संदर्भ
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) ने मूलभूत स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने के लिए ‘जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने हेतु संस्थागत क्षमताओं की सुदृढ़ीकरण परियोजना’ (Strengthening Institutional Capacities for Securing Biodiversity Conservation Commitments Project) नामक पंचवर्षीय परियोजना शुरू की है।
PW OnlyIAS विशेष
राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024–30
भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024-30 कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के अनुरूप है, जिसमें “संपूर्ण सरकार” (Whole of Government) दृष्टिकोण के माध्यम से जैव विविधता की हानि को रोकने के लिए 23 राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
मुख्य लक्ष्यों में शामिल हैं
- 30×30 संरक्षण: संरक्षित क्षेत्रों और अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECMs) का स्थल/समुद्र के 30% क्षेत्रों तक विस्तार करना।
- पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन: पारिस्थितिकी रूप से विखंडित हो चुके कम-से-कम 30% स्थलीय, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों को पुनर्स्थापित करना।
- सतत् प्रबंधन: जैव विविधता लाभों के उचित साझाकरण के साथ-साथ सतत् कृषि, मत्स्यपालन और वानिकी को बढ़ावा देना।
- प्रदूषण और जोखिम न्यूनीकरण: प्रदूषण के जोखिमों को कम करना और आक्रामक विदेशी प्रजातियों का प्रबंधन करना।
- मुख्यधारा और वित्तपोषण: विकास योजनाओं में जैव विविधता का एकीकरण (लक्ष्य 14) और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संसाधन जुटाना।
ये लक्ष्य आवास के विखंडन से निपटने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और संरक्षण के लिए “संपूर्ण समाज” (Whole of Society) दृष्टिकोण को सुरक्षित करने का प्रयास करते हैं। |
जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने की परियोजना के बारे में
यह परियोजना स्थानीय शासन में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण को एकीकृत करने के लिए ₹40+ करोड़ (4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के वित्तपोषण के साथ शुरू की एक पहल (2025-2030) है।
- उद्देश्य: जैव विविधता को स्थानीय विकास योजना में मुख्यधारा में लाना, संस्थानों को मजबूत करना और संरक्षण से जुड़ी स्थायी आजीविका को बढ़ावा देना।
- किसके द्वारा शुरू किया गया: इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
- परिदृश्य-आधारित दृष्टिकोण: यह परियोजना एकीकृत संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सत्यमंगलम् (तमिलनाडु) और गारो हिल्स (मेघालय) जैसे पारिस्थितिकी रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती है।
- विकेंद्रीकृत शासन: यह ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में जैव विविधता को शामिल करके ग्राम पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) को मजबूत करती है।
- नवाचारी वित्त पोषण तंत्र: यह संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS), कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत फंडिंग और हरित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देती है।
- क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण: यह संस्थागत क्षमताओं का विकास करती है और देशव्यापी पुनरावृत्ति के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करती है।
- समावेशी भागीदारी: यह जैव विविधता शासन और आजीविका सृजन में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की भूमिका पर जोर देती है।
महत्त्व
- स्थानीय शासन को मजबूत करना: यह परियोजना पंचायती राज संस्थानों को जमीनी स्तर की योजना में पर्यावरणीय स्थिरता को एकीकृत करने के लिए सशक्त बनाती है।
- वैश्विक प्रतिबद्धताओं का समर्थन: यह भारत के NBSAP (2024-30), पेरिस समझौते के तहत NDCs और 30×30 जैव विविधता लक्ष्य को आगे बढ़ाती है।
- सतत् आजीविका को बढ़ावा: यह पर्यावरण के अनुकूल उद्यमों और लाभ-साझाकरण तंत्र के माध्यम से संरक्षण को आय सृजन से जोड़ती है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के बारे में
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत जैविक संसाधनों को विनियमित और संरक्षित करने के लिए स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
- नोडल मंत्रालय: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।
- संरचना: NBA में एक अध्यक्ष, पदेन सरकारी सदस्य और गैर-आधिकारिक विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जिन्हें राज्य जैव विविधता बोर्डों और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्य अधिदेश
- जैविक संसाधनों का विनियमन: NBA जैविक संसाधनों तक पहुँच को नियंत्रित करता है और लाभों के न्यायसंगत साझाकरण को सुनिश्चित करता है।
- नीति सलाहकार भूमिका: यह जैव विविधता संरक्षण, सतत् उपयोग और कानूनी ढाँचे पर सरकार को सलाह देता है।
- पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: यह स्वदेशी ज्ञान की रक्षा करता है और भारतीय जैव-संसाधनों पर बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) संबंधी अवैध दावों का खंडन करता है।
- संरक्षण को बढ़ावा देना: यह जैव विविधता विरासत स्थलों की पहचान करने में सहायता करता है और संरक्षण पहलों को बढ़ावा देता है।
- समन्वय और जागरूकता: यह सार्वजनिक जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
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निष्कर्ष
यह प्रणालीगत दृष्टिकोण इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत वैश्विक पर्यावरणीय उद्देश्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए, एक विकेंद्रीकृत, समावेशी और दीर्घकालिक जैव विविधता शासन ढाँचे की ओर अग्रसर है।