बीटा पिक्टोरिस (Beta Pictoris) के चारों ओर नया ग्रह
|
हाल ही में 10 वर्षों से अधिक समय तक अवलोकन संबंधी आँकड़ों में एक रहस्य बने रहने के बाद, खगोलविदों ने युवा तारे ‘बीटा पिक्टोरिस’ (Beta Pictoris) की परिक्रमा करने वाले एक फेंट गैस जायंट एक्सोप्लैनेट की खोज की है।
एक्सोप्लैनेट कोई भी ऐसा ग्रह होता है, जो हमारे सौर मंडल के बाहर स्थित होता है, जो मुख्य रूप से अन्य तारों की परिक्रमा करता है, कभी-कभी स्वतंत्र रूप से से भी पाया जाता है।
खोज के बारे में
- खोजकर्ता: दो स्वतंत्र टीमों ने वर्ष 2025 के अंत में विभिन्न दूरबीनों का उपयोग करके कुछ ही दिनों के भीतर इस ग्रह का पता लगाया और दोनों शोध टीमों ने जुलाई 2026 में ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए।
- स्कॉटिश-जर्मन नेतृत्व वाली एक टीम ने चिली में स्थित यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के ‘वेरी लार्ज टेलीस्कोप’ (VLT) और अभिलेखीय आँकड़ों के आधार पर इस ग्रह की कक्षा की पुष्टि की है।
- कैलिफोर्निया के नेतृत्व वाली एक टीम ने नासा के ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ (JWST) का उपयोग करके इसका पता लगाया है।
- स्थान: यह ग्रह ‘बीटा पिक्टोरिस’ की परिक्रमा करता है, जो पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक युवा तारा है।
- बीटा पिक्टोरिस दक्षिणी तारामंडल ‘पिक्टर’ में स्थित है, जिसका नाम चित्रकार के ईजल (easel) के नाम पर रखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ
- आकार: यह ग्रह बृहस्पति से थोड़ा बड़ा है और इस प्रणाली में पहले से अध्ययन किए गए ग्रह की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक धुँधला है।
- परिक्रमा की अवधि: इसे अपने तारे के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 91 वर्ष लगते हैं, जो सूर्य के चारों ओर यूरेनस (अरुण) की परिक्रमा अवधि से थोड़ा अधिक है।
- आयु: यह ग्रह लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) वर्ष पुरानी तारा प्रणाली का हिस्सा है, जिसके कारण यह एक अत्यंत नवीन ग्रहीय प्रणाली मानी जाती है।
|
व्हाइट-बेलीड हेरॉन (अर्डिया इनसिग्निस)
|
हाल ही में, लोहित नदी घाटी में प्रस्तावित 1,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना से गंभीर रूप से संकटग्रस्त व्हाइट-बेलीड हेरॉन (White-bellied Heron) के आवास एवं अस्तित्व पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।
व्हाइट-बेलीड हेरॉन (अर्डिया इनसिग्निस) के बारे में
- परिचय: व्हाइट-बेलीड हेरॉन (White-bellied Heron) विश्व के अत्यंत दुर्लभ पक्षियों में शामिल है । भारत में इसकी बची हुई आबादी मुख्यतः अरुणाचल प्रदेश तक सीमित है।
आवास और वितरण
- यह परिपक्व तटीय (रिपेरियन) वनों और उपउष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वनों से घिरी नदियों में निवास करता है।
- इसकी वर्तमान सीमा में पूर्वोत्तर भारत, भूटान और उत्तरी म्यांमार शामिल हैं, जबकि भारत में इसकी आबादी मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश तक ही सीमित है।
मुख्य विशेषताएँ
- आहार और शिकार: इसका मुख्य आहार मछली है। यह उथले और नदी के जल में शिकार करता है।
- आवास: ये घोंसले के निर्माण के लिए परिपक्व तटीय (रिपेरियन) वृक्षों पर करते हैं, जबकि प्रजनन के लिए न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप आवश्यक है।
खतरे
- जलविद्युत परियोजनाएँ: नदियों पर बने बांध नदी के प्रवाह और मैलापन (टर्बिडिटी) को बदल सकते हैं, तटीय वनों को जलमग्न कर सकते हैं तथा खाद्य व प्रजनन स्थलों को बाधित कर सकते हैं।
- आवास क्षरण: कृषि अतिक्रमण, रेत निष्कर्षण, नदी के बोल्डर (बड़े पत्थरों) को हटाना और प्रदूषण इसके विशेष नदी आवास को नुकसान पहुँचाते हैं।
- मानवीय व्यवधान: अनियंत्रित पर्यटन, जंगल की आग और अन्य मानवजनित गतिविधियाँ इसके अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं।
संरक्षण स्थिति
- IUCN: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (CR) के रूप में वर्गीकृत।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I
लोहित नदी के बारे में
- परिचय: लोहित एक प्रमुख बारहमासी नदी है, जो ब्रह्मपुत्र नदी की एक महत्त्वपूर्ण पूर्वी सहायक नदी है।
- उद्गम: यह पूर्वी तिब्बत की जयाल चू शृंखला (Zayal Chu Range) से निकलती है और अरुणाचल प्रदेश की मिशमी पहाड़ियों से होकर बहती है।
- प्रवाह मार्ग: यह असम में प्रवेश करती है और सादिया के पास सियांग और दिबांग नदियों में मिल जाती है, जो सामूहिक रूप से ब्रह्मपुत्र का निर्माण करती हैं।
संबद्ध संरक्षण स्थल
- अरुणाचल प्रदेश में कामलांग टाइगर रिजर्व (Kamlang Tiger Reserve) का नाम कामलांग नदी के नाम पर रखा गया है, जो विशाल लोहित नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- लोहित नदी के चापोरी (Chapories) (नदी की रेत के अस्थायी टीले) असम में ‘प्रमुख जैव-विविधता क्षेत्र’ का हिस्सा हैं।
|
मिशन गोल्डन स्पाइस

|
हाल ही में केंद्रीय संचार तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने मेघालय की लाकाडोंग हल्दी मूल्य शृंखला को मजबूत करने के लिए ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ का शुभारंभ किया गया है।
मिशन गोल्डन स्पाइस के बारे में
मिशन गोल्डन स्पाइस एक एकीकृत लाकाडोंग हल्दी मूल्य शृंखला संवर्द्धन परियोजना है, जिसका उद्देश्य मेघालय में हल्दी की कृषि और मूल्य-शृंखला के विकास को बढ़ावा देना है।
- उद्देश्य: खेती और प्रसंस्करण से लेकर ब्रांडिंग और बाजार तक पहुँच प्रदान करके पूरी लाकाडोंग हल्दी मूल्य शृंखला को मजबूत करना, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और लाकाडोंग हल्दी को एक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सके।
- नोडल निकाय: उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC)।
- समयावधि: इसकी वर्ष 2025 से 2030 तक की पाँच वर्ष की कार्ययोजना है।
- चरण: इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा; मूल्य शृंखला सुदृढ़ीकरण (2025-2028), और इसके बाद विस्तार एवं स्तर वृद्धि (2028-2030)।
- अभिसरण: यह पहल कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और वाणिज्य मंत्रालयों के साथ-साथ एपीडा (APEDA), स्पाइसेस बोर्ड, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, आईसीएआर (ICAR), नाबार्ड (NABARD), एसएफएसी (SFAC) और मेघालय सरकार के विभिन्न प्रयासों के अभिसरण से संचालित होती है।
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में स्थापित किया गया, जिसका मुख्यालय निजामाबाद, तेलंगाना में है। इसका उद्देश्य भारतीय हल्दी की कृषि, प्रसंस्करण, अनुसंधान और वैश्विक व्यापार को व्यापक रूप से बढ़ावा देना और नियंत्रित करना है।
हल्दी (करक्यूमा लोंगा) के बारे में
हल्दी (Turmeric) जिंजिबेरेसी (Zingiberaceae) परिवार से संबंधित एक उष्णकटिबंधीय बारहमासी पौधा है, जिसके भूमिगत प्रकंदों (Rhizomes) की कटाई कर उन्हें उबालकर एवं सुखाकर सुनहरे-पीले रंग का लोकप्रिय मसाला तैयार किया जाता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ
- जलवायु: यह लगभग 20-30°C तापमान वाली गर्म, आर्द्र परिस्थितियों में अच्छी तरह से बढ़ती है और इसके लिए पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है।
- वर्षा: इसके लिए आमतौर पर 1,500-2,250 मिमी. वार्षिक वर्षा या शुष्क क्षेत्रों में अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता होती है।
- मृदा: इसकी वृद्धि के लिए उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली, जैविक तत्त्वों से युक्त दोमट या बलुई-दोमट मृदा उपयुक्त होती है।
लाकाडोंग हल्दी के बारे में
लाकाडोंग हल्दी एक प्रीमियम हल्दी की किस्म है, जो मुख्य रूप से मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में उगाई जाती है और अपनी अत्यधिक उच्च करक्यूमिन सामग्री के लिए जानी जाती है।
- GI टैग: इसे इसकी विशिष्ट क्षेत्रीय पहचान और विशेषताओं को मान्यता देते हुए वर्ष 2024 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ।
मुख्य विशेषताएँ
- उच्च करक्यूमिन: इसमें लगभग 7-12% करक्यूमिन होता है, जो सामान्य हल्दी की तुलना में काफी अधिक है, जो इसके रंग और संभावित स्वास्थ्य गुणों को बढ़ाता है।
- करक्यूमिन हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य सक्रिय यौगिक है, जो अपने सूजन-रोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जो जोड़ों, हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
- कृषि: यह पारंपरिक रूप से मेघालय के स्वदेशी किसानों द्वारा उगाई जाती है और जैविक खेती प्रथाओं से जुड़ी है।
|