संदर्भ
वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026 में चेतावनी दी गई है कि ईंधन लकड़ी और चारकोल की बढ़ती माँग अफ्रीका और एशिया में वन क्षरण को तेज कर रही है।
वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026 के प्रमुख बिंदु
- वैश्विक वन ह्रास: वैश्विक वन क्षेत्र वर्ष 2015 में 4.18 अरब हेक्टेयर से घटकर वर्ष 2025 में 4.14 अरब हेक्टेयर रह गया, जिससे प्रति वर्ष 4.12 मिलियन हेक्टेयर का शुद्ध ह्रास दर्ज हुआ।
- क्षेत्रीय गिरावट: दक्षिण अमेरिका में लगभग 4.1 मिलियन हेक्टेयर वार्षिक वन ह्रास हुआ, जबकि अफ्रीका में इस दशक के दौरान लगभग 3 मिलियन हेक्टेयर प्रतिवर्ष वन हानि हुई।
- ईंधन की लकड़ी संबंधी दबाव: रिपोर्ट ने ईंधन लकड़ी और चारकोल पर बढ़ती निर्भरता को वन क्षरण का प्रमुख कारण बताया, विशेषकर उप-सहारा अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में।
- प्राथमिक वनों का क्षरण: वर्ष 2015 से वर्ष 2025 के बीच विश्व में लगभग 16 मिलियन हेक्टेयर प्राथमिक वनह्रास हुआ, जिससे जैव विविधता और कार्बन भंडारण क्षमता को खतरा उत्पन्न हुआ।
- पुनर्स्थापन अंतर: यद्यपि 91 देशों ने 190 मिलियन हेक्टेयर वनों के पुनर्स्थापन का वादा किया, वर्ष 2025 तक केवल 44 मिलियन हेक्टेयर ही पुनर्स्थापित हो पाए, जिसमें एशिया ने सबसे अधिक प्रगति दिखाई।
भारत का वन आच्छादन और लक्ष्य
- वन और वृक्ष आच्छादन: भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, कुल वन और वृक्ष आच्छादन 827,357 वर्ग. किमी. दर्ज किया गया, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है।
- लक्ष्य: भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय लक्ष्य राष्ट्रीय वन नीति (1988) के अनुसार, पारिस्थितिकी स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु अपने कुल भौगोलिक क्षेत्र का कम-से-कम 33% भाग वन और वृक्ष आच्छादन के अंतर्गत बनाए रखना है।
- प्रमुख सरकारी पहलें: प्रमुख पहलों में ग्रीन इंडिया मिशन (GIM), राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम, और प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) शामिल हैं, जो वनीकरण और पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन के लिए कार्यरत हैं।
- महत्त्व: ये उपाय जलवायु परिवर्तन शमन, जैव विविधता संरक्षण और सतत् वन प्रबंधन का समर्थन करते हैं, साथ ही दीर्घकालिक पारिस्थितिकी सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं।
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वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट, 2026 के बारे में
- वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026 एक संयुक्त राष्ट्र मूल्यांकन रिपोर्ट है, जो वर्ष 2030 तक वैश्विक वन लक्ष्यों (GFGs) की प्राप्ति की दिशा में वैश्विक प्रगति का आकलन करती है।
- जारीकर्ता: यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग (UNDESA) तथा संयुक्त राष्ट्र वन मंच (UNFF) सचिवालय द्वारा तैयार की गई है।
- उद्देश्य: यह रिपोर्ट वन संरक्षण, सतत् वन प्रबंधन, पुनर्स्थापन प्रयासों और वैश्विक वन पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली चुनौतियों के रुझानों का आकलन करती है।
- महत्त्व: यह रिपोर्ट वनोन्मूलन, जैव विविधता ह्रास, जलवायु परिवर्तन और सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) से निपटने के लिए एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक नीतिगत ढाँचा प्रदान करती है।

वैश्विक वनों में कमी के निहितार्थ
- जलवायु तनावों: वनों में कमी से वैश्विक कार्बन अवशोषण क्षमता कमजोर होती है, जिससे जलवायु परिवर्तन, हीटवेव, सूखा और चरम मौसम घटनाएँ तीव्र होती हैं।
- जैव विविधता के लिए खतरा: प्राथमिक वनों का ह्रास स्थानिक प्रजातियों, पारिस्थितिकी संतुलन और परागण तथा जल विनियमन जैसी महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाओं को प्रभावित करता है।
- ऊर्जा-निर्धनता संबंध: ईंधन लकड़ी पर अत्यधिक निर्भरता स्वच्छ ऊर्जा तक अपर्याप्त पहुँच को दर्शाती है और निर्धनता तथा पर्यावरणीय क्षरण के बीच संबंध को उजागर करती है।
- शासन संबंधी चुनौतियाँ: कमजोर वन शासन, अवैध कटाई, असुरक्षित भूमि स्वामित्व और सीमित संस्थागत क्षमता सतत वन प्रबंधन में बाधा उत्पन्न करती हैं।
आगे की राह
- स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच: किफायती स्वच्छ खाना पकाने और ऊर्जा विकल्पों का विस्तार ईंधन लकड़ी और चारकोल पर निर्भरता को कम कर सकता है।
- सतत् आपूर्ति शृंखलाएँ: देशों को वनोन्मूलन मुक्त कृषि और औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि वनों पर दबाव कम किया जा सके।
- वित्तीय समर्थन: वनीकरण, पुनर्स्थापन और समुदाय-आधारित वन प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए अधिक जलवायु वित्त और निवेश की आवश्यकता है।
- मजबूत समन्वय: रिपोर्ट सरकारों, स्थानीय समुदायों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निजी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देती है, ताकि वर्ष 2030 तक वैश्विक वन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।