संदर्भ
ओडिशा के रायगढ़ जिले में एक बॉक्साइट परियोजना को लेकर हुई झड़पें संसाधन-संपन्न क्षेत्रों में आदिवासी अधिकारों, पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक विकास के मध्य तनाव को उजागर करती हैं।
मुद्दे की मुख्य बिंदु
- आदिवासी अधिकार और सहमति: स्थानीय आदिवासी समुदायों ने वास्तविक परामर्श और सूचित सहमति की कमी का आरोप लगाया है।
- पेसा (PESA) अधिनियम, 1996: अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य करता है।
- वन अधिकार अधिनियम, 2006: वन भूमि के परिवर्तन के लिए अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरण और आजीविका संबंधी चिंताएँ: खनन से वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और जल प्रदूषण होता है। यह कृषि, वन-आधारित आजीविका और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है।
- कानून और व्यवस्था: हिंसक झड़पें शासन की विफलता और विश्वास की कमी को दर्शाती हैं। यह औद्योगीकरण और समावेशी विकास के बीच संघर्ष को उजागर करता है, जो पूर्वी भारत के खनिज समृद्ध आदिवासी क्षेत्रों में आम है।
बॉक्साइट के बारे में
- बॉक्साइट एक अलौह (Non-ferrous) खनिज है और एल्युमीनियम का प्राथमिक अयस्क है, जो मुख्य रूप से हाइड्रेटेड एल्युमीनियम ऑक्साइड और आयरन ऑक्साइड, सिलिका एवं टिटानिया जैसी अशुद्धियों से बना होता है।
- गुण: नरम, छिद्रपूर्ण, लाल-भूरा; कम कठोरता और उच्च एल्युमीनियम सामग्री।
- उपयोग: एल्युमीनियम उत्पादन (बेयर प्रक्रिया के माध्यम से); दुर्दम्य (Refractory) सामग्री, अपघर्षक (Abrasives), सीमेंट और रासायनिक उद्योगों में उपयोग किया जाता है।
वितरण
- वैश्विक
- प्रमुख भंडार: गिनी, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, वियतनाम, चीन।
- अग्रणी उत्पादक: वैश्विक आपूर्ति में गिनी और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा है।
- भारत
- प्रमुख राज्य: अकेले ओडिशा में देश के बॉक्साइट संसाधनों का 41% हिस्सा है, इसके बाद छत्तीसगढ़ (20%), आंध्र प्रदेश (12%), गुजरात (8%), झारखंड (6%), महाराष्ट्र (5%) और मध्य प्रदेश (4%) का स्थान है।
- पूर्वी तटीय बेल्ट (ओडिशा-आंध्र) सबसे संसाधन संपन्न है।
ओडिशा में प्रमुख बॉक्साइट खदानें
- पंचपतमली (कोरापुट)
- सिजीमाली (रायगढ़-कालाहांडी)
- नियमगिरी पहाड़ियाँ (कालाहांडी-रायगढ़)
- गंधमर्दन (बरगढ़)।
ओडिशा के बॉक्साइट का महत्त्व
- संसाधन प्रभुत्व: वर्ष 2022-23 के दौरान, ओडिशा कुल उत्पादन के लगभग 73% हिस्से के साथ अग्रणी बॉक्साइट उत्पादक राज्य के रूप में उभरा।
- औद्योगिक जुड़ाव: एल्युमीनियम रिफाइनरियों (जैसे लाँजीगढ़) का समर्थन करता है और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए आधार है।
- रणनीतिक महत्त्व: निर्यात, रोजगार और ऊर्जा, विमानन एवं बुनियादी ढाँचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में योगदान देता है।
एल्युमीनियम के बारे में
- बॉक्साइट से एलुमिना के माध्यम से प्राप्त; आधुनिक उद्योग की प्रमुख अलौह धातु।
- प्रचुरता: पृथ्वी की पर्पटी में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु (~8%); ऑक्सीजन और सिलिकॉन के बाद तीसरा सबसे सामान्य तत्त्व।
- अग्रणी उत्पादक: चीन दुनिया के एल्युमीनियम का लगभग 57-60% उत्पादन करता है, जिससे वह सबसे बड़ा उत्पादक है, उसके बाद भारत (दूसरे स्थान पर) और रूस का स्थान है।
- गुण: हल्का लेकिन मजबूत; विद्युत का सुचालक; संक्षारण प्रतिरोधी (Corrosion-resistant); अत्यधिक पुनर्चक्रण योग्य।
- अनुप्रयोग: परिवहन (ऑटोमोबाइल, विमान), बिजली (केबल), निर्माण (खिड़कियाँ, पैनल), पैकेजिंग (कैन, फॉयल), रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा (सौर पैनल)।
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निष्कर्ष
समावेशी और जिम्मेदार विकास सुनिश्चित करने के लिए कठोर पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों, ग्राम सभा की सहमति, टिकाऊ प्रथाओं तथा लाभों के न्यायसंगत वितरण के माध्यम से आदिवासी अधिकारों के साथ खनन का संतुलन बनाना आवश्यक है।