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अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते

1 Apr 2026

संदर्भ

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय करदाताओं के साथ रिकॉर्ड 219 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (Advance Pricing Agreements-APAs) किए हैं।

सेफ हार्बर नियम क्या हैं?

  • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 92CB के तहत सुरक्षित आश्रय नियमों को परिभाषित किया गया है और धारा 92C और 92CA के तहत कंपनियाँ सुरक्षित आश्रय सीमाओं के भीतर होने पर बिना किसी विवाद के आर्म्स लेंथ प्राइस (वह कीमत जिस पर असंबंधित पक्ष खुले बाजार में व्यापार करेंगे) घोषित कर सकती हैं।

भारत में कानूनी आधार

  • आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत लागू।
  • धारा 92CB द्वारा शासित।
  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा अधिसूचित नियमों के माध्यम से कार्यान्वित।

संबंधित तथ्य 

  • विशेष रूप से, इस वर्ष भारत ने फ्राँस, आयरलैंड, इंडोनेशिया और स्वीडन के साथ अपने पहले द्विपक्षीय अग्रिम मूल्य समझौते (APAs) पर हस्ताक्षर करने की उपलब्धि भी हासिल की है।
  • सेफ हार्बर नियम, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (APA) ढाँचे के पूरक हैं और हस्तांतरण मूल्य निर्धारण में निश्चितता प्राप्त करने के लिए एक तीव्र और कम लागत वाला विकल्प प्रदान करते हैं।

अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते के बारे में

  • अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता (APA) मूल रूप से करदाता और कर अधिकारियों के बीच एक समझौता होता है, जिसमें सहायक कंपनी और उसकी विदेशी मूल कंपनी के बीच होने वाले लेन-देन से संबंधित हस्तांतरण मूल्य निर्धारण की विधि निर्धारित की जाती है।
    • यह समझौता सीमा पार लेन-देन में किसी संगठन के भीतर हस्तांतरित होने वाली मूर्त और अमूर्त संपत्तियों, सेवाओं और निधियों के मूल्य निर्धारण से संबंधित है।
  • नोडल मंत्रालय: वित्त मंत्रालय ने आयकर अधिनियम, 1961 में धारा 92CC और 92CD को जोड़कर वर्ष 2012 में APA योजना को अधिसूचित किया था।
  • कार्यप्रणाली: यह एक स्वैच्छिक व्यवस्था है, जो हस्तांतरण मूल्य निर्धारण विवादों को संबोधित करने और हल करने के लिए दोहरे कराधान निवारण समझौतों (DTAs) के तहत मौजूदा अपीलीय प्रक्रियाओं और प्रावधानों के साथ कार्य करती है।
  • पात्रता: कोई भी करदाता, जो अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में शामिल है या शामिल होने की योजना बना रहा है, उसे अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते के लिए आवेदन करना आवश्यक है।
  • लेन-देन का दायरा: APA में अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की एक विस्तृत शृंखला शामिल हो सकती है, जिनमें शामिल हैं:-
    • मूर्त वस्तुओं की बिक्री/खरीद।
    • अमूर्त संपत्तियों का हस्तांतरण (जैसे- ट्रेडमार्क, पेटेंट)।
    • सेवाओं का प्रावधान (जैसे- आईटी सेवाएँ, परामर्श, अनुसंधान एवं विकास सेवाएँ)।
    • वित्तीय लेन-देन (जैसे- समूह के भीतर ऋण, गारंटी)।
    • लागत अंशदान व्यवस्था।
  • अवधि: एक APA लगातार पाँच वर्षों तक लागू हो सकता है। इसके अतिरिक्त, भारत की APA व्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण “रोल-बैक” प्रावधान है, जो APA को पिछले चार वर्षों तक लागू करने की अनुमति देता है।

 विभिन्न प्रकार के APA 

  • एकपक्षीय (Unilateral): यह एक ऐसा APA है, जो करदाता और उस देश के कर प्रशासन के बीच किया जाता है, जहाँ वह कर भुगतान के दायरे में आता है।
  • द्विपक्षीय (Bilateral): यह एक ऐसा APA है, जो करदाताओं, मेजबान देश (Host country) के कर प्रशासन और विदेशी कर प्रशासन के बीच किया जाता है।
  • बहुपक्षीय (Multilateral): यह एक ऐसा APA है, जो करदाताओं, मेजबान देश के कर प्रशासन और एक से अधिक विदेशी कर प्रशासनों के बीच किया जाता है।

लाभ

  • विवादों में कमी: अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों का उद्देश्य करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच ‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ (स्थानांतरण मूल्य निर्धारण) से संबंधित विवादों को कम करना है।
  • कराधान में निश्चितता: ये समझौते करदाताओं को सीमा पार होने वाले लेन-देन के मूल्य निर्धारण के संबंध में पूर्व से ही निश्चितता प्रदान करते हैं।
  • मुकदमेबाजी का कम बोझ: APA मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करते हैं और करदाताओं तथा कर प्रशासन दोनों के लिए अनुपालन के बोझ को कम करते हैं।
  • व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business): ये एक स्थिर और पूर्वानुमानित कर वातावरण सुनिश्चित करके व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देते हैं।
  • दोहरे कराधान से बचाव: ये विभिन्न क्षेत्राधिकारों के बीच स्थानांतरण मूल्य निर्धारण के परिणामों में तालमेल बिठाकर दोहरे कराधान को रोकने में मदद करते हैं, विशेष रूप से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों के मामले में।

सीमाएँ

  • समय लेने वाली बातचीत की प्रक्रिया: अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों में लंबी बातचीत और मूल्यांकन शामिल होते हैं, जिन्हें पूरा होने में अक्सर कई वर्ष लग जाते हैं।
    • उदाहरण के लिए: भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय APA में कर अधिकारियों के मध्य विस्तृत जाँच और समन्वय के कारण 2-3 वर्ष लग सकते हैं।
  • व्यापक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता: APA के लिए व्यापक वित्तीय डेटा, ट्रांसफर प्राइसिंग विश्लेषण और सहायक दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिससे अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ जाता है।
    • उदाहरण के लिए: एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को मूल्य निर्धारण विधियों, तुलनात्मक लेन-देन और वैश्विक वित्तीय विवरणों पर विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • सीमित प्रशासनिक क्षमता: कर अधिकारियों को जटिल APA मामलों को कुशलतापूर्वक सँभालने के लिए कुशल कर्मियों और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
    • उदाहरण के लिए: प्रशासन में ट्रांसफर प्राइसिंग विशेषज्ञों की सीमित संख्या के कारण APA आवेदनों की बड़ी संख्या से देरी हो सकती है।
  • बहुपक्षीय APA में जटिलता: बहुपक्षीय APA अत्यधिक जटिल होते हैं, क्योंकि उनमें अलग-अलग कर कानूनों और प्राथमिकताओं वाले कई क्षेत्राधिकार शामिल होते हैं।
    • उदाहरण के लिए: भारत, जापान और जर्मनी से जुड़े एक APA को ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों और संधि की व्याख्याओं में अंतर के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सेफ हार्बर नियम बनाम अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते

विशेषता सेफ हार्बर नियम अग्रिम मूल्य निर्धारण (APA)
अर्थ कर अधिकारियों द्वारा स्वीकृत पूर्व-निर्धारित मार्जिन ट्रांसफर प्राइसिंग पर अग्रिम समझौता
कानूनी प्रावधान धारा 92CB, आयकर अधिनियम धारा 92CC और 92CD, आयकर अधिनियम
प्रकृति नियम-आधारित (मानकीकृत) आपसी बातचीत से तय समझौता
लचीलापन कम लचीलापन काफी लचीलापन
दायरा निर्दिष्ट लेन-देनों तक सीमित लेन-देन की एक विस्तृत शृंखला को शामिल करता है।
आवश्यक समय त्वरित समय लेने वाली प्रक्रिया
अनुपालन का बोझ कम अधिक (दस्तावेजीकरण और बातचीत)
अनुकूलन कोई अनुकूलन नहीं करदाता की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार
लागू होने की स्थिति वैकल्पिक वैकल्पिक
वापसी का प्रावधान उपलब्ध नहीं उपलब्ध (4 वर्ष तक के लिए)।

आगे की राह

  • प्रक्रियाओं का सरलीकरण: मानकीकृत दस्तावेजीकरण और तीव्र अनुमोदन समयसीमा के माध्यम से APA प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: डिजिटल फाइलिंग सिस्टम और सामान्य लेन-देन के लिए पूर्व-अनुमोदित टेम्पलेट्स (Templates) शुरू करने से प्रक्रियात्मक देरी को कम किया जा सकता है।
  • क्षेत्र-विशिष्ट मार्गदर्शन: ई-कॉमर्स, फिनटेक और डिजिटल सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने से प्रभावशीलता में सुधार हो सकता है।
    • उदाहरण के लिए: अमूर्त संपत्ति (Intangible assets) और डेटा मुद्रीकरण (Data monetization) से निपटने वाली डिजिटल कंपनियों के लिए APA ढाँचा प्रदान करना।
  • वैश्विक कर सुधारों के साथ एकीकरण: APA तंत्र को ओईसीडी (OECD) के ‘बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग’ (BEPS) ढाँचे जैसी अंतरराष्ट्रीय पहलों के साथ जोड़ना।
    • उदाहरण के लिए: बहुराष्ट्रीय उद्यमों द्वारा लाभ के हस्तांतरण को रोकने के लिए APA वार्ताओं में BEPS कार्य योजनाओं (Action Plans) को शामिल करना।
अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते

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