आयकर अधिनियम, 2025

2 Apr 2026

संदर्भ

1 अप्रैल, 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 प्रभाव में आया है, जिसने भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल और आधुनिक बनाने के लिए वर्ष 1961 के अधिनियम को प्रतिस्थापित किया।

आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत प्रमुख परिवर्तन

  • सरलीकृत संरचना और भाषा: यह अधिनियम, प्रावधानों को संक्षिप्त कर और अधिक स्पष्ट, पाठक-अनुकूल भाषा का उपयोग करके जटिलता को कम करता है।
    • इसने कुल धाराओं की संख्या 819 (1961 अधिनियम) से घटाकर 536 कर दी तथा अध्यायों को 47 से घटाकर 23 कर दिया, जिससे व्याख्या आसान हो गई है।
    • कुल प्रपत्रों की संख्या 399 से घटाकर 190 कर दी गई है, जिससे फाइलिंग प्रक्रियाएँ सरल हुई हैं।
  • कर वर्ष’ की अवधारणा का परिचय: यह वित्तीय वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (AY) को एकल कर वर्ष” में सम्मिलित करता है।
    • कर वर्ष” एक सरल 12-महीने की अवधि है, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होती है।
    • यह उस वर्ष को दर्शाता है, जिसमें आय अर्जित होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुपालन आसान होता है।
  • तर्कसंगत कर स्लैब और उच्च मानक कटौती: नई व्यवस्था के अंतर्गत संशोधित स्लैब मध्यम आय वर्ग पर कर भार को कम करते हैं।
    • मानक कटौती को बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है, जिससे उपलब्ध आय में वृद्धि होती है।
  • MAT और AMT में संरचनात्मक परिवर्तन: न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) और वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) के प्रावधानों को अधिक स्पष्टता हेतु अलग-अलग उप-धाराओं में विभाजित किया गया है, जहाँ MAT उच्च लाभ लेकिन शून्य कर देने वाली कंपनियों पर लक्षित है तथा AMT गैर-निगमित संस्थाओं पर केंद्रित है।
    • ये संशोधित प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि कॉरपोरेट करदाताओं तथा उच्च आय वाली गैर-निगमित इकाइयाँ (₹20 लाख से अधिक आय), छूटों का दावा करने के बावजूद न्यूनतम कर का भुगतान करें।
  • सरलीकृत अनुपालन और फेसलेस प्रणाली: पारदर्शिता हेतु फेसलेस आकलन और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया गया है। सरल प्रपत्र और प्रक्रियाएँ अनुपालन बोझ को कम करती हैं।
  • अघोषित आय के दायरे का विस्तार: इसमें वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों (जैसे क्रिप्टो) को भी अघोषित आय में शामिल किया गया है।
  • कर प्राधिकरणों के लिए डिजिटल पहुँच: जाँच के दौरान प्राधिकरणों को वर्चुअल डिजिटल स्पेस” (जैसे- ईमेल, ट्रेडिंग अकाउंट आदि) तक पहुँच की अनुमति दी गई है, जिससे कर चोरी का पता लगाने में दक्षता बढ़ती है।

कर सुधारों का संभावित प्रभाव

  • अनुपालन की सुगमता में वृद्धि: सरलीकृत प्रावधान और एकीकृत कर वर्ष” प्रक्रियात्मक जटिलताओं को कम करते हैं तथा करदाताओं के बीच स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करते हैं।
  • पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता को बढ़ावा: स्पष्ट भाषा और स्थिर कर संरचना अस्पष्टता को कम करती है, जिससे कर प्रणाली में विश्वास बढ़ता है।
  • आर्थिक विकास को समर्थन: कम कर भार से उपलब्ध आय में वृद्धि होती है, जिससे उपभोग, बचत और समग्र आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
  • डिजिटल कर शासन को सुदृढ़ करना: वर्चुअल परिसंपत्तियों को शामिल करना और डिजिटल प्रवर्तन शक्तियाँ प्रदान करके कर प्रणाली को विकसित होती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाता है।
  • विवाद और प्रशासनिक बोझ में कमी: सरलीकृत प्रावधान विवादों को कम करते हैं तथा न्यायिक और प्रशासनिक संसाधनों को अधिक कुशल शासन के लिए मुक्त करते हैं।

निष्कर्ष

यह अधिनियम आधुनिक, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल व्यवस्था की ओर एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है, जो भारत की कर प्रणाली को विकसित होती आर्थिक और डिजिटल वास्तविकताओं के साथ संरेखित करता है।

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.