाविकों और समुद्री हितधारकों के लिए सेवा वितरण, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए महानिदेशालय जहाजरानी (DGS) द्वारा विकसित चार डिजिटल पहल भी जारी की गईं।
लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) के बारे में
- LPPI भारतीय बंदरगाहों के परिचालन प्रदर्शन का आकलन करने और उसमें सुधार करने के लिए ‘सागर आकलन’ (Sagar Aankalan) के तहत विकसित एक राष्ट्रीय बेंचमार्किंग ढाँचा है।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में बंदरगाह दक्षता, पारदर्शिता, प्रतिस्पर्द्धात्मकता और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ाना है।
- संबद्धता: यह सूचकांक पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 का समर्थन करता है।
- आकलन के मानदंड: बंदरगाहों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन कई प्रमुख संकेतकों पर किया जाता है, जिनमें कार्गो हैंडलिंग, जहाजों का टर्नअराउंड समय, बर्थ का निष्क्रिय समय (आइडल टाइम), बर्थिंग से पहले की प्रतीक्षा अवधि, कंटेनर ड्वेल टाइम और शिप बर्थ-डे आउटपुट शामिल हैं।
- कवरेज: यह सूचकांक तीन कार्गो श्रेणियों (ड्राई बल्क, लिक्विड बल्क और कंटेनर कार्गो) में प्रदर्शन का आकलन करता है।
- सतत सुधार: LPPI वर्तमान प्रदर्शन और वर्ष-दर-वर्ष होने वाले सुधार को समान महत्त्व देता है, जिससे बंदरगाहों को अपनी दक्षता में लगातार सुधार करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
- महत्त्व: यह वैश्विक बेंचमार्किंग को बढ़ावा देता है और एक प्रतिस्पर्द्धी समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
LPPI के प्रमुख प्रदर्शनकर्ता (वित्त वर्ष 2024-25)
- ड्राई बल्क कार्गो: 5 मिलियन टन से अधिक ड्राई बल्क कार्गो का प्रबंधन करने वाले बंदरगाहों में पारादीप पोर्ट अथॉरिटी पहले स्थान पर रही।
- लिक्विड बल्क कार्गो: लिक्विड बल्क कार्गो श्रेणी में सिक्का पोर्ट एंड टर्मिनल्स शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरा है।
- कंटेनर कार्गो: 0.5 मिलियन TEU से अधिक कंटेनर कार्गो का प्रबंधन करने वाले बंदरगाहों में मुंद्रा पोर्ट ने सर्वोच्च स्थान हासिल किया, जबकि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
चार डिजिटल समुद्री सुधार
- ई-नाविक शिकायत निवारण मॉड्यूल: पोर्टल, हेल्पलाइन, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से नाविकों के लिए 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली।
- ई-समुद्र जहाज पंजीकरण मॉड्यूल: यह जहाज पंजीकरण को सरल बनाता है और भारत के समुद्री प्रशासन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता।
- मेडिकल प्रैक्टिशनर मॉड्यूल: यह नाविकों को प्रमाणित करने के लिए अधिकृत डॉक्टरों के पंजीकरण और उनकी निगरानी को सुव्यवस्थित करता है, जिससे फर्जी प्रमाणन में कमी आती है।
- यूनिफाइड शिप रीसाइक्लिंग क्रेडिट नोट मॉड्यूल: यह शिप रीसाइक्लिंग क्रेडिट योजना का समर्थन करता है और घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देता है।
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अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच (ISF)
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भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मॉस्को में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच (International Security Forum) में बोलते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और वैश्विक सुरक्षा संस्थानों में सुधार का आह्वान किया।
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच (ISF) के बारे में
- अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच वैश्विक सुरक्षा, रणनीतिक स्थिरता, आतंकवाद, साइबर खतरों और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर संवाद के लिए एक उच्च स्तरीय बहुपक्षीय मंच है।
- उत्पत्ति: ISF की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी।
- यह मंच रूस के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संवादों से जुड़ा हुआ है, विशेष रूप से मॉस्को में आयोजित होने वाले संवादों से, जो दुनिया भर के वरिष्ठ सुरक्षा और रक्षा अधिकारियों को एक साथ लाता है।
- उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देना, बहुपक्षवाद को मजबूत करना, उभरते खतरों से निपटना और गैर-पश्चिमी व ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोणों के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करना है।
- प्रमुख भागीदार: यह मंच 140 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को आकर्षित करता है, जिनमें ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO), आसियान (ASEAN), अफ्रीकी राष्ट्र, लैटिन अमेरिकी देश और पश्चिम एशियाई देश शामिल हैं।
- भारत की भागीदारी: भारत अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से इसमें नियमित रूप से भाग लेता है, और अपने सुरक्षा व रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंच का उपयोग करता है।
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OMC कंपनियां 30 दिनों के लिए एलपीजी का भंडार बनाएंगी।
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केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कम-से-कम 30 दिनों के लिए पर्याप्त तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) भंडार बनाए रखने का निर्देश दिया है।
LPG भंडार बनाने के केंद्र के निर्देश के पीछे के कारण:
- घरेलू ईंधन पर महत्त्वपूर्ण निर्भरता: LPG 33 करोड़ से अधिक भारतीय परिवारों के लिए प्राथमिक रसोई ईंधन के रूप में कार्य करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जन कल्याण के लिए आपूर्ति की निरंतरता आवश्यक हो जाती है।
- बढ़ा हुआ भू-राजनीतिक जोखिम: पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधानों ने LPG को भारत के सबसे संवेदनशील ऊर्जा आयातों में से एक के रूप में उजागर किया है।
- रणनीतिक LPG बफर का अभाव: कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास कोई समर्पित रणनीतिक LPG भंडार नहीं है। घरेलू LPG माँग का लगभग 60% आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है, और इन आयातों का लगभग 90% होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिससे एक बड़ा आपूर्ति-जोखिम उत्पन्न होता है।
- अपर्याप्त आपातकालीन ‘स्टॉकपाइल’ (भंडार): मौजूदा पेट्रोलियम स्टॉक अत्यधिक सीमा तक रिफाइनरों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा परिचालन आवश्यकताओं के लिए बनाए गए व्यावसायिक स्टॉक हैं, न कि लंबे समय तक आपूर्ति व्यवधानों या भू-राजनीतिक तनावों के प्रबंधन हेतु डिजाइन किए गए समर्पित भंडार।
ईंधन आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अन्य उपाय:
- मजबूत LPG वितरण नेटवर्क: पिछले चार दिनों में, 1.78 करोड़ LPG रीफिल बुकिंग प्राप्त हुईं और लगभग 1.8 करोड़ सिलेंडरों की डिलीवरी की गई, जिसमें से 96% डिलीवरी डिजिटल रूप से प्रमाणित थीं।
- जमाखोरी विरोधी और प्रवर्तन कार्रवाई: जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों और OMCs ने निरीक्षण तेज कर दिया है।
- प्राकृतिक गैस आपूर्ति की बहाली: लगभग 99% औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बहाल कर दी गई है।
- समुद्री आपूर्ति का आश्वासन: कच्चा तेल ले जाने वाला टैंकर ‘निसोस केरोस’ (Nissos Keros) लगभग 2.7 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और इसके जल्द ही भारत पहुँचने की उम्मीद है।
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राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (NeSDA) 2025
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प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने पूरे भारत में नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (NeSDA) 2025 पोर्टल लॉन्च किया है।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (NeSDA) 2025 के बारे में
- NeSDA राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और चयनित केंद्रीय मंत्रालयों में ऑनलाइन सार्वजनिक सेवा वितरण की गहनता, परिपक्वता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए DARPG द्वारा विकसित एक द्विवार्षिक मूल्यांकन ढाँचा है।
- उद्देश्य: NeSDA का उद्देश्य ई-गवर्नेंस प्रदर्शन की बेंचमार्किंग करना, सेवा-वितरण की कमियों की पहचान करना, सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तक पहुँचने में नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना है।
- NeSDA 2025 का मुख्य ढाँचा
- यह ढाँचा संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नमेंट सर्वे के ऑनलाइन सर्विस इंडेक्स (OSI) पर आधारित है और इसे भारत के संघीय शासन ढाँचे के अनुरूप तैयार किया गया है।
- पोर्टल कवरेज
- राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरों और केंद्रीय मंत्रालयों के सरकारी पोर्टल।
- नागरिकों और व्यवसायों को विशिष्ट सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने वाले सेवा पोर्टल।
- क्षेत्रीय कवरेज: यह ढाँचा निम्नलिखित क्षेत्रों में सरकार-से-नागरिक (G2C) और सरकार-से-व्यवसाय (G2B) सेवाओं का मूल्यांकन करता है:-
- वित्त, श्रम और रोजगार, शिक्षा, स्थानीय शासन और उपयोगिताएँ, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, कृषि, गृह सुरक्षा, पर्यावरण, पर्यटन, लोक शिकायत और परिवहन एवं यात्रा।
- विस्तारित कवरेज: NeSDA, 2025 ने फोकस क्षेत्रों में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की सेवाओं को शामिल करके अपने दायरे का विस्तार किया है।
- अनिवार्य सेवा मूल्यांकन: यह ढाँचा निम्नलिखित के मूल्यांकन का प्रस्ताव करता है:-
- प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए 59 अनिवार्य सेवाएँ।
- केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लिए 43 अनिवार्य सेवाएँ।
- मूल्यांकन के मानदंड: पहुँच, कंटेंट की उपलब्धता (Content Availability), उपयोग में आसानी, सूचना सुरक्षा और गोपनीयता, एंड-टू-एंड सेवा वितरण, एकीकृत सेवा वितरण, स्टेटस ट्रैकिंग, ओपन गवर्नमेंट डेटा (OGD), ई-भागीदारी और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
- डिजिटल मूल्यांकन मंच: NeSDA 2025 पोर्टल ऑनलाइन डेटा जमा करने, निगरानी, हितधारक परामर्श, क्षमता-निर्माण और समीक्षा प्रक्रियाओं के लिए एक केंद्रीकृत मंच के रूप में कार्य करता है।
- महत्त्व: NeSDA 2025 पूरे भारत में डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करके जवाबदेह, पारदर्शी, सुलभ और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन को बढ़ावा देता है।
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