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नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना

20 Apr 2026

संदर्भ

नदी बेसिन प्रबंधन (River Basin Management- RBM) योजना स्थायी जल संसाधन प्रबंधन के लिए बेसिन-स्तरीय योजना को बढ़ावा देती है और यह ₹2183 करोड़ के पूर्ण सरकारी वित्तपोषित परिव्यय के साथ वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।

संबंधित तथ्य

पिछले चरण में, जो वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक था, इस योजना के लिए कुल बजट आवंटन ₹1276 करोड़ था।

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नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना के बारे में

  • यह नदी घाटियों (बेसिन) में जल संसाधनों के प्रबंधन, संरक्षण, सुधार और स्थायी उपयोग के लिए एक व्यापक योजना है।

ब्रह्मपुत्र बोर्ड के कर्तव्य

बोर्ड निम्नलिखित कार्य करता है:

  • कटाव-रोधी कार्य: महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कटाव-रोधी कार्य (जैसे- माजुली द्वीप और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा)।
  • जल निकासी विकास योजनाएँ।
  • बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में ऊँचे प्लेटफॉर्मों (Raised platforms) का निर्माण।
  • सतत् उपयोग के लिए जल संसाधनों का विकास और प्रबंधन: (स्वदेशी लोगों की जल प्रबंधन प्रथाओं का वैज्ञानिक प्रसार और स्प्रिंगशेड प्रबंधन कार्य)।
  • जल संसाधन प्रबंधन/विकास में क्षमता निर्माण (NEHARI में NER और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के अधिकारियों का प्रशिक्षण)।

मुख्य विशेषताएँ

  • उद्देश्य: नदी बेसिन स्तर पर सतही जल और भूजल प्रणालियों सहित जल संसाधनों के एकीकृत नियोजन, अन्वेषण और विकास को सुगम बनाना।
  • दृष्टिकोण: यह इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधनों के एकीकृत नियोजन और विकास पर जोर देता है।
  • नोडल मंत्रालय: जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • भौगोलिक दायरा और प्राथमिकता वाले क्षेत्र: RBM योजना मुख्य रूप से रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण और जल-समृद्ध लेकिन अल्प-विकसित क्षेत्रों पर केंद्रित है, विशेष रूप से:
    • उत्तर पूर्वी क्षेत्र की नदी घाटियाँ।
    • जम्मू और कश्मीर / लद्दाख में सिंधु बेसिन।
    • ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता और सिंधु जैसे प्रमुख बेसिन।

संस्थागत ढाँचा

  • ब्रह्मपुत्र बोर्ड घटक: ब्रह्मपुत्र बोर्ड उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बेसिन-स्तरीय नियोजन और बाढ़ प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
    • सर्वेक्षण और अन्वेषण, और एक मास्टर प्लान तैयार करना।
    • समय-समय पर इसे पूर्ण या आंशिक रूप से संशोधित करना।
    • बाढ़ नियंत्रण, तट कटाव की रोकथाम, और जल निकासी में सुधार के लिए सिंचाई, जलविद्युत, नौवहन तथा अन्य लाभकारी उद्देश्यों के लिए जल संसाधनों के विकास एवं उपयोग पर ध्यान देना।

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  • जल संसाधन विकास योजना का अन्वेषण (IWRDS): IWRDS घटक निम्नलिखित के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है:
    • केंद्रीय जल आयोग (CWC): RBM योजना के तहत, केंद्रीय जल आयोग, जल संसाधन परियोजनाओं के लिए सर्वेक्षण, अन्वेषण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करता है।
    • राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA): NWDA घटक, राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन नियोजन पर केंद्रित है, विशेष रूप से नदियों को जोड़ने के कार्यक्रम (ILR) के तहत।

कार्रवाई के प्रमुख क्षेत्र

  • बेसिन नियोजन: बेसिन नियोजन इस ढाँचे की नींव है और इसमें नदी बेसिन मास्टर प्लान तैयार करना और समय-समय पर अद्यतन करना शामिल है।
    • ये योजनाएँ प्रत्येक बेसिन के भीतर जल संसाधनों के विकास, उपयोग और संरक्षण के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप प्रदान करती हैं।

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  • सर्वेक्षण और अन्वेषण: सूचित निर्णय लेने के समर्थन में व्यापक सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य किए जाते हैं। इसमें ड्रिलिंग और ड्रिफ्टिंग संचालन, हाइड्रोलॉजिकल तथा टोपोग्राफिकल सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रीय अन्वेषण एवं मास्टर प्लान व विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए आवश्यक प्राथमिक और द्वितीयक डेटा का संग्रह शामिल है।
  • परियोजना विकास: परियोजना विकास बहुउद्देशीय जल संसाधन परियोजनाओं के लिए DPR तैयार करने पर केंद्रित है।
    • इसमें बाढ़ और कटाव प्रबंधन, जल निकासी विकास और व्यवस्थित परियोजना कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अन्य पहल भी शामिल हैं।
  • बाढ़ और कटाव प्रबंधन: संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ और नदी तट कटाव के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
    • इनमें कटाव-रोधी कार्य, बाढ़ नियंत्रण उपाय और समुदायों, बुनियादी ढाँचे एवं कृषि भूमि की रक्षा के लिए बायो-इंजीनियरिंग हस्तक्षेप शामिल हैं।
  • जल निकासी विकास: जल निकासी के प्रवाह में सुधार करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में समस्या के समाधान के लिए जल निकासी विकास गतिविधियाँ की जाती हैं।
    • ये प्रयास भूमि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर जल प्रबंधन में मदद करते हैं।
  • समुदाय-आधारित हस्तक्षेप: समुदाय-आधारित पहल स्थानीय जल प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • इनमें स्थानीय और जनजातीय समुदायों के मध्य जल के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना, स्प्रिंग शेड प्रबंधन और जल निकायों एवं बेसिन पारिस्थितिकी तंत्र का विकास जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।

RBM योजना के तहत प्रगति और उपलब्धियाँ (2021-26)

  • बाढ़ और कटाव प्रबंधन (ब्रह्मपुत्र बोर्ड)
    • उत्तर-पूर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में कटाव-रोधी और बाढ़ प्रबंधन कार्यों का कार्यान्वयन।
    • माजुली द्वीप (असम) जैसे महत्त्वपूर्ण स्थानों के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र के अन्य कटाव-प्रवण क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य किए गए।
    • बाढ़ के दौरान आश्रय प्रदान करने के लिए ऊँचे प्लेटफॉर्मों का निर्माण।
  • समुदाय-उन्मुख हस्तक्षेप
    • उत्तर-पूर्व के पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग शेड प्रबंधन और जल निकाय विकास का कार्यान्वयन।
    • ग्रामीण और जनजातीय समुदायों के मध्य जल की उपलब्धता तथा स्थानीय जल प्रबंधन प्रथाओं में सुधार लाने एवं वैज्ञानिक सुधार के साथ सर्वोत्तम स्वदेशी प्रथाओं को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से की गई पहल।
  • तकनीकी क्षमता को मजबूत करना
    • सर्वेक्षण और नियोजन में आधुनिक तकनीकों को अपनाना, जैसे कि भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और रिमोट सेंसिंग, लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) तथा ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण एवं उन्नत हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग टूल।
    • DPR तैयार करने और बेसिन अध्ययनों में सटीकता तथा दक्षता में सुधार।
नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना

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