संदर्भ
हाल ही में पत्रिका नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक अध्ययन ने वर्ष 2023 के बाद वैश्विक तापमान में आई तीव्र वृद्धि की व्याख्या की है। इस अध्ययन के अनुसार, यह वृद्धि पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन (Earth’s Energy Imbalance), दीर्घकालिक ला नीना चरण से एल नीनो में संक्रमण तथा मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव के कारण हुई है।
संबंधित तथ्य
- एल नीनो–ला नीना वर्गीकरण में संशोधन
- वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न तीव्र ऊष्मीकरण के कारण एल नीनो और ला नीना की लेबलिंग पद्धति को अद्यतन कर रहे हैं।
- वैश्विक महासागरीय तापमान में वृद्धि से आधार रेखा (Baseline) बदल गई है, जिससे पूर्व निर्धारित सीमा-मान (Thresholds) कम सटीक हो गए हैं।
- नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने यह निर्धारित करने की अपनी गणना पद्धति में संशोधन किया है कि ENSO चरण कब प्रारंभ या समाप्त होते हैं।
- नए मानदंडों के अंतर्गत, अधिक घटनाओं को ला नीना के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जबकि उष्णकटिबंधीय जल के अधिक गर्म होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम घटनाएँ एल नीनो की श्रेणी में आ सकती हैं।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- असामान्य ट्रिपल डिप: वर्ष 2020 से 2023 तक, पृथ्वी ने एक असामान्य “ट्रिपल डिप” ला नीना का अनुभव किया, जिसके बीच कोई एल नीनो नहीं आया।
- ला नीना में, गर्म जल गहराई में बना रहता है, जिसके परिणामस्वरूप सतह ठंडी रहती है। और इससे अंतरिक्ष में बाहर जाने वाली ऊर्जा की मात्रा कम हो जाती है।
- पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन में वृद्धि के कारण: हालिया ऊर्जा असंतुलन में वृद्धि का लगभग 23% हिस्सा असामान्य रूप से लंबी ला नीना (2020–2023) अवस्था के कारण है।
- ऊर्जा असंतुलन का 50% से थोड़ा अधिक भाग कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस के दहन से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जुड़ा है।
- पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन पर अंतर्दृष्टि: पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन में वृद्धि का अर्थ है कि अधिक ऊष्मा अवशोषित हो रही है, जिससे वैश्विक तापमान अधिक होता है।
- हालिया ऊर्जा असंतुलन वृद्धि का लगभग 75% निम्नलिखित के संयुक्त प्रभाव के कारण है:
- दीर्घकालिक मानव-जनित जलवायु परिवर्तन, तथा
- तीन वर्ष लंबी ला नीना (शीतलन चरण) से एक ऊष्मणकारी एल नीनो चरण में परिवर्तन।
- औसत मासिक तापमान में वृद्धि: पृथ्वी के औसत मासिक तापमान ने वर्ष 2023 की शुरुआत में मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से जुड़े दीर्घकालिक बढ़ते रुझान से ऊपर एक स्पष्ट वृद्धि की और वह वृद्धि वर्ष 2025 तक जारी रही।
एल नीनो के बारे में
- एल नीनो, जिसका अर्थ स्पेनिश में “द लिटिल बॉय” है, सामान्यतः जाना जाने वाला शब्द है, जो विषुवतीय प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य ऊष्मीकरण को संदर्भित करता है।
- यह मानसूनी वर्षा में कमी के लिए जाना जाता है।

- इसे सबसे पहले वैज्ञानिकों ने 1920 के दशक में नोटिस किया था।
- यह औसतन प्रत्येक दो से सात वर्ष में होता है, और इसके प्रकरण सामान्यतः नौ से 12 महीने तक रहते हैं।
- निर्माण
- यह तब निर्मित होता है, जब विषुवतीय प्रशांत के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली व्यापारिक पवनें वायु दाब में परिवर्तन के कारण धीमी पड़ जाती हैं या दिशा बदल देती हैं, हालाँकि वैज्ञानिक पूरी तरह निश्चित नहीं हैं कि इस चक्र की शुरुआत किस कारण से होती है।
- क्योंकि व्यापारिक पवनें सूर्य से गर्म हुए सतही जल को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनके कमजोर पड़ने से पश्चिमी प्रशांत का गर्म जल वापस ठंडे मध्य और पूर्वी प्रशांत बेसिनों में प्रसारित हो जाता है।
ला नीना
- ला नीना का अर्थ स्पेनिश में “लिटिल गर्ल” है। ला नीना को कभी-कभी एल विएहो, एंटी-एल नीनो या केवल एक शीत घटना भी कहा जाता है।
- यह एल नीनो के विपरीत है, जो उसी क्षेत्र में समुद्री सतही जल के असामान्य शीतलन को दर्शाता है और भारत में वर्षा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
- ला नीना घटना की खोज केवल 1980 के दशक में हुई थी।